UP बजट सत्र: विधान परिषद में गूंजा पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा, जानिए योगी सरकार ने क्या दिया जवाब

लखनऊ, 30 मई: उत्तर प्रदेश में बजट सत्र चल रहा है। आज सत्र का आठवां दिन है। सोमवार को सदन में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी गूंजा। इस दौरान विपक्ष सरकार पर नई पेंशन योजना के माध्यम से कर्मचारियों का शोषण करने का आरोप लगाते रहे। जिस पर पूर्व मंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने सीधे-सीधे समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि 2005 में जब उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना खत्म की गई।

UP Budget Session

विधान परिषद में दिनेश शर्मा ने कहा की तब सरकार समाजवादी पार्टी की ही थी इसके बाद अगले 12 वर्ष तक भाजपा की सरकार नहीं रही। जब से भाजपा सरकार आई है कर्मचारियों की पेंशन स्कीम में राज्य अंश को 10 से 14 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है।

विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और नई पेंशन योजना को समाप्त करके पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की मांग की जाती रही। इसके साथ ही विपक्ष ने करीब 9000 करोड रुपए के गन्ना मूल्य भुगतान ना होने को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। जिस पर विधान परिषद सभापति ने चीनी मिलों पर और अधिक शिकंजा कसने का आदेश सरकार को दिया है।

समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा की ओर से वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना से सवाल पूछा गया था कि क्या वित्त मंत्री बताएंगे कि प्रदेश सरकार पुरानी पेंशन में को लागू करने पर विचार कर रही है। जिसका सरकार की ओर से राज्य मंत्री जसवंत सैनी ने जवाब दिया कि इसका कोई प्रश्न नहीं होता है उन्होंने नई पेंशन स्कीम में सरकार की ओर से जमा कराए जा रहे अंश का उल्लेख किया और कहा कि कभी भी पुरानी पेंशन को लागू करने का कोई विचार नहीं। इस पर विपक्ष की ओर से हंगामा शुरू कर दिया गया। तब पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने जवाब दिया कि जब भाजपा की सरकार नहीं थी। तब पुरानी पेंशन को उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने ही लागू किया था। और अगले 12 साल तक कर्मचारियों का अंश नहीं जमा किया गया। इसके बाद हमारी सरकार आने पर कर्मचारियों का अनशन जमा किया गया है।

इससे पहले समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य राजेंद्र चौधरी ने सरकार से सवाल किया था कि गन्ना मूल्य का कितना भुगतान बकाया है। सरकार की ओर से जवाब दिया गया।

जिस पर राजेंद्र चौधरी ने कड़ा एतराज जताया उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि 14 दिनों में किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान कर दिया जाएगा. मगर नतीजा यह है कि अभी भी करीब ₹9000 करोड़ का बकाया है। सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि 74 फ़ीसदी भुगतान किया जा चुका है। 26 फ़ीसदी बकाया भुगतान के लिए चीनी मिलों को नोटिस दिए जा रहे हैं। इस पर सभापति मानवेंद्र सिंह ने कहा कि मंत्री चीनी मिलों पर और शक्ति करके गन्ना मूल्य भुगतान तत्काल करवाएं।

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