Millets Meals: श्रीअन्न (मोटा अनाज) को प्रमोट करने के लिए यूपी सरकार घटाएगी चावल का उत्पादन, जानिए कैसे
उत्तर प्रदेश सरकार अब मिलेटस को प्रमोट करने के लिए नया तरीका अपनाएगी। अधिकारियों की माने तो मोटे अनाज के उत्पादन के लिए चावल के उत्पादन का रकबा घटाकर उसपर मोटे अनाज की खेती के लिए अभियान चलाया जाएगा।

Millets Meals:: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोटे अनाज या यूं कहें कि श्रीअन्न को प्रमोट करने में जुटे हुए हैं। पीएम मोदी की मंशा को भांपते हुए अब यूपी की योगी सरकार मोटे अनाज को प्रमोट करने के लिए नया तरीका खोजा है। कृषि अधिकारियों की माने तो यूपी में धान के रकबे को थोड़ा कम कर इसमें मोटे अनाज के उत्पादन के लिए यूपी के किसानों के बीच सरकार की ओर से एक अभियान चलाया जाएगा। सूत्रों की माने तो यूपी में सरकार धान की खेती का रकबा कम कर इसको प्रमोट करेगी।
धान की खेती का रकबा घटाकर मोटा अनाज पैदा करने की रणनीति
कृषि विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि योगी सरकार आने वाले वर्षों में धान (चावल) की खेती के तहत लगभग 17% क्षेत्र को बाजरा और तिलहन के साथ बदलने की योजना बना रही है। यूपी देश में चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (15 मिलियन मीट्रिक टन) है और 70 जिलों में धान की खेती के तहत 60 लाख हेक्टेयर भूमि है।
किसानों के बीच चलाया जाएगा व्यापक अभियान
सरकार ने बाजरा और तिलहन के लिए क्षेत्र को पुनः आवंटित करते हुए इसे घटाकर 50 लाख हेक्टेयर करने की योजना बनाई है, यह एक ऐसा कदम है जो विशेष रूप से खरीफ मौसम के दौरान फसल पैटर्न में आमूल-चूल परिवर्तन को चिह्नित कर सकता है। अधिकारियों ने कहा कि बदलाव किसानों के बीच ठोस और व्यापक अभियान के जरिए लाया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि सरकार चावल की "विदेशी" किस्मों को बढ़ावा देने की भी योजना बना रही है, जिससे अधिक रिटर्न मिल सकता है।

इन जिलों में होता है चावल का उत्पादन
आंकड़े बताते हैं कि केवल सात जिलों (बिजनौर, कुशीनगर, पीलीभीत, चंदौली, बागपत, वाराणसी और अंबेडकरनगर में उच्च उत्पादन 2500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से अधिक है। कुल 55 जिलों में 2000-2500 किग्रा प्रति हेक्टेयर या मध्यम-निम्न उत्पादकता 1500-2000 किग्रा प्रति हेक्टेयर है। पांच और तीन जिलों में क्रमशः कम और बहुत कम उत्पादकता है। कम बारिश के चलते चावल के उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा रही है।
यूपी मोटे अनाज का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक
पिछले साल, चावल का उत्पादन राष्ट्रीय स्तर पर 2021 के 111 मिलियन मीट्रिक टन से घटकर 2022 में लगभग 105 मिलियन मीट्रिक टन हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना मोटे अनाज को बढ़ावा देने के यूपी सरकार के ठोस प्रयासों के अनुरूप है, जिस पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का ध्यान केंद्रित रहा है। वर्ष 2023 को बाजरा के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। बाजरा के तहत 11 लाख हेक्टेयर भूमि के साथ यूपी मोटे अनाज का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भी है।

मोदी ने मोटे अनाज को कहा था श्रीअन्न
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र ने साल 2023 को 'इंटरनेशनल मिलेट ईयर' घोषित किया है। इस साल के बजट में भारत में मोटे अनाज को 'श्री अन्न' कहकर संबोधित किया गया है। ग्लोबल मिलेट कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मौजूदा समय में देश की खाद्य टोकरी में देसी अनाज की हिस्सेदारी सिर्फ 5 या 6 प्रतिशत है। लेकिन, मिलेट मिशन की वजह से देश के 2.5 करोड़ लघु और सीमांत किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इस मिशन की वजह से इसका उत्पादन बढ़ेगा।












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