'उनके अंतिम शब्द आज जी मन में तीर की..',कुवैत हादसे में मरने वाले अंगद की पत्नी ने बताई अनसुनी बातें

Kuwait Fire News Gorakhpur Uttar Pradesh: दक्षिणी कुवैत के मंगाफ में बहुमंजिला इमारत में आग लगने से बुधवार को 49 लोगों की मौत हो गयी थी। इन्ही मरने वालों में एक थे गोरखपुर के जटेपुर उत्तरी के रहने वाले अंगद गुप्ता। जो पिछले आठ वर्षों से वहां रह रहे थे। वन इंडिया हिंदी के रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने उनकी पत्नी रीता देवी से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पति अंगद गुप्ता से संबंधित कई बातें बताई।

यह हुई थी आखिरी बात
अंगद गुप्ता की पत्नी रीता देवी ने कहा कि मंगलवार को उनसे आखिरी बार बात हुई थी। घर पर निर्माण कार्य चल रहा है। इसी के बारे में वह पूछ रहे थे। कितना काम हुआ कब तक होगा? बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है। यही सब बाते हुई थी।

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बच्चाें के भविष्य के लिए गए थे कुवैत
रीता देवी ने कहा कि उनका एक ही सपना था कि बच्चों को खुब पढ़ाए। उनकों सरकारी नौकरी मिले। उन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। इनके भविष्य के लिए ही वह कुवैत गए थे।

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    एक साल बाद आने को कहा था
    उन्होंने कहा कि पति को नई नौकरी इस जगह मिली थी। अभी कुछ दिन ही हुए थे इस कंपनी में। उन्हाेंने कहा था कि एक साल का एग्रीमेंट हैं इसके बाद ही आऊंगा।

    चौबीस घंटे में कभी भी बात कर लेते थे
    उनका मोबाइल हर समय ऑन रहता था। मैं किसी समय बात कर लेती थी। वह कहते थे कि मैं काम कर के थक जाता हूं। जब फ्री रहूंगा तो काल करुंगा। ड्यूटी पर जाने से पहले बात करते थे।

    उस दिन नहीं हो पाई बात
    रीता देवी ने बताया कि बुधवार को मैं मकान बनाने के लिए मिस्त्री खोज रही थी। घर के काम में व्यस्त होने के कारण उस दिन बात नहीं हो पायी थी।

    बात नहीं हुई तो मैं परेशान हो गयी
    टीवी पर समाचार देखने के बाद मैं परेशान हो गयी। मोबाइल मिलाना शुरु किया। नहीं मिला। इसके बाद चैनल पर हेल्पलाइन नंबर के जरिए मैंने बात की। उन्होंने कहा घर के किसी बड़े सदस्य से बात कराइए। तो मैंने अपने भाई का नंबर दिया। उससे जानकारी हुई कि वह इस हादसे में मारे गए हैं।

    सरकार से की अपील
    रीता देवी ने कहा कि मेरा तो सब कुछ खत्म हो गया। कैसे बच्चों की परवरिश करुंगी। तीन बच्चों को पढ़ना लिखाना कैसे कर पाऊंगी। मैं सरकार से बच्चों को नौकरी व आर्थिक सहायता की मांग करती हूं।

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