तीन तलाक को लेकर अब यूपी के मदरसों में शुरू होगी अहम मुहिम

उत्तर प्रदेश के मदरसों में सिखाया जाएगा कि कैसे वाजिब तरीके से दें तलाक, तमाम मौलवी लेंगे इस मुहिम में भाग

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से इंस्टैंट तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए इस मसले पर केंद्र सरकार से छह महीने के भीतर कानून बनाने को कहा है उसके बाद खुद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस समस्या से निपटने का फैसला लिया है। अब उत्तर प्रदेश के मदरसों में तीन तलाक देने का सही तरीका सिखाया जाएगा। मदरसों में मुसलमानों को वाजिब तरीके से तलाक सिखाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए मुसलमानों के संगठन जमात रजा ए मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हमने मदरसों से जुड़े मौलानाओं के साथ एक बैठक कर रहे हैं, जिसमें यह बताया जाएगा कि कैसे वाजिब तरीके से तलाक दिया जाए।

तमाम जलसों में दी जाएगी सही जानकारी

तमाम जलसों में दी जाएगी सही जानकारी

मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया कि मौलानाओं के साथ बैठक करके, जुम्मे की नमाज के दौरान युवाओं को सिखाया जाएगा कि कैसे वाजिब तरीके से तलाक दिया जाए। ना सिर्फ जुम्मे की नमाज बल्कि अन्य जलसों में भी लोगों को वाजिब तरीके से तलाक देना सिखाया जाएगा। तमाम मौलानाओं से अपील की गई है कि वह तमाम कार्यक्रमों के तौरान तलाक के वाजिब तरीके की जानकारी लोगों को दें। मौलाना ने बताया कि शरिया कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जाएगी ताकि एक साथ तीन तलाक बोलकर तलाक देने की प्रथा का अंत हो। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि हमारा संगठन मुस्लिम महिलाओं से भी इस बात की अपील करेगा कि वह अपने निजी मामलों को लेकर कोर्ट या पुलिस के पास नहीं जाएं।

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     सही तरीके से तलाक देना अहम

    सही तरीके से तलाक देना अहम

    आगरा में मदरसा चलाने वाले मुफ्ती मुदस्सर खान ने बताया कि सही तरीके से तलाक देने की जानकारी काफी अहम है और इसका पूरा एक अध्याय है। हम छात्रों से भी इस बाबत अपील करेंगे कि वह इस बारे में लोगों को शिक्षित करें। रिपोर्ट की मानें तो अलीगढ़ में तकरीबन 200 और आगरा में 150 मदरसे हैं जहां लोगों को वाजिब तरीके से तलाक देने की प्रक्रिया को सिखाया जाएगा।

    शरिया की लोगों को सही जानकारी नहीं

    शरिया की लोगों को सही जानकारी नहीं

    टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक अलीगढ़ के अलबरकत इस्लामिक रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के मौलाना नोमान अहमद अजहरी ने इस बात को माना है कि लोगों को शरिया की सही जानकारी नहीं है, जिसकी वजह से लोग गलत तरीकों का पालन करते हैं। अजहरी ने बताया कि उनका खुद का संगठन छात्रों को इस बारे में जानकारी देता है और उन्हें सही तरीके का पालन करने के लिए भी प्रेरित करता है। गौरतलब है कि 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की खंटपीठ ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था इस संविधान पीठ की अध्यक्षा जस्टिस जेएस खेहर ने की थी, पीठ में अलग-अलग धर्मों से जुड़े पांच जज शामिल थे, जिसमे से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था।

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