मथुरा के बरसाना में बनेगा UP का सबसे बड़ा बायोगैस प्लांट, जानिए क्या होगी इसकी खासियत
लखनऊ, 24 अगस्त : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार यूपी की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की कवायद में जुटी हुई है। इसको लेकर पिछले दिनों ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया था जिसके बाद सरकार ने कहा था कि यूपी में भारी मात्रा में निवेश आने की उम्मीद है। इसी तर्ज पर अब सरकार मथुरा के बरसाना में यूपी का पहला बायोगैस प्लांट बनाने की प्लानिंग में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि इस बायोगैस प्लांट के बन जाने के बाद यूपी इस मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर तो होगा ही इससे स्थानीय लोगों को काफी संख्या में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

अधिकारियों की माने तो उत्तर प्रदेश में बनने वाला बायोगैस संयंत्र 600 टन प्रतिदिन की फीडस्टॉक की क्षमता वाला होगा। यह यूपी के मथुरा जिले के बरसाना में बनाया जाएगा। एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि बरसाना स्थित गौशाला 'श्री माताजी गौशाला' के सहयोग से स्थापित होने वाले इस संयंत्र के संचालन के बाद यूपी देश में जैव ऊर्जा के लिए प्रमुख निर्यातकों में से एक बन जाएगा।
बायोगैस संयंत्र के मामले में यूपी चौथे स्थान पर
अधिकारी ने बताया कि यूपी बायोगैस संयंत्रों की संख्या के आधार पर देश में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि बायोएनेर्जी का उत्पादन बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी राज्य में बायोटेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री की मंशा को ध्यान में रखते हुए ही मथुरा में बायोगैस प्लांट को लेकर सरकार अपनी तैयारी में जुट गई है। जल्द ही इसको लेकर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
अडाणी टोटल गैस बनाएगी यह बायोगैस प्लांट
अधिकारियों की माने तो अदाणी टोटल गैस ने इस परियोजना के लिए श्री माताजी गौशाला के साथ जनकल्याणकारी साझेदारी की है। इसके तहत गोशाला से किराये पर ली गई जमीन सहित मवेशियों के गोबर का बाजार मूल्य और गोबर की पूरी मात्रा की खरीद का आश्वासन दिया गया है। साथ ही आय का 10 प्रतिशत गौशाला को समर्पित करने का भी प्रावधान किया गया है।
तीन चरणों में होगा संयंत्र का निर्माण
संयंत्र का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा। इस संयत्र में प्रतिदिन 600 टन उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में प्रक्षेपण के पहले 11 महीनों के दौरान 225 टन प्रतिदिन का लक्ष्य रखा गया है। प्रतिदिन 10 टन सीबीजी (संपीड़ित बायो-गैस), 92 टन प्रतिदिन जैविक खाद का लक्ष्य है। जैविक खाद का उपयोग किसान अपनी फसलों में कर सकेंगे।
प्रतिदिन 600 टन गेस के उत्पादन की होगी क्षमता
इसी तरह दूसरे चरण में 10 महीने की अवधि में 325 टन प्रतिदिन का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इसमें 24 टन प्रतिदिन सीबीजी, 151 टन प्रतिदिन जैविक खाद तथा 150 टन प्रतिदिन धान की भूसी का लक्ष्य रखा गया है। तीसरे चरण में प्रतिदिन 600 टन की क्षमता पूरी की जाएगी।












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