यूपी चुनाव 2022: भाजपा, सपा ही नहीं कांग्रेस की रैली में भी दिखी भारी भीड़, क्या वोटों में तब्दील होगी?
यूपी चुनाव 2022: भाजपा, सपा ही नहीं कांग्रेस की रैली में भी दिखी भारी भीड़, क्या वोटों में तब्दील होगी?
लखनऊ, 22 दिसंबर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में अब कुछ ही समय शेष रह गया है। नए साल की शुरूआत में देश के पांच राज्यों के साथ उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होंगे। यूपी चुनाव देश भर के राज्यों में सबसे बड़ा प्रदेश है इसलिए यहां के चुनाव पर देश भर के सियासी दलों की निगाह रहती है। हर बार की तरह इस बार भी यूपी के चुनावी मैदान में कई नई पार्टियां अपना पूरा दम खम झोंक रही हैं। जहां इस बार दावा किया जा रहा है कि यूपी चुनाव में मुख्य टक्कर भाजपा और सपा के बीच होगी लेकिन चुनावी रैलियों में भाजपा,सपा ही नहीं बसपा और कांग्रेस पार्टी की रैलियों में लोगों की जबदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। क्या जो ये भीड़ जो रैलियों में जुट रही है क्या ये उन पार्टियों के वोटों में तब्दील होंगे? आइए जातने हैं चुनावी रैली में जनता की भारी भीड़ जुटने के क्या मायने हैं?
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पीएम मोदी और सीएम योगी की रैली में जुट रही भीड़
बात अगर यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य नेताओं की पिछले दिनों हुई सभाओं की अगर की जाए तो उसमें जबरदस्त जनसैलाब देखने को मिला। चाहे वो पीएम मोदी की वाराणसी समेत अन्य जिलों में हुए कार्यक्रम हो या सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी जनसभा उसमें जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। जिसको देखकर जहां भाजपा गदगद है लेकिन सपा और कांग्रेस नेताओं के चुनावी कार्यक्रम में उमड़ रही लोगों की भीड़ देखकर भाजपा भी अचंभित है।
सपा की रैली में उमड़ा जनसैलाब
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले कुछ दिनों में ऊंचाहार, मैनपुरी समेत अन्य जगहों पर रथ यात्रा के बहाने पहुंचे। सभी जगहों पर रथ यात्रा के दौरान लोगों की भारी भीड़ जुटी। हजारों की संख्या में जुटी भीड़ को देखकर जहां सपा के मुखिया गदगद हैं वहीं लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या ये भीड़ वोटों में तब्दील होगी? सपा को मुख्य दावेदार पार्टी बताया जा रहा है और सपा ने कई पार्टियों से गठबंधन किया है तो भीड़ जुटना स्वाभाविक है, लेकिन कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की रैली में जुटी भीड़ विपक्षी पार्टी को कन्फ्यूज करने के साथ डरा भी रही है।
प्रियंका गांधी की अमेठी रैली में जुटी भारी भीड़
याद रहें 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने का ऐलान करके कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बाकी पार्टियों के लिए टिकट बंटवारें को लेकर असमजस में डाल दिया है वहीं पिछले सप्ताह अमेठी समेत अन्य जगहों पर प्रियंका गांधी की रैली में जुटी लोगों की भीड़ ने नेताओं की चिंता बढ़ा रहे हैं। क्योंकि कांग्रेस को राजनीतिक पार्टियां इस चुनावी मैदान में मजबूत दावेदार ही नहीं मान रही हैं।
टिकटों का बंटवारा नहीं हुआ है तो लोकल नेता भीड़ जुटा कर अपनी ताकत दिखा रहे?
चुनावों गतिविधियों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ की इस मामले में भिन्न-भिन्न राय है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में योगी सरकार है तो उनकी रैली में भीड़ जुटना स्वाभाविक है। वहीं बात अगर प्रधानमंत्री मोदी की जाए तो उनका भाषण और उन्हें सामने से देखने के लिए हमेशा से भीड़ जुटती है ऐसे में लोगों का जुटना आम बात है लेकिन विपक्षी पार्टियां सपा और कांग्रेस की रैली में भीड़ जुटने का प्रमुख कारण ये है कि अभी टिकटों का बंटवारा नहीं हुआ है, ऐसे में टिकट पाने की होड़ में स्थानीय नेताओं के लिए अपनी पार्टी के बड़े नेता के कार्यक्रम में भीड़ जुटा कर अपनी वोट ताकत दिखाना होता है। ये भीड़ वोट में तब्दील होगी ये कहना मुश्किल है। अभी लोग चेहरे देखने आ रहे हैं बाकी मीटिंग मैनेजमेंट है, भीड़ वोटों में बदले जरूरी तो नहीं।
रैली में भीड़ होने के संकेत अहम हैं
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस का इसके बारे में कहना है कि भाजपा की रैली में भीड़ की बात और वजह समझ में आती है। कारण यह कि उनकी सरकार है लिहाजा संसाधन की कमी नहीं और सरकारी अमला भी पूरी तरह से जुटता है। वहीं सपा और यहां तक कि कांग्रेस की रैली में भीड़ होने के संकेत अहम हैं। उन्होंने कहा विपक्ष की रैली में भीड़ से साफ लगता है कि जनता में मौजूदा सरकार, सिस्टम व नेतृत्व से नाराजगी है और वो विरोध की आवाज सुनना चाहती है।अभी कह नहीं सकते हैं कि जनता ने विकल्प तलाश लिया है पर इतना जरूर है कि वो विकल्प की तलाश में है।












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