UP: नदी संरक्षण की रक्षक बनी योगी सरकार, गंगा-यमुना को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए शुरू हुआ ऐतिहासिक अभियान
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने और बाढ़ की विभीषिका को कम करने के लिए एक व्यापक योजना पर काम कर रही है। राज्य सरकार ने अब गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने, अतिक्रमण रोकने और बाढ़ सुरक्षा के लिए नदी की 'बाढ़भूमि' (Flood Plain) का भौतिक सीमांकन करने का निर्णय लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नदी क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए उन्नाव से लेकर बलिया तक लगभग 710 किलोमीटर के दायरे में पिलर लगाने का कार्य शुरू हो चुका है। इस परियोजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

- लक्ष्य: 31 मार्च 2026 तक सीमांकन कार्य पूरा करने की समयसीमा तय की गई है।
- दायरा: यूपी के 13 जिलों में तकनीकी मानकों के आधार पर फ्लड प्लेन की पहचान कर ली गई है।
- प्रक्रिया: 10 जिलों में टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, जबकि शेष 3 जिलों में प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
- यमुना के लिए योजना: गंगा के साथ-साथ यमुना नदी के किनारे भी 17 जिलों में 21,582 पिलर लगाए जाएंगे।
एनजीटी (NGT) में पेश की गई प्रगति रिपोर्ट
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने इस परियोजना से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में दाखिल की है। 18 दिसंबर को पेश की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि:
- 1.एनजीटी के मई 2025 के आदेशों का पालन करते हुए प्रशासनिक और तकनीकी कदम उठाए जा रहे हैं।
- 2.नदी की सहायक नदियों की बाढ़ भूमि को भी परिभाषित करने का काम चल रहा है।
- 3.वर्तमान में 'सेगमेंट-बी, फेज-द्वितीय' (उन्नाव से बलिया) के कार्यों की कड़ी निगरानी की जा रही है।
क्यों जरूरी है यह सीमांकन?
विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों के किनारे बढ़ता अतिक्रमण उनके प्राकृतिक फैलाव की क्षमता को कम कर देता है, जिससे बाढ़ की तीव्रता और जोखिम बढ़ जाता है। योगी सरकार की यह पहल केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं से बचाव की एक ठोस रणनीति है।












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