उत्तर प्रदेश: उपेक्षा से आहत बांदा में वैश्य बनेंगे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खेवनहार

बांदा, 14 फरवरी: प्रमुख राजनीतिक दलों में बीजेपी सर्व वैश्यों की पहली पसंद रही है। अधिकांश आम चुनाव में वैश्य भाजपा को वोट करता था रहा है, लेकिन बुंदेलखंड में बांदा छोड़कर कहीं भी वैश्य प्रत्याशी को किसी दल ने टिकट नहीं दिया। मात्र कांग्रेस ने टिकट देकर वैश्यों के जख्मों में मरहम लगाने का काम किया है। उपेक्षा से अपने आप को ठगा महसूस कर रहे वैश्य बांदा सदर सीट में कांग्रेस का खेवनहार बन पाएंगे?

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कांग्रेस ने ऐसे समय जब पूरे बुंदेलखंड की 19 सीटों में किसी अन्य दल ने वैश्य समाज को टिकट देना जरूरी नहीं समझा। उस समय वैश्य समाज को भावात्मक रूप से अपनी ओर खींचने के लिए कांग्रेस ने बांदा सदर सीट से लक्ष्मी नारायण गुप्ता को प्रत्याशी बनाकर वैश्य समाज का दिल जीतने का काम किया है।

कांग्रेस ने व्यापारी पर लगाया दांव

ऐसे में बांदा सदर सीट से कांग्रेस ने निर्विवाद और बेदाग छवि के व्यापारी और समाजसेवी लक्ष्मी नारायण गुप्ता को चुनाव मैदान में उतार कर सभी दलों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। बांदा में विधानसभा में जातिगत आंकड़ों पर गौर करें तो वैश्य मतदाताओं की संख्या 35 हजार से अधिक है। यह मतदाता हर चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। अगर भावनात्मक रूप से वैश्यों का रुझान कांग्रेस की तरफ हुआ तो सभी राजनीतिक दलों के समीकरण गड़बड़ा जायेंगे।

2017 के चुनाव में तीसरे पायदान पर थी कांग्रेस

जनपद में कांग्रेस भले ही कमजोर हो लेकिन बांदा विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक स्व. विवेक सिंह के जीवित रहते कांग्रेस का बोलबाला था। 2017 के चुनाव में हारने के बाद भी वह तीसरे स्थान पर थे। इस हिसाब से देखा जाए तो इस क्षेत्र में कांग्रेस का परंपरागत मतदाता मौजूद है और अगर वैश्य मतदाता जुड़ता है तो कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होगा।

कांग्रेस के पूर्व विधायक की पत्नी ने पाला बदला

हालांकि विवेक सिंह की पत्नी मंजुला विवेक सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। पार्टी को भरोसा है कि पूर्व मंत्री विवेक सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी को मतदाताओं का सहानुभूति वोट मिल सकता है। इसके अलावा उनके पास ठाकुर, यादव और मुस्लिम मतदाताओं की ताकत है।वही भाजपा ने एक बार फिर प्रकाश द्विवेदी को चुनाव मैदान में उतारा है। उन्हें भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी के कार्यों का लाभ मिलेगा। इनके पास ब्राम्हण कायस्थ के अलावा परंपरागत मतदाता है। इसी तरह बसपा के उम्मीदवार धीरज राजपूत अपने परंपरागत मतदाताओं के भरोसे चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए लालायित हैं, अब देखना है कि वैश्य मतदाताओं की पसंद कौन प्रत्याशी बनता है।

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