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श्रीराम की आरती उतारने वाली मुस्लिम महिलाओं, हवन करने वाले हाजी इकबाल से उलेमा खफा

सहारनपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मुस्लिम महिलाओं द्वारा भगवान राम की आरती करने और उनके चित्र के समक्ष दीए जलाकर पूजा करने को लेकर इस्लामिक जगत में तूफान सा मच गया है। देवबंदी उलेमा ने ऐसी महिलाओं को इस्लाम मज़हब से खारिज करार दिया है। कहा है कि इन महिलाओं को अल्लाह से माफी मांग कर दोबारा से कलमा पढ़ ईमान में दाखिल होना चाहिए।

'सिर्फ अल्लाह की इबादत'

'सिर्फ अल्लाह की इबादत'

दारुल उलूम ज़करिया के वरिष्ठ उस्ताद और फतवा ऑन मोबाइल सर्विस के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी समेत अन्य उलेमा-ए-कराम ने कहा कि मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत कर सकता है। जिन महिलाओं ने दूसरे मजहबी अकीदे को अपनाते हुए यह सब क्रियाएं की हैं वह इस्लाम मजहब से भी खारिज है क्योंकि इस्लाम मजहब में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे मजहब के साथ मोहब्बत और नरमी तो बरती जा सकती है लेकिन पूजा नहीं की जा सकती है। इसलिए बेहतर है कि वह अपनी गलती मानकर दोबारा कलमा पढ़कर ईमान में दाखिल हों।

महिलाएं गलती से करें तौबा

महिलाएं गलती से करें तौबा

उन्होंने कहा कि वह कलमा पढ़ लोगों को बताए कि उन्होंने अपनी गलती की तौबा कर ली है। इसके बाद उन्हें माफ कर ईमान में दाखिल समझा जाए। मदरसा जामिया कासमिया द्रुततालीम व सना के मोहतमिम मौलाना इब्राहिम क़ासमी और जामिया हकीमुल इस्लाम के मोहतमिम करि रहीमुद्दीन क़ासमी ने कहा कि अल्लाह के सिवा किसी और कि इबादत करने को अल्लाह से तौबा कर दोबारा कलमा पढ़ना चाहिए।

हाजी इकबाल से भी खफा उलेमा

हाजी इकबाल से भी खफा उलेमा

यह मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि अवैध खनन को लेकर चर्चित पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल के बारे में भी उलेमा ने यही राय जाहिर की है। उलेमा का कहना है कि वाराणसी की महिलाओं और हाजी इकबाल का दूसरे धर्म की पूजा पद्धति में शरीक होना इस्लाम के खिलाफ है। उन्हें दुबारा कलमा पढ़कर अल्लाह से अपनी गलती की तौबा करनी चाहिए। तभी उनका ईमान मुकम्मल होगा।

धन्वंतरि पर ग्लोकल विश्वविद्यालय कैंपस में स्थित आयुर्वेद कालेज में हवन व पूजन का आयोजन किया गया था। इसमें कालेज के चेयरमैन हाजी इकबाल ने भी शिरकत की थी। इस बाबत सोशल मीडिया पर कई फोटो भी वायरल हो रहे हैं। फोटो के मुताबिक हाजी इकबाल हवन में आहुति देते नजर आ रहे हैं। इसके चलते इस्लामी और सियासी जगत में हलचल मच गई। फतवा ऑन मोबाइल सर्विस के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत कर सकता है। कहा कि यदि हाजी इकबाल ने दूसरे मजहबी अकीदे को अपनाते हुए धार्मिक क्रियाएं की हैं तो वह भी इस्लाम मजहब से खारिज है। उन्होंने कहा कि यदि हाजी इकबाल ने ऐसी गलती की है तो उन्हें अल्लाह से तौबा करते हुए दोबारा कलमा पढ़कर ईमान में दाखिल होना चाहिए। दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मुफ्ती शरीफ खान का कहना है कि मुसलमान के लिए दूसरे धर्म की पूजा पद्धति और क्रियाओं को अपनाना इस्लाम के खिलाफ है। ऐसा व्यक्ति पूरी तरह से ईमान से खारिज माना जाएगा।

हाजी इकबाल ने कहा

हाजी इकबाल ने कहा

हाजी इकबाल ने इस बारे में कहा कि भारत सरकार ने सभी आयुर्वेद कालेजों को धन्वंतरि जयंती पर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाए जाने का निर्देश दिया था। इसके तहत हवन व अन्य कार्यक्रम करने की बात कही गई थी। इसके तहत आयुर्वेद कालेज में फैकल्टी ने यह कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें मुझे भी आमंत्रित किया गया था। फोटो को प्रचारित करना मेरे खिलाफ हो रही साजिशों का ही हिस्सा है।

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