Ram Mandir: कौन होगा वो लकी मैन जिनके हाथों बनी मूर्ति की राम मंदिर में होगी पूजा? 3 आर्टिस्ट्स ने बहाया पसीना
Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर निर्माण के साथ सबसे बड़ी जिम्मेदारी भारत के टॉप तीन मूर्तिकारों पर है, जो कल्पना के आधार पर मूर्ति उकेरने में माहिर हैं। ये तीनों सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार हैं, लेकिन राम मंदिर के लिए मूर्ति बनाना इनके लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट ने एक बयान में कहा है कि रामलला के मूर्ति के लिए जो मानक रखा गया है, उस पर खरा उतने वाली मूर्ति को ही श्री राम जन्मभूमि पर बने राम मंदिर के लिए चुना जाएगा।
22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले पूजन का कार्यक्रम 16 जनवरी से ही शुरू जाएगा। इससे पहले ही मूर्ति का चयन किया जाएगा। दरअसल, मूर्ति का चयन करने के लिए ट्रस्ट ने बकायदा प्रक्रिया निर्धारित की है। इसके साथ इसके लिए मानक भी तय किए गए हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास देश के टॉप तीन शिल्पकारों को रामलला की मूर्ति बनाने का जिम्मा सौंपा था उन्हीं में से किसी एक आर्टिस्ट की मूर्ति का चयन किया जाना है। मूर्ति चयन प्रक्रिया के तहत तीनों कलाकारों की मूर्तियों को बकायदा जांचा परखा जाएगा।

रामलला की मूर्ति का चयन कैसे?
राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित की जाने वाली मूर्ति बेहद खास होगी। इसमें रामलला एक बालक के रूप में विराजमान होंगे। राम मंदिर ट्रस्ट ने एक बयान में कहा कि रामलला की मूर्ति तीन मूर्तिकारों गणेश भट्ट, अरुण योगिराज, सत्यनारायण पांडेय द्वारा टियर की जा रही है, इनमें में से जो भी मूर्तिकार पांच वर्ष के बालक की कोमलता को उकेरने में सफल होगा, उसी की मूर्ति चुनी जाएगी।
प्राण प्रतिष्ठा से 4 दिन पहले चुनी जाएगी मूर्ति
मैसूर के प्रसिद्ध शिल्पी अरुण योगीराज ने रामलला की मूर्ति के निर्माण का काम पूरा कर लिया है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह से चार दिन पहले मूर्ति के मंदिर में स्थापित किए जाने की संभावना है। दरअसल, अरुण देश के उन तीन मूर्तिकारों में शामिल हैं जिन्हें देश के सबसे बहुप्रतीक्षित मंदिर के लिए मूर्ति तराशने का काम दिया गया है। इसके अलावा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दो अन्य शिल्पकारों को भी रामलला की मूर्ति बनाने का जिम्मा सौंपा है। इनमें बेंगलूरु के जी.एल. भट्ट और राजस्थान के सत्यनारायण पांडेय शामिल हैं।
अरुण योगिराज ने एक इंटरव्यू में अपने हाथों बनाई गई रामलला के मूर्ति का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि इसे बनाने में उन्हें 6 महीने का वक्त लगा। मूर्ति की ऊंचाई पैर से माथे तक 51 इंच है। प्रभावली समेत पूरी मूर्ति आठ फीट से अधिक लंबी और साढ़े तीन फीट चौड़ी है। इसमें भगवान राम पांच साल के बालक के रूप में धनुष और बाण पकड़े हुए हैं।
16 जनवरी से श्री राम जन्मभूमि में शुरू होगी पूजा
बता दें रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए श्री राम जन्मभूमि परिसर में पूजा- पाठ का कार्यक्रम 16 जनवरी से शुरू हो जाएगा। काशी के गणेश्वर शास्त्री द्राविड़, लक्ष्मीकांत दीक्षित पूजा सम्पन्न कराएंगे। प्राण-प्रतिष्ठा पूजन के बाद 48 दिन की मंडल पूजा होगी जो विश्वप्रसन्न तीर्थ जी के नेतृत्व में होगी।












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