UP: मानसून सत्र में दिखेगा महिला सशक्तिकरण का नजारा, आधी अबादी के हित में उठाया गया ये बड़ा कदम
लखनऊ, 15 सितंबर: उत्तर प्रदेश में 19 सितंबर से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मानसून सत्र के दौरान महिला जनप्रतिनिधियों को उनके मुद्दों को उठाने के लिए एक दिन आरक्षित करने का फैसला किया है। अधिकारियों की माने तो इस संबंध में एक निर्णय लिया है जिसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पहली बार विधानसभा में ऐसा हो रहा है। सूत्रों की माने तो कुछ दिन पहले महिला विधायकों ने बातचीत के दौरान विधानसभा अध्यक्ष को अपनी पीड़ा से अवगत कराया था। उन्होंने बताया था कि उन्हें सदन में बोलने का उचित अवसर नहीं मिलता है जिसके बाद विधानसभ अध्यक्ष ने ये बड़ा निर्णयल लिया है।

सरकार का निर्णयल ट्रेंडसेटर साबित होगा
महाना के इस फैसले को लेकर कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि, "हम एक पितृसत्तात्मक समाज में रहते हैं और काम को लेकर कई तरह की समस्याओं का सामना करते हैं। हम किसी भी पेशे में हों, हमें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। राजनीति में ऐसा ज्यादा होता है। महिला प्रतिनिधियों को न तो सरकार और न ही जिला प्रशासन के स्तर पर कोई गंभीरता से लेता है। महिला सदस्यों के लिए एक दिन आरक्षित रखने का निर्णय एक ट्रेंडसेटर होगा। किसी अन्य राज्य विधानसभा ने ऐसी पहल नहीं की है।"

सपा ने भी इस फैसले को सराहा
सदन में महिलओं को लेकर उठाए गए इस फैसले को लेकर समाजवादी पार्टी की मछलीशहर विधायक रागिनी सोनकर ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। सोनकर कहती हैं, "हम आधी आबादी हैं। इसके बावजूद, हम संसद, राज्य विधानमंडल और स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल संख्या का केवल 9 प्रतिशत हैं। राज्य विधानसभा में हम 403 सदस्यों में से केवल 47 महिला विधायक हैं। हमें किसी भी क्षेत्र में उचित भागीदारी नहीं दी जाती है। एक विपक्षी विधायक के तौर पर मुझे सदन में बोलने का ज्यादा मौका नहीं मिलता। मैं निर्णय लेने के लिए अध्यक्ष की आभारी हूं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।''

बीजेपी ने बताया बहुप्रतिक्षित कदम
भाजपा की रायबरेली विधायक अदिति सिंह ने इसे बहुप्रतीक्षित और बहुप्रतीक्षित कदम बताया। अदिति सिंह ने कहा कि, "यह पहल सुनिश्चित करेगी कि महिला सदस्य, जो अन्यथा बोलने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें उनका हक मिलेगा और वे मुद्दे उठा सकती हैं। यह निश्चित रूप से एक नया विचार और नया दृष्टिकोण है।" उत्तर प्रदेश को पहली महिला प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी को संसद भेजने का गौरव प्राप्त है। राज्य की अध्यक्षता दो महिला मुख्यमंत्रियों - स्वर्गीय सुचेता कृपलानी और चार बार मायावती ने की थी। फिर भी राज्य विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व पिछले कुछ वर्षों में खराब रहा है।

महिला सदस्यों को अवसर देने का प्रयास
विधानसभा की इस नई पहल को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा, "सभी महिला सदस्यों को उन मुद्दों पर बोलने का मौका दिया जाएगा, जो वे निर्धारित दिन पर प्रश्नकाल के बाद चाहते हैं।" विधानसभा में 403 सदस्यों की स्वीकृत संख्या है, जिनमें से केवल 47 महिलाएं हैं। अतीत में भी इसका खराब प्रतिनिधित्व रहा है। इसलिए, स्पीकर के इस कदम का सभी दलों की महिला सदस्यों द्वारा स्वागत किया जा रहा है।

विधानसभा में हो चुका है ई विधान प्रणाली का नया प्रयोग
दरअसल पिछले सत्र में सतीश महाना ने यूपी में ई विधान प्रणाली लागू करने की शुरूआत की थी। उनके इस फैसले को भी काफी सराहा गया था। ई विधान प्रणाली का मकसद विधानसभा की कार्यवाही को पेपरलेस करना है। हालांकि इसका असर कब तक विधानसभा में दिखेगा यह कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन अध्यक्ष के तौर पर महाना ने विधानसभा की कार्य प्रणाली और काम काज के तरीके को बदलने का पूरा प्रयास किया है। आने वाले समय में विधानसभा की तस्वीर पूरी बदली दिखाई देने की उम्मीद की जा रही है।












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