UP SC-ST Ayog: यूपी में एससी-एसटी आयोग का गठन, जानिए कौन हैं बैजनाथ रावत? जिनको बनाया अध्यक्ष
Uttar Pradesh News: योगी सरकार ने पूर्व विधायक बैजनाथ रावत को उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके साथ ही पूर्व विधायक बेचन राम और सोनभद्र के जीत सिंह खरवार आयोग के उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इन नेताओं के अलावा आयोग के लिए16 सदस्य भी नामित किए गए हैं।
इन सदस्यों में मेरठ के हरेंद्र जाटव, नरेंद्र सिंह खजूरी, सहारनपुर के महिपाल वाल्मीकि, बरेली के संजय सिंह और उमेश कठेरिया, आगरा के दिनेश भारत, हमीरपुर के शिव नारायण सोनकर, औरेया की नीरज गौतम, लखनऊ के रमेश कुमार तूफानी, आजमगढ़ के तीजाराम, मऊ के विनय राम, गोंडा की अनिता गौतम, कानपुर के रमेश चंद्र, भदोही के मिठाई लाल, कौशाम्बी के जितेंद्र कुमार, अंबेडकर नगर की अनिता कमल का नाम शामिल हैं।

जानिए कौन हैं बैजनाथ रावत, क्यों है UP की राजनीति में खास चेहरा
बैजनाथ रावत का सियासत से पुराना नाता है। उन्होंने विधायक से लेकर सांसद तक होने का सफर किया है। वह बाराबंकी के हैदरगढ़ के निकट मौजूद एक गांव के रहने वाले हैं।
रावत को वर्ष पूर्व 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने हैदरगढ़ सीट से टिकट दिया था, जिसके बाद रावत ने चुनाव में भारी मतों के साथ विजय हासिल की थी और समाजवादी पार्टी के दो बार के विधायक राम मगन को करीब 33 हजार वोटों से परास्त किया था।
बैजनाथ रावत तीन दफा विधायक रह चुके हैं। वह एक बार वर्ष 1998 में बाराबंकी से सांसद भी चुने गए थे। साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. हालांकि, बैजनाथ रावत के राजनीतिक यात्रा में मोड़ तक आया, जब वर्ष 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव में उनका टिकट काटा गया था, जिससे रावत पार्टी से बेहद नाराज भी हुए थे।
उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से नाराजगी जताते हुए यहां तक कह दिया था कि क्या उनका नाता दलित समाज से है, इसी कारण से उनका टिकट काटा गया। तब भाजपा ने बैजनाथ रावत की जगह हैदरगढ़ से दिनेश रावत को टिकट दिया था।
बैजनाथ रावत एक बड़े दलित नेता हैं। वह राजनीति में इतना लंबा वक्त गुजारने के बाद भी सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं, स्वयं खेती करते हैं और जानवरों को चारा डालते हैं। बहरहाल अब आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ही बैजनाथ रावत के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी आ चुकी है।
ज्ञात हो कि लगभग दो साल बाद आयोग के यह पद भरे गए हैं। अगस्त में ही इन पदों पर तैनाती दे दी गई थी,किंतु कई सदस्यों की आयु 65 वर्ष से अधिक होने पर अधिसूचना जारी नहीं हो सकी थी।
उत्तर प्रदेश सरकार अधिकतम उम्र की बाध्यता समाप्त करने के लिए अध्यादेश लाई। उसके बाद पूर्व वाली सूची को ही जारी कर दिया गया। इसमें केवल अजय कोरी का नाम नहीं है, क्योंकि चयन प्रक्रिया के मध्य में ही उनका निधन हो गया था।
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