Cough Syrup Case: UP STF की कार्रवाई, कफ सिरप के मास्टरमाइंड का करीबी गिरफ्तार, 30 जिलों में फैला सिंडिकेट
Cough Syrup Case: उत्तर प्रदेश में कोडीन आधारित कफ सिरप की बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी के खुलासे के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गुरुवार को इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के बेहद करीबी सहयोगी अमित कुमार सिंह उर्फ टाटा को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (UPFSDA) की जांच अब प्रदेश के 30 से अधिक जिलों तक पहुंच चुकी है।UPFSDA की इस विशेष जांच अभियान में अब तक 90 से ज्यादा FIRs फार्मास्यूटिकल कंपनियों, संदिग्ध स्टॉकिस्टों, आपूर्तिकर्ताओं और सिंडिकेट से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज हो चुकी हैं।

वहीं, कई दवा लाइसेंसिंग अधिकारी और ड्रग इंस्पेक्टर भी जांच के दायरे में आ गए हैं, जिन पर लाइसेंस जारी करने व रद्द करने में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
STF की बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड तक पहुँचने की कोशिशें तेज
मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। उसके नजदीकी सहयोगी अमित सिंह टाटा की गिरफ्तारी को एसटीएफ बड़ी उपलब्धि मान रही है। अमित टाटा पर अवैध खरीद, स्टॉक ट्रांसफर और सप्लाई चैन में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है।
UP STF arrested Amit Singh Tata, a close associate of Shubham Jaiswal, the mastermind in the cough syrup case. pic.twitter.com/awodgtaDK1
— ANI (@ANI) November 28, 2025
30 जिलों में फैला तस्करी का जाल
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में UPFSDA कमिश्नर रोशन जैकब ने बताया कि इस बड़े रैकेट की जांच 12 नवंबर को वाराणसी से शुरू हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे फाइलें खंगाली गईं, पता चला कि कोडीन सिरप की खरीद और सप्लाई में राज्यभर में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ फैली हुई थीं।
उन्होंने कहा-जांच अब 30 से अधिक जिलों में फैल चुकी है। बड़े स्तर पर कोडीन सिरप की खरीद-फरोख्त में भारी गड़बड़ी मिली है। अब तक 90 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं और आगे भी कई बड़ी कार्रवाइयाँ होंगी। कई ड्रग इंस्पेक्टर और लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि कई लाइसेंस बिना जांच जारी किए गए, जबकि कुछ को नियमों के खिलाफ रद्द भी किया गया। प्रशासन अब उनकी भूमिका की गहराई से जांच कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
कोडीन आधारित कफ सिरप का अवैध व्यापार उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैला हुआ था। यह सिरप नशे के तौर पर बड़े पैमाने पर बेचा जा रहा था। सिंडिकेट पर आरोप है कि दवा की बड़ी खेपें कागजों पर दिखाकर दूसरी जगह भेज दी जाती थीं।
स्टॉक फर्जी नामों से उठाया जाता था और कोडीन सिरप को बिहार-बंगाल-झारखंड तक सप्लाई किया जाता था। कई फार्मा कंपनियों और मेडिकल स्टोर्स को इसमें शामिल पाया गया है। UPFSDA और STF दोनों ही समानांतर रूप से जांच कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारी और लाइसेंस रद्द करना संभव हैं।












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