यूपी पंचायत चुनाव 2021 आरक्षण सूची : जानिए कितने बदलाव की है उम्मीद
लखनऊ: यूपी में जिला पंचायत अध्यक्षों की आरक्षण लिस्ट जारी कर दी गई है। आने वाले 26-27 मार्च तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सभी पदों के लिए सीटों की फाइनल लिस्ट जारी कर दिए जाने की संभावना है। अभी सबसे पहले ब्लॉक प्रमुखों और ग्राम प्रधानों की सीटों की आरक्षण लिस्ट जारी होनी है। राज्य सरकार के नए शासनाध्यकों के मुताबिक 75 जिला पंचायत अध्यक्षों, 826 ब्लॉक प्रमुखों और 58,194 ग्राम प्रधानों के पदों के लिए आरक्षण की व्यवस्था तय की जा रही है, जो इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले के अनुसार साल 2015 को आधार वर्ष मानकर तय किया जाना है। संभावना है कि अगले महीने के पहले हफ्ते में राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनावों की तारीखों की घोषणा कर सकता है।

नए सिरे से आरक्षण हो रहा है तय
उत्तर प्रदेश सरकार के नए आदेश के मुताबिक अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण का आधार संबंधित वर्गों की जनसंख्या के अनुपात में तय किया जा रहा है। इसके मुताबिक ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत के अध्यक्षों की सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के लिए पदों का आरक्षण क्षेत्र में उनकी आबादी के अनुपात में तय होगी। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजातियों के लिए 22.5 फीसदी सीटें आरक्षित की जानी हैं। ये सारी आरक्षण प्रक्रिया और उसमें आपत्तियों के आधार पर संशोधन का भी काम जिलाधिकारियों की निगरानी में होगा और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की आखिरी लिस्ट 26-27 मार्च तक जारी की होगी। इस व्यवस्था के तहत सबसे पहले जिला पंचायत अध्यक्षों की सीटों के लिए लिस्ट जारी की गई है। पूरी आरक्षण सूची जारी होने और उसमें आवश्यक संशोधनों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की घोषणा कर सकता है। वैसे उम्मीद है कि ऐसा होली के बाद अगले महीने के पहले हफ्ते में किसी भी समय हो सकता है।
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पहले भी हुए हैं बदलाव
पहले 2 मार्च को त्रिस्तरीय पंचाय चुनाव के लिए जो तात्कालिक सूची जारी की गई थी, उसमें आरक्षण के लिए 1995 को आधार वर्ष माना गया था। लेकिन, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को साल 2009 को आधार वर्ष मानने के लिए कहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने उसी आधार पर सूची बदलने का फैसला किया है। जानकार मान रहे हैं कि फाइनल लिस्ट आते-आते पूरी आरक्षण लिस्ट में आधे से ज्यादा यानी 50 से 60 फीसदी तक बदलाव हो जाने की संभावना है। बता दें कि पिछले कई चुनावों में आरक्षण के लिए 1999 के नियमों का पालन किया गया था, जिसके मुताबिक सीटों के आरक्षण का आधार वर्ष 1995 होता था। लेकिन, बाद में जिला,ब्लॉक और ग्राम पंचायतों की सीमाओं में परिवर्तन की वजह से 2015 को आधार वर्ष माना गया। इसीलिए यह मामला अदालत में पहुंचा था।

किसकी दावेदारी होगी मजबूत
इसबार रोटेशनल सिस्टम के तहत पहले आरक्षित रही सीटों में बदलाव किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक क्षेत्र पंचायतों में साल 2015 में जो सीटें महिला श्रेणी के लिए रिजर्व नहीं थीं, उन्हें सबसे पहले महिलाओं के लिए आवंटित किया जाएगा। ग्राम प्रधानों के पद पर आरक्षण के लिए भी नया फॉर्मूला निकालने के लिए गुरुवार को पूरे दिन जिला और ब्लॉक के दफ्तरों में काफी माथापच्ची की गई है। जानकारी के मुताबिक 2015 के आधार पर ही रोटेशनल बेसिस पर बदलाव होगा, जिसकी वजह से संभावना है कि ग्राम प्रधान के पदों पर लगभग आधी से ज्यादा सीटों पर आरक्षण बदल जाएगा। यानी जो सीट पहले जिस श्रेणी के लिए थी, उसकी जगह घटते क्रम में नई श्रेणी को मौका मिल जाएगा। ब्लॉक प्रमुखों के पदों पर भी यही व्यवस्था को अपना जा सकता है, जिससे कई सीटों पर आरक्षण में बदलाव नजर आएगा, जैसा कि जिला पंचायत अध्यक्षों की लिस्ट में देखने को मिला है। इस प्रक्रिया को ऐसे समझा जा सकता कि यदि किसी ब्लॉक में 40 गांव हैं, जिनमें से एससी के लिए 10 गांवों का कोटा है। अब आरक्षण करने से पहले उन 10 गांवों को अलग किया जाएगा। इसके बाद बाकी 30 गांवों में उनकी आबादी देखी जाएगी। अब उनकी सर्वाधिक आबादी वाले गांवों में ऊपर से 10 सीटें इस वर्ग के लिए रिजर्व हो जाएंगी। यही प्रक्रिया सभी आरक्षित वर्गों के लिए अपनाई जाएगी।

जानिए किस जिले में किसके लिए आरक्षित हुई कुर्सी
सबसे पहले जिला पंचायत अध्यक्षों की जो लिस्ट जारी की गई है, उसके अनुसार अमेठी, मऊ, कन्नौज, कासगंज, मैनपुरी,फिरोजाबाद, सोनभद्र और हमीरपुर की सीट इसबार अनरिजर्व हो गई है। पिछली लिस्ट में ये सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। लेकिन, सिद्धार्थनगर, आगरा, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बलरामपुर और अलीगढ़ की जिला पंचायत अध्यक्षों की जो सीट पहले अनारक्षित थीं, वह अब महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। नई लिस्ट में वाराणसी, संभल, बदायूं, कुशीनगर, बरेली, एटा और हापुड़ ओबीसी(महिला) के लिए रिजर्व रहेंगी। जबकि मुजफ्फरनगर, आजमगढ़, बलिया, संत कबीर नगर, चंदौली,सहारनपुर, ललितपुर, अंबेडकरनगर, फर्रुखाबाद, इटावा, बांदा, पीलीभीत और बस्ती ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहेंगी। वहीं कानपुर नगर, ओरैया, महोबा, चित्रकूट, जालौन, झांसी, बाराबंकी,लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर और रायबरेली सीट अनुसूचित जातियों के लिए रिजर्व रहेंगी। लेकिन, गौतम बुद्ध नगर, हमीरपुर, गोंडा, प्रयागराज, बिजनौर, उन्नाव, मेरठ, रामपुर, फतेहपुर, अयोध्या, मथुरा, देवरिया, महाराजगंज, गोरखपुर, अमेठी, श्रावस्ती, कानपुर देहात, अमरोहा, हाथरस, भदोही, गाजियाबाद कन्नौज, फिरोजाबाद, कासगंज, मऊ, सोनभद्र, अमरोहा और गोंडा अनारक्षित रहेंगे।












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