UP Elections 2022: जमाली के जाने के बाद मायावती की बसपा हो गई खाली, 19 में से बचे हैं केवल इतने विधायक
लखनऊ, 26 नवंबर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2020 के पहले यूपी में दलबदलू राजनीति जोरों पर हैं। चुनावी तैयारियों के बीच नेताओं में भाजपा और सपा ज्वाइन करने की रेस जारी हैं। वहीं यूपी में पांच साल तक कभी सत्ता पर काबिज रही मायावती की बहुजन समाज पार्टी गयाराम की पार्टी बन चुकी है। एक के बाद एक बसपा के पूर्व और वर्तमान विधायक पार्टी छोड़कर सपा और बसपा में शामिल हो रहे हैं। बसपा के इकलौते मुस्लिम चेहरा रहे शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने भी कमाल दिखाते हुए बसपा से इस्तीफा देते हुए को मायावती को बड़ा झटका दिया है।

बसपा के जाने के बाद बसपा हो गई खाली
आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट से विधायक रहे जमाली ने मायावती को पत्र लिखकर इस्तीफा दिया। ये वो ही विधायक है जिन्हें मायावती ने लालजी वर्मा के बसपा छोड़ने के बाद विधानमंडल दल का नेता नियुक्त किया था। विधायकी से भी जमाली ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार जमाली सपा ज्वाइन करने वाले हैं। याद रहें ये ही जमाली थी जिन्होंने आजमगढ़ में सपा संरक्षण मुलायम सिंह के विरोध में चुनाव लड़ा था।
वंदना सिंह ने दो दिन पहले थामा बीजेपी का हाथ
बसपा को छोड़ने वाले जमाली पहले नेता नहीं है जो पार्टी को अलविदा बोल चुके हैं। ठीक दो दिन पहले आजमगढ़ से बसपा विधायक वंदना सिंह ने बागी कांग्रेसी अदिति सिंह के साथ भाजपा ज्वाइन कर ली है। बसपा छोड़ने के पीछे नेतृत्व से संतुष्ट ना होना माना जा रहा है।
19 में महज बचे बसपा के पास 6 विधायक
गुड्डू जमाली और वंदना ही नहीं 2017 में यूपी में बसपा ने 19 सीटों पर चुनाव जीता था बाद में अम्बेडकर नगर सीट पर वह उपचुनाव में हार गई थी। इस तरह उसके पास 18 विधायक बचे। वर्तमान समय में बसपा के 12 विधायक बहन मायावती से दूरी बनाते हुए पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। अब तक 12 विधायक बसपा को अलविदा कर चुके हैं अब केवल छह बचे हैं।
कांग्रेस और बसपा से भी बत्तर हुई कांग्रेस की हालत
आपको जानकर ताज्जुब होगा कि बसपा की हालत विधायकों के मामले में कांग्रेस और अपना दल से भी खराब हो चुकी है। काग्रेस के पांच और अपना दल के पास 9 विधायक हैं वहीं बसपा के पास कहने को छह लेकिन वास्तव में चार ही विधायक बचे हैं, क्योंकि विधायक मुख्तार अंसारी को बसपा ने यूपी 2022 के चुनाव में ना लड़वाने का ऐलान कर दिया और रामवीर उपाध्याय बीजेपी के पाले में ज्यादा नजर आ रहे हैं और सुखदेव राजभर की मौत हो चुकी है। विनय शंकर तिवारी, आजाद अरिमर्दन और श्याम सुंदर शर्मा, उमाशंकर सिंह वो विधायक हैं जो बसपा के पास वास्तव में बचे हैं।
मायावती 9 कद्दावर विधायकों को पार्टी से कर चुकी हैं आउट
बसपा से नेताओं का मोहभंग होने के पीछे पार्टी का भविष्य को लेकर खतरा तो है ही साथ ही बसपा सुप्रीमों मायावती का विधायकों के प्रति तुग्लती रवैया और तब्बजों ना मिलना है। याद रहें मायावती ने 2021 में ही बसपा के दो कद्दावर नेता रामअचल राजभर और और लालजी वर्मा को पार्टी विरोधी काम करने के आरोप मेंनिष्काषित कर दिया था। राजभर जबकि बसपा प्रदेश अध्यक्ष रह चुके थे और लालजी विधानमंडल दल के नेता थे। इसके अलावा इससे पहले 2 विधायक रामवीर उपाध्याय और अनिल सिंह को मायावती ने निकल दिया था। इसके अलावा राज्यसभा चुनाव के समय समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से हाथ मिलाने वाले 7 विधायकों को बसपा से निकाल दिया। 2017 के बाद से पार्टी के चार बार अध्यक्ष बदले गए लेकिन बात नहीं बनी।
जमाली के जाने से बसपा को हुआ ये नुकसान
बता दें गुड्उू जमाली के नाम से फेमस गु्ड्डू जमाली पिछले चुनाव में भारी संख्या में मुस्लिम और दलित वोटों को साधने में सफल हुए थे इसलिए आगामी चुनाव में सपा को जमाली से फायदा होगा। इन सभी कद्दावर नेताओं के पास अब सतीश चंद्र मिश्रा के अलावा कोई ऐसा चेहरा शायद ही बचा है जो आगामी चुनाव प्रचार में लोगों की भीड़ जुटा सकेगा। कहने को तो बसपा छोड़कर कुछ ही संख्या में विधायक गए हैं बाकी सबको तो मायावती ने निष्काषित किया है। Aditi Singh कौन हैं जिनके BJP ज्वाइन करने से राजनीति में मचा भूचाल
यूपी चुनाव में बसपा का क्या होगा हाल
पार्टी की कमान मायावती के हाथ में आने के बाद कांशीराम के साथ काम कर चुके संस्थापक सदस्यों को भी एक-एक करके बाहर का रास्ता दिखा है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी पिछली बार जितनी भी सीटें जीत पाएगी या नहीं ये बड़ी बात लग रही है। ये वहीं मायावती की पार्टी है जिन्होंने 2007 में यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकार बना कर प्रदेश में राज किया था।












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