Anupriya Patel: 10 साल की राजनीति और पार्टी बन गयी यूपी में तीसरी बड़ी ताकत
लखनऊ, 11 मार्च: अनुप्रिया पटेल की पार्टी, अपना दल (एस) अब उत्तर प्रदेश में तीसरे नम्बर की पार्टी बन गयी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) को 12 सीटें मिली हैं। उसने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था। हालांकि दूसरे नम्बर की पार्टी सपा (124) और अपना दल एस (12) के बीच बहुत गहरी खाई है। फिर भी सच यही है कि अब वह यूपी में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। बसपा और कांग्रेस का लगभग सफाया होने के कारण यह स्थिति बनी है। नतीजों की सूची में 274, 124 के बाद सीधे 12 सीटों वाली पार्टी विराजमान है। इस लिहाज से अनुप्रिया पटेल उत्तर प्रदेश में मायावती, प्रियंका गांधी, ओमप्रकाश राजभर, संजय निषाद से भी ज्यादा सफल नेता हैं। अनुप्रिया पटेल 2012 में पहली बार विधायक बनीं थीं। सिर्फ 10 साल के संसदीय जीवन में यह कामयाबी चकित करने वाली है।

अनुप्रिया पटेल की पार्टी को 12 सीटें
इस जीत के बाद केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, जिन 12 सीटों पर जीत मिली है वे उत्तर प्रदेश के अलग अलग इलाकों में स्थित हैं। ये जीत पश्चिमी क्षेत्र, बुंदेलखंड, मध्य क्षेत्र और पूर्वांचल में मिली हैं। यानी अपना दल के समर्थकों का दायरा बहुत बड़ा है। ये सीटें हैं- रोहनिया, नानपारा, मढ़ियाहू, विश्वनाथगंज, शोहरतगढ़, बिंदकी, बारा, कायमगंज, मानिकपुर, घाटमपुर, छियानबे और महुरानीपुर। कुर्मी समाज के नेता सोनेलाल पटेल ने अपना दल का गठन किया था। उनके निधन के बाद अपना दल में उत्तराधिकार के लिए लड़ाई शुरू हो गयी। अनुप्रिया पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल एक दूसरे के खिलाफ हो गयीं। कृष्णा पटेल ने अपना दल (कमेरावादी) बना ली। 2022 के विधानसभा चुनाव में कृष्णा पटेल ने प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ा था। प्रतापगढ़ सीट पर अनुप्रिया पटेल की पार्टी का कब्जा था। लेकिन अनुप्रिया ने अपनी मां की खातिर अपने सीटिंग विधायक की कुर्बानी दे दी। उन्होंने प्रतापगढ़ से उम्मीदवार ही नहीं दिया। लेकिन इसके बाद भी कृष्णा पटेल चुनाव हार गयीं। इस पर अनुप्रिया पटेल ने कहा, मुझे भाजपा गठबंधन की जीत पर बेहद खुशी है लेकिन अपनी मां की हार का दुख भी है। मैंने तो पूरी कोशिश की कि वे जीत जाएं। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। 2017 में अपना दल (एस) के 9 विधायक जीते थे। अब यह संख्या 12 हो गयी है। चुनावी नतीजों ने एक बार फिर अनुप्रिया पटेल को ही सोनेलाल पटेल का वास्तविक उत्तराधिकारी बताया।

बसपा से निकले, खुद की पार्टी बना किया कमाल
ओमप्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रमुख क्षेत्रीय नेता माना जाता है। इस बार उन्होंने सपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। 2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा को 6 सीटों पर जीत मिली है। ये सीटें हैं- जहूराबाद, जखनिया, बेल्थरा रोड, मऊ, जफराबाद और महादेवा। हालांकि ओमप्रकाश राजभर के पुत्र अरविंद को हार झेलनी पड़ी लेकिन 2017 की तुलना में पार्टी के दो विधायक बढ़े हैं। अगर क्षेत्रीय पार्टियों के बीच तुलना की जाए तो अपना दल एस, सुहेलदेल भारतीय समाज पार्टी से बड़ा है। इन दोनों पार्टियों का उदय बहुजन समाज पार्टी के लिए एक बिडम्बना है। सोनेलाल पटेल और ओमप्रकाश राजभर, दोनों ने कांशीराम के साथ राजनीति शुरू की थी। दोनों बसपा के मजबूत नेता गिने जाते थे। लेकिन मायावती से अनबन के काण दोनों को बसपा से निकलना पड़ा। सोनेलाल पटेल ने अपना दल बनाया। ओमप्रकाश राजभर ने सुहेलदेल भारतीय समाज पार्टी बनायी। आज कितने आश्चर्य की बात है कि इन दोनों नेताओं की पार्टी बसपा से बड़ी हो गयी। 2022 में बसपा को सिर्फ एक सीट मिली है। 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली पार्टी अब फिसड्डी बन गयी है। 2007 में बसपा को 206 सीटें मिलीं थीं। 2022 में एक सीट मिली है। राजनीति में ऐसा उतार-चढ़ाव कम ही देखने को मिलता है।

बौद्धिक छवि से मिली कामयाबी
अपना दल एस को कुर्मी हितों का संरक्षक माना जाता है। लेकिन अनुप्रिया पटेल की छवि एक डाय़नेमिक लीडर की रही है। वे लेडी श्रीराम कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ी हैं। साइकोलॉजी में एमए हैं। एमबीए भी हैं। फर्राटे से अंग्रेजी बोलती हैं। संसद में ओजस्वी भाषण करती हैं। सार्वजनिक जीवन में भी बहुत शालीनता के साथ अपनी बात रखती हैं। वे युवा हैं और उनकी उम्र 41 साल है। इसलिए फिटनेस का बहुत ख्याल रखती हैं। नियमित योग और कसरत करती हैं। कुल मिला कर जनता के बीच उनकी छवि एक प्रभावशाली नेता की है। वे अपनी पार्टी का बौद्धिक चेहरा हैं। मां और बहनों के साथ विवाद के बावजूद वे राजनीति में इसलिए सफल रहीं क्यों कि उनकी छवि एक वाकपटु नेता की है। एनडीए में भी अनुप्रिया पटेल को एक तेजतर्रार नेता माना जाता है। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अनुप्रिया पटेल के अलावा संजय निषाद की पार्टी निषाद दल के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। (यह भी दिलचस्प है कि संजय निषाद भी कभी बसपा से जुड़े थे) निषाद पार्टी को छह सीटें मिली हैं। यानी अपना दल (एस) ने निषाद पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया है। इन्ही नतीजों के आधार पर अनुप्रिया पटेल को उत्तर प्रदेश का सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता करार दिया जा रहा है।












Click it and Unblock the Notifications