UPPSC 2023: राज्यभर में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई RO/ARO परीक्षा, परीक्षा केंद्रों पर रहा सुरक्षा घेरा
UPPSC 2023: उत्तर प्रदेश में रविवार को आयोजित हुई समीक्षा अधिकारी व सहायक समीक्षा अधिकारी (RO/ARO) परीक्षा-2023 ने एक बार फिर यह साबित किया कि तकनीक और प्रशासनिक निगरानी का मजबूत गठजोड़ परीक्षा प्रणाली में भरोसा लौटा सकता है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी यह परीक्षा पूरी पारदर्शिता और कड़े इंतज़ामों के साथ आयोजित की गई।
राज्य भर के 75 जिलों में बनाए गए 2382 केंद्रों पर सुबह 9:30 से दोपहर 12:30 बजे तक एक ही पाली में परीक्षा सम्पन्न हुई। कुल 10.76 लाख पंजीकृत उम्मीदवारों में से करीब 4.55 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा केंद्रों पर न सिर्फ सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम दिखे, बल्कि हर स्तर पर निगरानी का असर भी साफ नजर आया।

कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख जिलों में बड़ी संख्या में केंद्र बने थे, जिनमें भीड़ प्रबंधन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित रही। अयोध्या में सबसे अधिक 52.81% उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि रामपुर में यह आंकड़ा सबसे कम 25.78% रहा। कुल मिलाकर, उपस्थिति औसतन 42.29% रही।
नकल पर शिकंजा, सुरक्षा में तकनीक का दम
इस बार नकल पर नकेल कसने के लिए सरकार ने बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र अपनाया। विशेष निगरानी दलों से लेकर STF तक पूरे दिन सक्रिय रहे। पुराने नकल माफियाओं और परीक्षा अपराधों में लिप्त लोगों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी गई।
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग से लेकर संदिग्ध कोचिंग सेंटरों की जांच तक, हर दिशा में सघन निगरानी की गई। WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर अफवाह फैलाने की हर कोशिश को समय रहते रोका गया। इससे नकल के किसी भी प्रयास को जड़ से खत्म करने में मदद मिली।
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा रही अभूतपूर्व
परीक्षा के गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए इस बार रैंडमाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। दो प्रिंटरों से तैयार प्रश्नपत्रों का चयन परीक्षा से 45 मिनट पहले कंप्यूटर द्वारा किया गया। इससे पेपर लीक की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सका।
प्रश्नपत्रों को यूनिक बारकोड और टेम्पर्ड प्रूफ पैकिंग में रखा गया था, जिन्हें हथियारबंद गार्ड की निगरानी में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया। हर स्तर पर लाइव CCTV की निगरानी रही, जिससे गोपनीयता को कोई खतरा नहीं रहा।
पहचान प्रक्रिया में पूरी तरह तकनीक की मुहर
इस बार परीक्षा में भाग लेने वाले हर अभ्यर्थी की पहचान बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन सिस्टम से सुनिश्चित की गई। इसके साथ ही कंप्यूटर रैंडमाइजेशन से केंद्रों का आवंटन किया गया ताकि किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो सके।
प्रवेश के समय आठ स्तरों की सत्यापन प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें OTR से जुड़े विवरण जैसे नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और हाईस्कूल रोल नंबर की जांच की गई। परीक्षा केंद्रों पर दो परतों की चेकिंग से निषिद्ध वस्तुओं को अंदर ले जाना असंभव हो गया।
परीक्षा केंद्रों पर रहा प्रशासन का चौकस पहरा
हर परीक्षा केंद्र पर एक सेक्टर मजिस्ट्रेट, एक स्टैटिक मजिस्ट्रेट, केंद्र व्यवस्थापक और प्रशिक्षित पर्यवेक्षक तैनात किए गए थे। इनमें से आधे पर्यवेक्षक जिला प्रशासन द्वारा चयनित थे। इनकी तैनाती भी कंप्यूटर रैंडमाइजेशन से की गई थी।
पुलिस आयुक्त या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी नोडल के रूप में नियुक्त किए गए थे, जिनकी निगरानी में पूरा संचालन हुआ। परीक्षा के दौरान अगर कोई अभ्यर्थी अनुचित साधनों का इस्तेमाल करता पाया जाता, तो उस पर यूपी सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत कठोर कार्रवाई की जाती।
परीक्षा में शामिल हुए छात्रों ने इस बार की व्यवस्था को 'बेहद अनुशासित और भरोसेमंद' बताया। प्रयागराज में परीक्षा देने आए वाराणसी निवासी नीरज चंद्रा ने कहा कि प्रवेश से लेकर परीक्षा खत्म होने तक किसी भी स्तर पर कोई ढील नहीं दिखी।












Click it and Unblock the Notifications