लखनऊ कैंट सीट पर इन दिग्गज नेताओं की है नजर, ऐसे में अपर्णा यादव टिकट पाने में क्‍या होंगी कामयाब?

लखनऊ कैंट सीट पर इन दिग्गज उम्‍मीदवारों की है नजर, ऐसे में अपर्णा यादव क्‍या होंगी कामयाब

लखनऊ, 17 जनवरी। उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। चुनावी तारीखों की घोषणा के बाद से राजनीतिक पार्टियां टिकटों का बंटवारा कर रही हैं। वहीं प्रदेश की राजधानी लखनऊ की कैंट सीट पर सबकी निगाह टिकी हुई है। इस सीट के लिए एक अनार और सौ बीमार वाली हालत हो गई है। लखनऊ कैंट सीट जो भाजपा का दुर्ग है, उस पर कई वीआईपी की निगाह टिकी हुई हैं। भाजपा के लिए इस सीट पर उम्‍मीदवार का चुनाव करना बड़ा ही पेचीदा हो चुका है।

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अपर्णा यादव क्‍या होंगी कामयाब ?

बता दें मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव भी कैंट सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं लेकिन अखिलेश यादव अपने छोटे भाई की पत्‍नी अपर्णा यादव को इस सीट से टिकट देने को राजी नहीं है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि अपर्णा यादव भाजपा में शामिल हो सकती हैं। लेकिन अगर वो भाजपा में शामिल हो भी जाती हैं तो भारतीय जनता पार्टी अपने बाकी नेताओं को नाराज कर अपर्णा यादव को इस सीट से चुनाव लड़वाएंगीइसमें संदेह हैं क्‍योंकि भाजपा के लिए ये फैसला काफी जटिलताएं खड़ी कर सकता है।

रीता बहुगुणा जोशी बेटे मयंक को दिलवाना चाहती है टिकट

रीता बहुगुणा जोशी जो लखनऊ की कैंट सीट से दो बार विधायक रह चुकी हैं वो अपने बेटे मयंक जोशी को इस सीट से भाजपा से टिकट दिलवाने की फिराक में हैं। उन्‍होंने अपने बेटे की पैरवी के लिए भाजपा आलाकमान को पत्र भी लिखा हैं उन्‍होंने बताया है कि उनका इस सीट पर दबदबा रहा है और परिवारवाद का आरोप ना लगे इसलिए बेटे के लिए वो सक्रिय राजनीति से सन्‍यास भी लेने को तैयार हैं। रीता बहुगुणा जोशी ने कांग्रेस में रहते हुए 2012 में जीत हासिल की थी इसके बाद 2017 में भाजपा के टिकट पर सपा प्रत्‍याशी अपर्णा यादव को हराया था। 2019 लोक सभा चुनाव में इलाहाबाद से जीतने के बाद सांसद बनी तो उपचुनाव में सुरेश तिवारी ने जीत हासिल की थी। राजनीति के जानकारों के अनुसार अगर भाजपा उनके बेटे को टिकट नहीं देती हैं तो रीता बहुगुणा बगावती तेवर दिखा सकती हैं। तब इस सीट पर मुकाबला दिलचस्‍प होगा।

ये वीआईपी कैंट सीट से चाहते हैं टिकट

  • लखनऊ कैंट सीट पर सीटिंग विधायक सुरेश चंद्र तिवारी टिकट मिलने से पहले ही लोगों से वोट के लिए संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
  • लखनऊ मेयर संयुक्‍ता भाटिया अपनी पुत्र वधू रेशू भाटिया को कैंट से टिकट दिलवाना चाहती हैं।
  • डिप्‍टी सीएम दिनेश शर्मा भी चुनाव लड़ेगे और कैंट उनकी पसंददीदा कैंट सीट है, इसलिए उनकी भी निगाह इस सीट पर है।
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह को इस सीट से चुनाव लड़वाने के लिए भाजपा के कुछ वरिष्‍ठ नेता पैरवी कर रहे हैं।
  • युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री अभिजात मिश्रा भी इस सीट के दावेदारों में शामिल हैं।
  • वर्तमान सरकार के मंत्री महेंद्र सिंह की निगाह इस सीट पर है।
  • लालकुआं वॉर्ड पार्षद सुशील तिवारी पम्मी भी इस सीट से भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं।

कैंट सीट पर रहा इनका दबदबा

राजनीतिक के जानकारों के अनुसार कैंट सीट भाजपा की गढ़ है और इसलिए इस सीट को लेकर भाजपा अलाकमान कोई भी रिस्‍क नहीं लेंगे। इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा का दबदबा रहा है यहां कभी भी सपा और बसपा कामयाब नहीं हुई है। इस सीट पर अभी तक जो भी विधायक बने उनमें अधिकांश ब्राह्मण रहे। 12 बार यहां से ब्राह्मण उम्‍मीदवार विधायक बने। जातीय समीकरण की बात करें तो इस सीट पर सभी जाति के वोटरों की अच्‍छी संख्‍या है तो ऐसे में भाजपा सारे फैक्‍टर पर विचार करने के बाद ही इस सीट पर उम्‍मीदवार उतारेगा।

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