Loksabha Election 2024: BSP के वोट बैंक पर RSS की नजर, दलितों को साधने का ये है मास्टर प्लान
Mayawati Vote Bank in UP: लोकसभा चुनाव को देखते हुए अब सभी दलों ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। वहीं यूपी की सत्तारुढ़ बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने दलित बस्तियों में अपनी शाखाएं लगाने की कवायद शुरू करेगी। सूत्रों की माने तो दलित मतदाताओं से कनेक्ट होने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
बसपा के वोट बैँक पर नजर
आरएसएस की रणनीति में अपनी विचारधारा को फैलाने और बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के कोर वोट बैंक से जुड़ने के लिए मुख्य रूप से दलितों के निवास वाले क्षेत्रों में 'शाखा' स्थापित करना शामिल है।

जातियों को केंद में रखकर हर दल चला रहे अभियान
दरअसल, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस (Congress) , बहुजन समाज पार्टी (BSP) , समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) जैसे राजनीतिक दल अपने राजनीतिक अभियान को मजबूत करने के लिए जातियों को केंद्र में रखकर ही अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। आरएसएस ने आगामी चुनाव को देखते हुए हर न्याय पंचायत तक पहुंचने की नई योजना बनाई है।
प्रत्येक न्याय पंचायत पर लगेंगी शाखाएं
सूत्रों की माने तो संगठन का लक्ष्य प्रत्येक न्याय पंचायत में शाखाएं स्थापित करना है। जिन क्षेत्रों में शाखाएं स्थापित करना संभव नहीं है, वहां आरएसएस के पदाधिकारी आरएसएस की विचारधारा को स्थानीय समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
आरएसएस की विचारधारा से जोड़ने का प्रयास
आरएसएस ने अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से दलित और आदिवासी क्षेत्रों में घुसने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। रणनीति पूरी तरह जनता के बीच आरएसएस की विचारधारा को प्रसारित करने के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है।
2500 स्वयंसेवकों को उतारने की तैयारी
सूत्रों की माने तो अगले सप्ताह के भीतर 2,500 से अधिक स्वयंसेवकों को व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जाएगा। ये स्वयं सेवक बाल्मीकि, थारू, कोल, मुसहर और जाटव समुदायों पर फोकस करेंगे।
चारों क्षेत्रों में चलाया जाएगा कार्यक्रम
इन स्वयंसेवकों को अवध, कानपुर, काशी और गोरखपुर क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। ये स्वयंसेवक तराई क्षेत्रों और राज्य भर के विभिन्न स्थानों में लोगों के साथ जुड़ेंगे, उन्हें आरएसएस की विचारधारा के बारे में शिक्षित करेंगे।
दलितों को जोड़ने की कोशिश
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि चुनाव से ठीक पहले ये कदम निचले समुदाय को बीजेपी के साथ जोड़ने की कवायद ही है। इसे दीर्घकालिक रणनीति के तहत अमल में लाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक कुमार पंकज कहते हैं कि,
आरएसएस की रणनीति बसपा के वोट बैंक में घुसने का एक प्रयास है। पिछले चुनावों में मायावती के मुख्य वोट बैंक के महत्वपूण अंग जाटव समुदाय को जीतने में भाजपा की सफलता मिली थी। आरएसएस की इस रणनीति से बसपा की चुनावी संभावनाओं को झटका लगेगा और इसका असर भी पड़ेगा। अगर बीजेपी आरएसएस के जरिए इस समुदाय के भीतर जमीन हासिल करती है तो बसपा के लिए अपने वोट बैंक पर पकड़ बनाए रखने की चुनौतियां और बढ़ जाएंगी।
विरोधियों का जवाब देने के लिए बसपा तैयार
हालांकि आरएसएस के इस प्रयास को लेकर बसपा का दावा है कि वह भाजपा की राजनीतिक साजिश से पूरी तरह वाकिफ है। बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मायावती ने विरोधियों को जवाब देने के लिए दलितों और मुसलमानों से जुड़ने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। हाल ही में, मायावती ने देश के कुछ हिस्सों में मंदिरों और धार्मिक स्थलों को गिराने के लिए भाजपा सरकारों की आलोचना की।












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