रेलवे में लगी जॉब! 7 लाख रुपए लेकर बना दिए गए फर्जी टीटीई

वाराणसी के मंडुआडीह रेलवे स्टेशन पर दो फर्जी टीटीई को गिरफ्तार किया है जिन्होंने रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी का खुलासा किया है।

वाराणसी। बनारस के मण्डुवाडीह रेलवे स्टेशन पर दो फर्जी टीटीई को आरपीएफ ने गिरफ्तार किया है। ये वो दो टीटीई हैं जो वाराणसी के अलावा यहां के मंडलो में चलने वाली ट्रेनों में चढ़कर बकायदा यात्रियों का टिकट चेक करते थे और बिना टिकट मिलने वाले यात्रियों से जुर्माना भी वसूलते थे। पकड़े गए ये दोनों फर्जी टीटीई मण्डुवाडीह रेलवे स्टेशन पर मऊ से इलाहाबाद जाने वाली सवारी गाड़ी के आने पर टिकट चेक करते हुए पकड़े गए है। दरसअल स्टेशन पर आई ट्रेन में काला कोर्ट पहन कर दो लोग यात्रियों का टिकट चेक कर रहे थे, तभी रोजाना की चेकिंग के लिए निकले आरपीएफ के इंस्पेक्टर दिमांग सिंह ने दोनों को धर लिया।

दोनों को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

दोनों को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

दिमांग ने इन दोनों से जब आईकार्ड माँगा तो पहले तो ये आनाकानी करने लगे पर कड़ाई से पूछे जाने पर जो राज खुला उससे एक बार फिर रेलवे के कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इस गिरफ्तारी से ये बात सामने आयी है कि रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी करने वालों का गिरोह सक्रिय है जिसके तार मद्रास से लेकर वाराणसी के डीजल रेल कारखाने तक जुड़े हुए है। आरपीएफ ने इन दोनों को गिरफ्तारी के बाद सभी कागजी कार्रवाई कर जेल भेज दिया है। अभी भी कई राज खुलने बाकी हैं।

7 -7 लाख रुपए की दी घूस, बने फर्जी टीटीई

7 -7 लाख रुपए की दी घूस, बने फर्जी टीटीई

आरपीएफ के इंस्पेक्टर ने कहा, 'बीती रात ये दोनों लड़के बकायदा टीटीई के पूरे ड्रेस को पहनकर मण्डुवाडीह पर जब चेकिंग कर रहे थे तभी मुझे शक हुआ था कि कोई नया स्टाफ आता है तो हमें भी जानकारी दी जाती है। ऐसे में जब हमने इनसे पूछताछ शुरू की तो दोनों आरोपियों ने अपना नाम सुनील सिंह और अनमोल बताया। इन्होंने हमें बताया कि चेन्नई के रेणु गोपाल और वाराणसी के डीएलडब्लू के अरुण श्रीवास्तव ने हमारी नियुक्ति की है और इसके एवज में हमसे 7 - 7 लाख रुपये भी लिये है।'

रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी

रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी

दिमांग सिंह ने जब अनमोल से रेणु गोपाल के नम्बर माँगे तो उसने जो नम्बर दिया उस पर बात हो गई। वो पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदम्बरम के पीए हैं। उन्होंने अनमोल को पहचानने से इंकार कर दिया है जबकि डीएलडब्लू के अरुण श्रीवास्तव की तलाश की जा रही है। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी का काम कितनी तेजी से चल रहा है। यही नहीं इन दोनों आरोपियों ने ये भी बताया कि नौकरी दिलाने के लिए दिल्ली और हरियाणा के चार लोगों ने ही इन्हें रेणु गोपाल और अरुण सिंह से मिलवाया था।

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