'समलैंगिक सेक्स को मान्यता मिलने से सबसे ज्यादा लाभ कट्टरपंथी मौलानाओं को'
लखनऊ। धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं मामना है। लेकिन फैसले पर शिया वक्फ बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने लेस्बियन और होमोसेक्स को लेकर मदरसों के मौलानाओं पर निशाना साधा है। वसीम रिजवी ने कहा कि आज होमोसेक्स और लेस्बियन को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबसे ज्यादा राहत कट्टरपंथी मौलानाओं को मिलेगी। लखनऊ में गुरुवार को एक वीडियो जारी करते हुए उन्होंने ये बात कही।

वसीम रिजवी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि होमोसेक्स और लेस्बियन सेक्स की इस्लाम में सख्त मनाही है। फिर भी इस्लाम की तालीम देने वाले कट्टरपंथी मदरसों में मौलाना होमो सेक्स की क्रिया में लिप्त रहते हैं। आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा होमो सेक्स और लेस्बियन सेक्स को मान्यता देने के बाद हम समझते हैं सबसे बड़ी राहत कट्टरपंथी मदरसों के मुल्लाओं को मिली है, क्योंकि शरई तौर पर ये सेक्स तो हराम है। लेकिन शरियत का कानून इस मामले में हिंदुस्तान में लागू नहीं होता और कट्टरपंथी मदरसों में मौलाना होमो सेक्स की क्रिया में लिप्त रहते हैं। लेकिन संविधान के तहत बनाए गए कानून में पहले ये अपराध था, लेकिन अब यह नहीं है। अब इन मुल्लाओं के लिए सारी परेशानियां समाप्त हो चुकी हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार बड़ा फैसला देते हुए धारा 377 के तहत को आपसी सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। फैसला सुनाने वाली संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, जस्टिस आर एफ नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा भी शामिल थे। अदालत ने इस मामले में फैसला 17 जुलाई को ही सुरक्षित रख लिया था।












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