UP में स्थायी DGP को लेकर Yogi सरकार ने शुरू की कवायद, इस अफसर पर लगा सकती है दांव
लखनऊ, 08 सितंबर: उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (DGP) और मुख्य सचिव (Chief Secretary) दो ऐसे पद हैं जो हमेशा से ही राजनीतिक रहे हैं। इन पदों पर उन्हीं अफसरों की नियुक्ति हो पाती है जिनका सत्ताधारी दल या यूं कहें कि सीएम के साथ तालमेल अच्छा होता है। तालमेल अच्छा न होने का नतीजा यूपी में मई में उस समय दिखा था जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटा दिया था। उनके हटने के बाद ही यूपी में देवेंद्र सिंह चौहान को कार्यकारी डीजीपी के तौर पर कार्यभार सौंपा गया था। लेकिन अब योगी सरकार ने इस पद पर पूर्णकालिक नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी है। इसके बाद ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि यूपी को जल्द ही स्थायी डीजीपी मिल जाएगा।

स्थायी डीजीपी के लिए शॉर्टलिस्ट होंगे तीन नाम
दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त करने की कवायद शुरू कर दी है। डीजी (खुफिया) देवेंद्र सिंह चौहान को मुकुल गोयल से पदभार संभालने के लिए कहा गया था, क्योंकि बाद में सरकार ने उन्हें मई में हटा दिया था। सरकार अब शीर्ष पद के लिए तीन नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए योग्य अधिकारियों का एक पैनल केंद्र को भेजेगी, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंतिम निर्णय लेंगे।

पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चर्चा
सूत्रों ने बताया कि पुलिस विभाग में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चर्चा चल रही है। कुछ अधिकारियों की राय है कि यदि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) रिक्त तिथि पर फैसला करता है तो उसमें चौहान का नाम लेना मुश्किल होगा क्योंकि गोयल को पिछले 11 मई को हटा दिया गया था। गोयल पर आरोप लगा था कि वह काम में लापरवाही बरत रहे हैं। सीएम के कार्यक्रमों और सरकार के कामों को गंभीरता से न लेना ही उनको महंगा पड़ गया था।

वरिष्ठता क्रम के आधार पर केंद्र को भेजा जाएगा नामों का पैनल
वरिष्ठता क्रम में गोयल के अलावा डीजी (प्रशिक्षण) आरपी सिंह और डीजी (सहकारिता प्रकोष्ठ) जीएल मीणा शीर्ष पर होंगे। वहीं, जिस तारीख से पैनल की मांग की जाएगी, उसके अनुसार अगर फैसला लिया जाता है तो आरपी सिंह और जीएल मीणा का नाम हटा दिया जाएगा क्योंकि उनके रिटायरमेंट में छह महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे में गोयल के बाद भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष राज कुमार विश्वकर्मा और कार्यवाहक डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान का नाम पैनल में शामिल कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

चौहान को ही पूर्णकालिक डीजीपी बनाए जाने के आसार
चौहान को पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में नामित किए जाने की संभावना थी, इसलिए सरकार ने उनकी पात्रता की प्रतीक्षा की, एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध किया। डीजीपी बनने के लिए एक अधिकारी को 30 साल की सेवा पूरी करनी होती है। इसके अलावा वरिष्ठता के क्रम में प्रत्येक अधिकारी का रिकॉर्ड चेक किया जाता है। रिकॉर्ड में कहीं भी रेड इंट्री होने पर अधिकारी का प्रमोशन भी नहीं हो पाता है।

UPSC खंगालती है चयनित अफसरों का रिकॉर्ड
सूत्रों की माने तो यह देखा जाता है कि क्या संबंधित अधिकारी ने कोई अपराध किया है और यदि हां, तो किस वर्ष में उसे आरोप पत्र कब दिया गया था, जुर्माना लगाया गया था, क्या उसने कहीं भी जुर्माने के खिलाफ अपील दायर की है और यदि अपील की है, तो क्या उसे रहना चाहिए। यह सारी जानकारी आयोग को भेजी जाती है जो फिर बैठक की तारीख तय करती है और फिर निर्णय लिया जाता है। वरिष्ठता एवं अभिलेख के अनुसार प्रथम तीन नामों का चयन कर राज्य को भेजा जाता है।












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