Ayodhya Ram Mandir के बाद Vindhyachal Dham में चढ़ावा घोटाला? सोने-चांदी के गहने गायब, आरोपी कौन?
Vindhyachal Dham Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे घोटाले का सदमा अभी भक्तों के दिल से उतरा भी नहीं था, कि अब उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम में भी घपले की खबर सामने आ रही है। सोने-चांदी के आभूषणों के रिकॉर्ड और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
श्री विंध्य पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने आरोप लगाया है कि दान पात्रों से निकलने वाले कीमती आभूषणों का विस्तृत विवरण नहीं रखा जाता। केवल 'पीली धातु' और 'सफेद धातु' लिखकर एंट्री कर दी जाती है। वजन, डिजाइन या अनुमानित कीमत का कोई रिकॉर्ड नहीं बनता। यह विवाद भक्तों की आस्था और मंदिर प्रबंधन की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि क्यों और कितने उठाया दान में स्कैम का मुद्दा?

Vindhyachal Dham: शक्तिपीठ की पावन नगरी
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में गंगा के किनारे बसा विंध्याचल धाम भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यहां मां विंध्यवासिनी आदिशक्ति का रूप मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण के जन्म के समय योगमाया कंस के हाथ से बचकर विंध्य पर्वत पर आईं और यहीं विराजमान हुईं।
त्रिकोण परिक्रमा का विशेष महत्व है:
- मां विंध्यवासिनी मंदिर
- अष्टभुजा देवी मंदिर
- कालीखोह मंदिर
मान्यता है कि इन तीनों की परिक्रमा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रों में लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में भी हजारों भक्त दर्शन करते हैं। मंदिर प्रबंधन उत्तर प्रदेश विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद के अधीन है, जो 1982 से सक्रिय है। जिला प्रशासन (सिटी मजिस्ट्रेट) की निगरानी में काम होता है।
Vindhyachal Dham Donation: चढ़ावा कितना आता है? दान प्रक्रिया कैसे चलती है?
मंदिर परिसर में कुल 22 दान पात्र लगे हैं। इनमें नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य सामग्री आती है।
- वार्षिक नकद संग्रह: लगभग डेढ़ करोड़ रुपये (प्रशासनिक आंकड़े)।
- नवरात्र में बढ़ोतरी: चैत्र और शारदीय नवरात्र में राशि कई गुना बढ़ जाती है।
- डिजिटल सुविधा: QR कोड से ऑनलाइन दान की व्यवस्था।
दान खोलने की प्रक्रिया:
- हर 3-4 महीने में दान पात्र खोले जाते हैं।
- मजिस्ट्रेट, लेखपाल, अमीन की मौजूदगी में गिनती।
- पूरी प्रक्रिया CCTV कैमरों के अधीन।
- नकद राशि बैंक में जमा।
- आभूषण डबल लॉकर सिस्टम में सुरक्षित रखे जाते हैं।
Who Is Rajan Pathak: विंध्याचल धाम डोनेशन में स्कैम उजागर करने वाले राजन पाठक कौन?
श्री विंध्य पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने मुख्य आरोप लगाया है। आइए जानते हैं कि क्या-क्या...
- सोने-चांदी के आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड नहीं बनता।
- रजिस्टर में सिर्फ 'पीली धातु' (सोना) और 'सफेद धातु' (चांदी) लिखा जाता है।
- वजन, डिजाइन, कीमत या फोटो का कोई उल्लेख नहीं।
- 1982 से परिषद प्रबंधन संभाल रही है, लेकिन स्टॉक रजिस्टर या सार्वजनिक इन्वेंट्री नहीं बनी।
- इससे गबन या अनियमितता की आशंका बनी रहती है।
पाठक का कहना है कि जब कोई भक्त भारी कीमत का आभूषण चढ़ाता है तो उसका पूरा विवरण दर्ज होना चाहिए ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे।
Vindhyachal Dham Donation Scam UP Government Stand: प्रशासन का जवाब- कोई घोटाला नहीं, सब पारदर्शी
- विंध्य विकास परिषद के सचिव और सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने आरोपों का खंडन किया है। कहा कि गिनती पूरी तरह प्रशासनिक निगरानी में होती है। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी अनिवार्य होती है। CCTV निगरानी में प्रक्रिया पूरी होती है। आभूषण डबल लॉकर में सुरक्षित हैं।
- उनके कार्यकाल में ऐसी कोई शिकायत नहीं आई। सोने-चांदी की मात्रा ज्यादा नहीं होती, लेकिन जो आता है उसकी सुरक्षा सुनिश्चित है।
Adyodhya Ram Mandir Donation Scam Update: अयोध्या राम मंदिर विवाद से जुड़ाव: क्यों उठे सवाल?
यह विवाद ठीक उसी समय उठा, जब अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित घोटाले की SIT जांच चल रही है। क्या लगे राम मंदिर के चढ़ावे में आरोप...
- करोड़ों रुपये नकद गबन के आरोप।
- सोने-चांदी के आभूषण लापता होने के दावे।
- 60 किलो चांदी की शिलाएं गायब बताई जा रही हैं।
- SIT जांच में कई कर्मचारियों से पूछताछ।
इन घटनाओं ने देशभर के प्रमुख मंदिरों में दान प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विंध्याचल में भी इसी लहर में पारदर्शिता की मांग जोर पकड़ रही है।
राजनीतिक मायने क्या?
यह विवाद 2027 UP विधानसभा चुनाव (UP Vidhan Sabha Chunav 2027)से पहले संवेदनशील है। भाजपा सरकार 'मंदिर-मंदिर विकास' और भक्तों की आस्था की रक्षा का दावा करती है। ऐसे में किसी भी अनियमितता का आरोप विपक्ष के लिए मुद्दा बन सकता है। दूसरी तरफ, लाखों भक्तों की आस्था शामिल है। एक छोटी लापरवाही भी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर देती है। पूर्व पंडा समाज और स्थानीय लोगों में भी मंदिर प्रबंधन को लेकर असंतोष की आवाजें उठ रही हैं। वे बेहतर सुविधाएं, स्वच्छता और पारदर्शिता चाहते हैं।













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