UP Nikay Chunav 2023: छिटके हुए कैडर को वापस लाने की क़वायद में BSP, ग्रामीण से शहरी बने इलाक़ों पर फ़ोकस

UP Nikay Chunav के तारीखों का ऐलान हो गया है। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी जहां पूरे प्रदेश में जनसंवाद करेगी वहीं बीएसपी ग्रामीण से शहरी बने नए इलाकों पर फोकस करेगी।

मायावती

UP Nikay Chunav: उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। इस चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारयों में जुटे हैं। भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) जहां इसको लेकर पूरे प्रदेश में मतदाता सम्मेलनों के जरिए लोगों से संवाद करेगी वहीं बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) भी अपनी तैयारयों को अमली जामा पहनाने में जुटी हुई है। बीएसपी के सूत्रों की माने तो संगठन ने तय किया है कि पार्टी से छिटके मतदाताओं को वापस लाने पर वह फोकस करेगी। इसके लिए इस बार ग्रामीण इलाकों से शहरी इलाके में शामिल हुए मतदाताओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। छोटी-छोटी बैठकों के जरिए पार्टी इनसे संवाद करने का प्रयास करेगी।

नए शहरी इलाकों की पिच पर BSP का फोकस

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को लेकर बीएसपी शहरी इलाकों की बजाए ग्रामीण इलाकों से शहरी इलाकों में शामिल हुए इलाकों पर बीएसपी का फोकस होगा। बीएसपी के एक नेता ने बताया कि पार्टी का मानना है कि शहरी इलाकों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में पार्टी ज्यादा मजबूत रही है। इसलिए ऐसे जगहें जो ग्रामीण से शहरी इलाकों में तब्दील हुए हैं उनपर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। शहरों की अपेक्षा इन इलाकों में छोटी-छोटी बैठकें, जनसभाएं और रोड शो आयोजित किए जाएंगे। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी मतदाताओं को बूथ तक लाने का टारगेट दिया जा रहा है।

छिटके कैडर से सम्पर्क साधने का प्रयास

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि जिस तरह से पिछले कुछ चुनावों के दौरान बसपा के कैडर में बिखराव आया है उससे पार्टी चिंतित है। पार्टी अब बसपा के पुरान कैडर रहे स्थानीय लोगों से भी सम्पर्क साधेगी जो किसी कारणवश पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। ऐसे लोगों को पार्टी से फिर से कनेक्ट करने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी को लगता है कि ऐसे लोगों के बीच एक अभियान चलाकर उन्हें दोबारा वापस लाया जा सकता है। इसको लेकर पार्टी जल्द ही अपने स्तर पर अभियान शुरू कर उनसे जाकर घर घर सम्पर्क करेगी।

टिकट के दावेदारों की संख्या की वजह से बदली रणनीति

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार 96 लाख वोटर बढ़ गए हैं जो निकाय चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। इनमें एक बड़ी संख्या ऐसे वोटरों की है जो पहले ग्रामीण थे अब शहरी इलाकों में आ गए हैं। पिछले पांच साल में 109 नए नगर निकाय बने हैं। इसके अलावा 85 नगर निकायों का सीमा विस्तार भी हुआ है। ऐसे में बहुत सारे ग्रामीण इलाके शहरी इलाकों में शामिल हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो इस बदलाव के बाद नए वोटर अपने अपने इलाकों में परिणाम को बदल सकते हैं। यही कारण है कि बसपा अब इनपर फोकस कर रही है।

2024 के लिए जमीन मजबूत करने की कवायद

दरअसल, निकाय चुनाव को जहां बीजेपी 2024 का सेमीफाइनल मानकर चल रही है वहीं बसपा के रणनीतिकार भी इस बात को बखूबी समझ रहे हैं कि निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन यदि पार्टी ने किया तो इससे 2024 की जमीन मजबूत होगी। इसलिए इस बार निकाय चुनाव में पार्टी किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इसीलिए जब निकाय चुनाव कुछ दिन के लिए टल गए थे तब बसपा की तरफ से गांव चलो अभियान चलाया गया। बसपा के नेताओं का दावा है कि इस अभियान से पार्टी को काफी मजबूती मिली है। ऐसे में यदि नगर निकाय चुनाव में पार्टी को ग्रामीण से शहरी हुए निकायों में बढ़त मिलती है तो यह अगले लोकसभा के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

यूपी में दो चरणों में होगी वोटिंग

यूपी निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान रविवार को हो चुका है। निकाय चुनाव दो चरणों में संपन्न कराए जाएंगे। पहले चरण की वोटिंग चार मई को और दूसरे चरण की 11 मई को मतदान होगा। पहले चरण में इन जिलों में वोटिंग होगी।

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