UP School Heatwave Alert: गर्मी में बच्चों की सुरक्षा का Yogi सरकार का बड़ा प्लान, स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन
UP School Heatwave Alert: भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ते ही उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने 'टीचर्स गाइडलाइन-2026' जारी कर दी है, जिसमें शिक्षकों को हीटवेव से बचाव, लक्षण पहचानने और प्राथमिक उपचार देने की पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी। सरकार का मकसद है कि स्कूल न सिर्फ पढ़ाई का केंद्र बने, बल्कि बच्चों की जान बचाने वाला सुरक्षित ठिकाना भी बने।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (बेसिक और माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर तैयार इस गाइडलाइन में स्कूल स्तर पर 'हीट एक्शन प्लान' बनाने, जागरूकता फैलाने और इमरजेंसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

UP Heatwave Alert: क्यों जारी हुई गाइडलाइन?
उत्तर प्रदेश में अप्रैल से जून तक तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है। लू और हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ जाते हैं। बच्चे इस दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि उनका शरीर जल्दी गर्म हो जाता है और वे खुद लक्षण बताने में सक्षम नहीं होते।
सरकार ने साफ कहा है कि शिक्षक इस लड़ाई की सबसे अहम कड़ी होंगे। सुबह की असेंबली, क्लासरूम, खेलकूद और रोजमर्रा की गतिविधियों के जरिए वे बच्चों को हीटवेव से बचाव के उपाय सिखाएंगे।
गाइडलाइन के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?
1. स्कूल हीट एक्शन प्लान अनिवार्य
हर स्कूल को अपना 'स्कूल हीट एक्शन प्लान' तैयार करना होगा। इसमें हेल्थ नोडल शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम चलाए जाएंगे। स्कूल कैंपस में प्रमुख जगहों पर जागरूकता पोस्टर लगाए जाएंगे, जिनमें 'क्या करें और क्या न करें' साफ-साफ लिखा होगा।
2. स्कूल टाइमिंग और गतिविधियां
- सुबह की असेंबली, खेल, शारीरिक शिक्षा और आउटडोर गतिविधियां 10 बजे से पहले पूरी करनी होंगी।
- ऑरेंज या रेड हीटवेव अलर्ट पर भारी शारीरिक गतिविधियां बंद रहेंगी।
- मिड-डे मील छायादार जगह पर परोसा जाएगा।
3. पानी और हाइड्रेशन पर जोर
स्कूलों में साफ और सुरक्षित पीने का पानी 24 घंटे उपलब्ध रहेगा। बच्चों को हर 20-30 मिनट में पानी पीने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। गाइडलाइन में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फलों को बढ़ावा देने को कहा गया है।
4. इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार
- अच्छी वेंटिलेशन, पंखे और कूलर की व्यवस्था।
- छायादार पेड़, कूल रूफ टेक्नोलॉजी और रिफ्लेक्टिव पेंट का इस्तेमाल।
- हल्के रंग के सूती कपड़े, टोपी या छाते का उपयोग।
5. हीट स्ट्रेस के लक्षण और प्राथमिक उपचार
- गाइडलाइन में विस्तार से लक्षण बताए गए हैं:
- ज्यादा पसीना, तीव्र प्यास, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन।
- उल्टी, उलझन या बेहोशी।
उपचार:
- बच्चे को तुरंत छायादार जगह पर ले जाएं।
- ठंडी पट्टी करें, ORS पिलाएं।
- जरूरत पड़ने पर 108 एम्बुलेंस या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
6. विशेष बच्चों की निगरानी
अस्थमा, दिल की बीमारी, डायबिटीज, मोटापा या विकलांगता वाले बच्चों पर खास नजर रखी जाएगी। हाल ही में बुखार या दस्त से गुजरे बच्चों को अतिरिक्त ध्यान दिया जाएगा।
7. माता-पिता की भूमिका
- माता-पिता को सलाह दी गई है कि वे:
- बच्चे को स्कूल भेजने से पहले पर्याप्त पानी पिलाएं।
- बीमार बच्चे को घर पर रखें।
- घर पर भी हीटवेव से बचाव के उपाय अपनाएं।
जागरूकता अभियान
स्कूलों में 'क्या करें-क्या न करें' वाले पोस्टर लगाए जाएंगे। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अलर्ट पर नजर रखी जाएगी। स्कूलों को हीटवेव से जुड़ी घटनाओं का रिकॉर्ड रखना होगा। नियमित समीक्षा और मॉक ड्रिल आयोजित की जाएंगी।
फर्स्ट एड किट अनिवार्य
हर स्कूल में फर्स्ट एड किट, ORS पाउच, डिजिटल थर्मामीटर और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स (108 एम्बुलेंस सहित) उपलब्ध रहेंगे।
गर्मी में बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव
- डिहाइड्रेशन
- हीट एग्जॉशन
- हीट स्ट्रोक (जो जानलेवा हो सकता है)
- पढ़ाई पर असर, थकान, चिड़चिड़ापन
बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी गर्म होता है और वे पसीने के जरिए ज्यादा पानी खो देते हैं। इसलिए समय पर हस्तक्षेप जरूरी है।
अन्य राज्यों के उदाहरण
दिल्ली, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश जैसी गर्म राज्यों में भी स्कूल हीट एक्शन प्लान लागू किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश की यह पहल पूरे देश के लिए मिसाल बन सकती है।
योगी सरकार की प्राथमिकताएं
योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षा के साथ-साथ छात्र स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है। गाइडलाइन न सिर्फ गर्मी के मौसम के लिए है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली जागरूकता अभियान की शुरुआत है।
उत्तर प्रदेश सरकार की 'टीचर्स गाइडलाइन-2026' एक दूरदर्शी कदम है। यह दिखाता है कि सरकार शिक्षा को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि बच्चों को जीवन बचाने वाले कौशल भी सिखाना चाहती है। अगर हर शिक्षक, प्रधानाचार्य और अभिभावक इस गाइडलाइन को ईमानदारी से लागू करें, तो गर्मी के कहर से सैकड़ों बच्चों की जान बचाई जा सकती है।













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