यूपी में संस्कृत विद्यालयों के बच्चों को हुनरमंद बनाएगी Yogi सरकार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जल्द ही संस्कृत के छात्रों को हुनरमंद बनाने के लिए कर्मकांड का भी बोध कराएगी। इससे छात्रों को रोज़गार के हिसाब से तैयार करने में मदद मिलेगी।

उत्तरी प्रदेश की योगी सरकार ने अब संस्कृत की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी रोज़गारपरक बनाने का फ़ैसला किया है। इसके लिए सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है।

संस्कृत विद्यालयों की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करने की दिशा में एक कदम के रूप में ऑनलाइन आवेदन, अग्रिम पंजीकरण, परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा शुरू की गई है।

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संस्कृत स्कूलों को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों के बारे में बात करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक विषयों, आधुनिक विषयों और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के साथ, संस्कृत शिक्षा के आधुनिकीकरण और प्रसार के लिए वर्ष 2019 से सभी संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में एक नया पाठ्यक्रम लागू किया गया था।

संस्कृत विद्यालयों में एक लाख से अधिक छात्र

राज्य में कुल 1,166 संस्कृत माध्यम विद्यालय संचालित हैं जिनमें 1 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा, "सरकार द्वारा संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इससे इसे काफी बढ़ावा मिला है।"

संस्कृत विद्यालयों के लिए 100 करोड़ की धनराशि स्वीकृत

उन्होंने कहा, "पहले, राज्य में केवल दो सरकारी संस्कृत माध्यम स्कूल थे। लेकिन हमारी सरकार ने 15 नये आवासीय संस्कृत माध्यम विद्यालय स्थापित किये। प्रदेश के 900 सहायताप्राप्त संस्कृत माध्यम विद्यालयों के विकास, विस्तार एवं बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण हेतु पहली बार 100 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है जिसमें 95% धनराशि की व्यवस्था राज्य सरकार एवं 5% धनराशि की व्यवस्था प्रबन्धन द्वारा की जायेगी।"

विद्यालयों में तैनात हैं 500 से ज्यादा शिक्षक

इन अनुदानित विद्यालयों को फर्नीचर आदि की व्यवस्था के लिए पहली बार 5 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी दी गई। सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की समस्या से निपटने के लिए पहली बार पारदर्शी चयन प्रक्रिया बनाई गई है। 518 मानद शिक्षकों को तैनात किया गया है।

अधिकारी ने बताया कि, "संस्कृत विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के लिए 20 जुलाई से 5 दिवसीय सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है, जिसमें वित्त और विद्यालय प्रबंधन के साथ-साथ नवीन शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।"

लंबे समय बाद संस्कृत विद्यालयों पर सरकार का फोकस

17 साल बाद सरकार की ओर से नये संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को मान्यता देना शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यम स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 6-8 के छात्रों के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकों और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की गई है।

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