UP Lok Sabha Chunav: क्यों अमेठी में चुनाव से पहले ही आगे निकल चुकी हैं स्मृति ईरानी?
Uttar Pradesh Lok Sabha Election: अमेठी में उम्मीदवार घोषित करने में कांग्रेस की देरी उसपर बहुत भारी पड़ सकती है। राहुल गांधी के यहां से उम्मीदवारी छोड़ने और किशोरी लाल शर्मा के नाम के ऐलान में उसकी रणनीतिक देरी से बीजेपी की स्मृति ईरानी को और ज्यादा फायदा मिलता दिख रहा है।
अमेठी में पिछले 10 वर्षों से भाजपा उम्मीदवार स्मृति ने एक तरह से डेरा डाल रखा है। पांच साल पहले जब उन्होंने यहां राहुल गांधी को हरा दिया, उसके बाद तो यहां से उनका कभी संपर्क टूटा ही नहीं है। घर भी बनाया और वहां की मतदाता भी बन गईं। अब कांग्रेस की ओर से जिस तरह से उम्मीदवार तय करने में देरी हुई है, उससे उन्हें और फायदा मिलने की उम्मीद है।

स्मृति ईरानी का प्रचार पहले ही पकड़ चुका है रफ्तार
इस चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री ईरानी लंबे समय से यहां चुनाव कैंप लगा चुकी हैं। वह काफी दिनों से लगातार रैलियां और चुनाव सभाएं कर रही हैं। उनका सहयोग करने के लिए भाजपा का मजबूत कैडर सक्रिय है। जबकि, कांग्रेस प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा का प्रचार तब शुरू हुआ है, जब पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है।
'बहुत देर कर दी'
डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेठी के गौरीगंज में कांग्रेस दफ्तर में मौजूद एक स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता ने कहा है, 'कांग्रेस ने फैसला लेने में बहुत देर कर दिया....अगर किशोरी लाल शर्मा को ही टिकट देना था तो पहले ही घोषणा कर देते...हम लोगों को समय तो मिल जाता।'
अमेठी में लगातार घटने लगा था कांग्रेस का जनाधार
राहुल गांधी 2004 में पहली बार अमेठी से सांसद चुने गए थे। अगले ही चुनाव यानी 2009 से ही यहां पर कांग्रेस का वोट शेयर घटना शुरू हो गया था। 2009 में कांग्रेस को 71 फीसदी और बीजेपी को 6 फीसदी वोट मिले थे। 2014 में कांग्रेस का वोट शेयर घटकर 46.71 फीसदी रह गया और भाजपा का उछलकर 34.38 फीसदी पहुंच गया। 2019 में तो राहुल 43.84 फीसदी लेकर यहां से चलता हो गए और स्मृति ईरानी 49.71 फीसदी लेकर चुनाव जीत गईं।
प्रियंका को है कांग्रेस उम्मीदवार से बड़ी उम्मीद
बकौल प्रियंका गांधी, शर्मा अमेठी में कांग्रेस के लिए बहुत फादेमंद साबित होंगे। इसकी वजह ये है कि उन्हें इस चुनाव क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की जानकारी है। करीब 30 साल से वह यहां कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं। उनके नामांकन के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था, 'किशोरी लाल शर्मा अमेठी के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं....पार्टी का हर कार्यकर्ता उनको जानता है...क्षेत्र की क्या समस्याएं हैं, उन्हें पता है।'
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नहीं दिख रहा उत्साह
लेकिन, कट्टर से कट्टर कांग्रेसी भी मानता है कि कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी की जगह नहीं ले सकते। अमेठी निवासी और पार्टी के पुराने वफादार राकेश सिंह कहते हैं, 'शर्मा का राहुल से कोई मुकाबला नहीं है....उनमें वह बात नहीं है....'
स्मृति ईरानी को कांग्रेस ने ही दी मनोवैज्ञानिक बढ़त
ईरानी वैसे भी राहुल गांधी पर हमलावर रहती हैं। जबसे कांग्रेस ने घोषणा की है, वह और आक्रामक हो चुकी हैं। उन्होंने अमेठी के लोगों से कहा है, 'इससे पता चलता है कि राहुल गांधी ने पहले ही हार मान ली है। वह जानते थे कि वह फिर हारेंगे और इसलिए अमेठी छोड़कर रायबरेली शिफ्ट हो गए।'
भाजपा अमेठी में लगातार जमीन पर सक्रिय है
पिछली बार बीजेपी ने यहां राहुल को करीब 55,000 वोटों से हराया था। लेकिन, वह इस बार भी कोई जोखिम नहीं ले रही है। पार्टी ने इस दौरान कांग्रेस और सपा के कई नेताओं को अपने साथ लिया है। वह गौरीगंज से सपा एमएलए राकेश प्रताप सिंह और अमेठी की विधायक महराजी देवी को भी अपने साथ लाने में सफल रही है।
राकेश प्रताप प्रभावशाली ठाकुर समाज से हैं तो महराजी देवी कुम्हार समाज से हैं, जिनकी अमेठी में एक अच्छी आबादी है। वैसे कांग्रेस की उम्मीद प्रियंका पर टिकी हुई है, जो अमेठी में लगातार चुनाव सभाएं कर रही हैं और पार्टी के बूथ कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठकें कर रही हैं।
अमेठी में काफी कुछ ओबीसी मतदाताओं पर निर्भर है, जो करीब 23 फीसदी हैं। क्योंकि, यहां 21 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं के यूं भी कांग्रेस की ओर जाने की संभावना है। 25 फीसदी दलित वोटरों के कांग्रेस, बीएसपी और बीजेपी में बंटने के चांस हैं। अमेठी में 20 मई को पांचवें चरण में वोटिंग है।












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