योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं बेबस, फावड़ा उठा खुद बनाई घर तक सड़क

वाराणसी। यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर आज अपने पैतृक घर पर खुद परिवार के लोगों के साथ मिलकर फावड़ा-कुदाल चलाते दिखे। योगी सरकार में मंत्री राजभर के बेटे का कल रिसेप्शन होना है और उनके घर तक सड़क मार्ग नहीं है इसलिए उन्होंने ये जिम्मा खुद उठाया और सड़क बनाने में लग गए। बतौर कैबिनेट मंत्री उन्होंने कई बार शासन से सड़क बनवाने की गुहार लगाई लेकिन फिर भी उनके इस आवेदन पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसके बाद आज वह खुद ही फरसा-कुदाल लेकर अपने लोगों के साथ सड़क बनवाने में जुट गए। मंत्री जी के पीआरओ ने बताया कि कल उनके लड़के की शादी का रिशेप्शन है जिसमे उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज मंत्रियों और तमाम राजनेताओं को आना है। लेकिन उसके बाद भी प्रशासन के कान मे जूं तक नही रेंगी।

up cabinet minister om prakash rajbhar seen making road in his village

कैबिनेट मंत्री तक की नहीं हो रही सुनवाई
दरसअल, इस पूरे मामले का कारण ये बताया जा रहा है कि शासन को सैकड़ों बार पत्र लिख ओमप्रकाश राजभर ने अपने पैतृक घर की सड़क बनाने की गुहार लगाई थी। लेकिन किसी ने उनके पैतृक गांव की सड़क नहीं बनाया। कल जबकि उनके लड़के की शादी का रिशेप्शन है तो उन्होंने खुद ही सड़क बनानी शुरू कर दी। हैरानी की बात ये है कि एक दिन्नज नेता और योगी सरकार में मंत्री होने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिसमे उत्तरप्रदेश के कई दिग्गज मंत्री और नेता आ रहे है,लेकिन उसके बाद भी प्रशासन के कान मे जूं तक नही रेंगी।सवाल ये उठता है की अगर योगी सरकार मे एक कैबिनेट मंत्री का ये हाल तो जनता तो भगवान भरोसे ही रहेगी।

राजभर और योगी सरकार के अधिकारियों मंत्रियों के बीच खींचातानी
दरअसल बीते कई महीने से योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर आक्रामक तेवर में दिखाई दे रहे हैं। ओमप्रकाश ने उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे सहित कई दिग्गज नेताओं पर शब्दों के बाण चलाने के साथ ही आरोप भी लगाए की बीजेपी के नेता अपने रिश्तेदारों को अच्छे स्थानों पर पोस्टिंग करा रहे हैं। जिसके बाद से ही ओमप्रकाश राजभर और अधिकारियों में तनातनी चली आ रही है। यही नहीं इसी माह में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे ने भारतीय समाज पार्टी के अजगरा विधानसभा के विधायक कैलाश नाथ सोनकर को चोर कह दिया था। जिसके बाद से ही बातें और बिगड़ना शुरू हो गई ओम प्रकाश ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए यह भी कहा कि मैं ज्वालामुखी हूं और यदि बीजेपी उसे दबाने की कोशिश करेगी तो मैं उतना ही आगे चलता आऊंगा लेकिन जिस सम्मानित पद पर महेंद्र नाथ पांडे बैठे हैं उन्हें इस तरीके की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए था।

शिवपाल यादव और ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात ने भी BJP के मन में खड़े किए कई सवाल
यही नहीं इस महीने में शादी समारोह होने के कारण बीते 1 हफ्ते से लगातार बनारस में प्रवास कर रहे हैं। भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर जब पहले दिन काशी आए तो उत्तर प्रदेश के पूर्व लोक निर्माण मंत्री और समाजवादी पार्टी नेता शिवपाल यादव से उनकी मुलाकात वाराणसी के सर्किट हाउस में हुई। दोनों नेताओं ने करीब 10 मिनट तक एक बंद कमरे में गुफ्तुगू किया। जिससे यह कयास लगाए जा रहे थे कि कहीं 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की कोई योजना तो नहीं बन रही है। इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा बढ़ने के बाद हालांकि ओम प्रकाश ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया लेकिन कहीं ना कहीं बीजेपी के नेता शिवपाल से होने वाली मुलाकात से नाराज थे।

सर्किट हाउस में नहीं मिले थे ओम प्रकाश और महेंद्र नाथ पांडे
यही नहीं यह नाराजगी इतनी बढ़ गई कि दूसरे दिन वाराणसी पहुंचे उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे ने सर्किट हाउस में भारतीय समाज पार्टी के ओमप्रकाश राजभर के मौजूद होने के बावजूद भी उनसे ना तो किसी तरीके की वार्तालाप की और ना ही मुलाकात की। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार में भारतीय समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन है और यही वजह है की योगी सरकार ने ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री का पद भी दिया था। सूत्रों की माने तो उसी दिन जब अजगरा के विधायक कैलाश नाथ सोनकर पर घूस और ठगी का आरोप लगने के बाद बीच सभा में उन्हें महेंद्र नाथ पांडे ने चोर कहा तो ओमप्रकाश राजभर ने भी अपने विधायक के बचाव में यहां तक कह दिया कि माननीय महेंद्र नाथ पांडे जी को मेरे विधायक को छोड़ अपने पार्टी के विधायक और सांसदों पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि वह सरकार में रहते हुए भी धरना प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराते हैं, पहले वह अपने विधायक और सांसदों की करतूत देखनी उसके बाद कैलाश नाथ सोनकर पर सवाल खड़ा करें।

अधिकारियों की बात ना मानने से नाराज होकर सरकार के खिलाफ खड़े हुए थे ओमप्रकाश राजभर
दरअसल ओमप्रकाश राजभर गाजीपुर जिले के जौराबाद से भारतीय समाज पार्टी और बीजेपी गठबंधन पर चुनाव जीत विधायक बने थे। कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा लेकिन निरीक्षण और खामियों को लेकर ओमप्रकाश राजभर और गाजीपुर के जिलाधिकारी के बीच तनातनी हो गई। यही नहीं ओमप्रकाश राजभर इस पूरे मामले की शिकायत सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से की थी। लेकिन कार्रवाई में लेट होने के बाद से इनकी नाराजगी सामने आती रही है। सरकार में रहते हुए भी ओमप्रकाश राजभर ने यह आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की सरकार IAS अधिकारी ही चलाते हैं। जिसके बाद से ही लगातार विवाद बढ़ता रहा और आज यह स्थिति हुई कि कोई भी अधिकारी इनके किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेता।

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