क्या योगी आदित्यनाथ करा सकतें हैं राम मंदिर का निर्माण, ये हैं विकल्प
क्या योगी आदित्यनाथ राम मंदिर का निर्माण करा सकते हैं, क्या हैं राम मंदिर के निर्माण के विकल्प।
लखनऊ। राम मंदिर का मुद्दा हमेशा से ही तमाम राजनीतिक दलों के लिए अहम चुनावी मुद्दा रहा है, लेकिन जिस तरह से यूपी में भाजपा की प्रचंड जीत हुई और योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें उसके बाद वह ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जब वह राम मंदिर निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। यह मुद्दा इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में है, इलाहाबाद कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले पर अपना फैसला दिया था, जिसके बाद विकल्प काफी सीमित हो गए हैं। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प है कि राम मंदिर के निर्माण में योगी आदित्यनाथ के पास क्या विकल्प है।

सदन में ला सकते हैं विधेयक
यूपी के चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ कई बार राम मंदिर को लेकर बयान देते रहे, जिसके बाद पार्टी को 325 सीटें हासिल हुई है। यूपी में इस बड़ी जीत के बाद योगी आदित्यनाथ इस स्थिति में पहुंच गए हैं कि वह अपने सहयोगियों के के साथ मिलकर सदन में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक विधेयक ला सकते हैं। ऐसे में राम मंदिर निर्माण को लेकर योगी आदित्यनाथ के पास पहला विकल्प यह है कि वह सदन में विधेयक लाएं।

विधेयक को लेकर क्या है अड़चन
सदन में विधेयक लाने पर दो तर्क हो सकते हैं, पहल तर्क तो यह है कि सदन में विधेयक लाने से सुप्रीम कोर्ट में चल रही लंबी प्रक्रिया से छुटकारा पाया जा सकता है, जबकि दूसरा तर्क यह भी हो सकता है कि यह विवाद अचल संपत्ति से जुड़ा है लिहाजा यूपी सरकार विधेयक के रास्ते मंदिर निर्माण का फैसला नहीं ले सकती है, ऐसे में यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना पड़ेगा।

संसद में भी भाजपा के पास है विकल्प
वहीं राम मंदिर विवाद को लेकर एक और विकल्प यह भी है कि इस इसको लेकर संसद में एक कानून पास किया जाए, जिसे पास करने के लिए दोनों सदनों में केंद्र सरकार को बहुमत की जरूरत होगी। हालांकि लोकसभा में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है लेकिन राज्यसभा में पार्टी के पास अभी भी बहुमत नहीं है, लेकिन अगले वर्ष पार्टी का राज्यसभा में नंबर बेहतर होगा, ऐसे में पार्टी अगले वर्ष इस मुद्दे को आगे बढ़ा सकती है और कानून को पास करा सकती है। 2018 के अंत तक राज्यसभा में भाजपा के पास कुल 98 सीटें होगी, ऐसे में पार्टी एआईएडीएमके के समर्थन से इस कानून को पास करा सकती है।

क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज राम मंदिर विवाद पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि अगर इस मामले में दोनो पक्ष कोर्ट के बाहर समझौता करें तो अच्छा होगा, अगर दोनों पक्ष चाहें तो मैं खुद इस मामले में मध्यस्थता कर सकता हूं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों पक्ष कोर्ट के बाहर समझौता करने के लिए तैयार हैं तो इस मामले की सुनवाई कोर्ट में नहीं होगी। लेकिन इस टिप्पणी के बाद बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के पैरोकार जफरयार गिलानी ने कहा कि आपसी बातचीत से सुलह नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या जज इसमें मध्यस्थता करें तो हम इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास जो तजुर्बा है उसके हिसाब से समझौता नहीं हो सकता है, कई बार हमने कोशिश की लेकिन समझौता नहीं हो सका है।












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