UP politics: अरुण राजभर के बयान से सियासत गर्म, 'पुलिस की आंख निकालने' की धमकी पर भड़के परिवहन मंत्री
UP politics: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस पर विवादित बयान देने को लेकर सुभासपा नेता और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने पुलिस को सीधी धमकी देते हुए कहा कि अगर उनके समर्थकों पर अन्याय हुआ तो वे पुलिस की आंखें निकाल लेंगे।
इस बयान के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया है। अरुण राजभर के बयान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार केपरिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश की पुलिस अब पहले जैसी नहीं रही, यह योगी जी की पुलिस है।

आगे उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई पुलिस का कॉलर पकड़ेगा तो उसका कलेजा निकाल लिया जाएगा। पहले अरुण राजभर द्वारा पुलिस को लेकर बयान दिये जाने और उस पर मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा पलटवार किए जाने के चलते राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है।
ये है पूरा मामला?
5 मार्च को बलिया जिले के बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में सुभासपा के नेता उमापति राजभर की पुलिस के साथ झड़प हो गई थी। आरोप है कि पुलिस ने उमापति राजभर की पिटाई कर दी। इस घटना से गुस्साए अरुण राजभर ने बयान देते हुए कहा कि जो लोग पीला गमछा देखकर नाराज होते हैं और जिनकी आंखें ठीक से काम नहीं कर रही हैं, उनकी आंखें अब सुभासपा कार्यकर्ता निकाल देंगे।
इस बयान के बाद मामला तूल पकड़ने लगा। योगी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने इसे पुलिस का अपमान बताया और कहा कि अब उत्तर प्रदेश में पुलिस की आंखें निकालने वाले नहीं बचेंगे। इसके बाद कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर को भी सफाई देनी पड़ी। उन्होंने अपने बेटे के बयान को गलत बताया और माफी मांगते हुए कहा कि अरुण को इस तरह की भाषा नहीं बोलनी चाहिए थी।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बांसडीह कोतवाली में तैनात एक उपनिरीक्षक और एक सिपाही को निलंबित कर दिया। हालांकि, एसडीएम के स्टेनो के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे विवाद और बढ़ गया। इसी बीच, स्टेनो की तहरीर पर सुभासपा नेता उमापति राजभर पर भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
अरुण राजभर ने चेतावनी दी थी कि अगर दोषी पुलिसकर्मियों और एसडीएम के स्टेनो के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो 7 मार्च को थाने का घेराव किया जाएगा। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिससे मामला थोड़ा शांत हुआ और धरना स्थगित कर दिया गया। लेकिन राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर अभी भी चर्चाएं जारी हैं।












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