वाराणसी: देश के पहले डीजल रेल इंजन कारखाने में क्यों बन रहा है पहला टनल?
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में स्थित देश के पहले डीजल रेल इंजन कारखाने में बनने जा रहा है 200 मीटर लंबा टनल।
वाराणसी। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में स्थित देश के पहले डीजल रेल इंजन कारखाने में बनने जा रहा है 200 मीटर लंबा टनल। डीरेका रेल इंजन कारखाने का उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था। इस परिसर में अब तक देश के प्रधानमंत्री 9 बार सभा कर चुके हैं। इसलिए इस परिसर की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ये भी पढ़ें:जल्द ही आप 'पेप्सी राजधानी' या 'कोक शताब्दी' में यात्रा करते नजर आ सकते हैं, रेलवे बना रहा खास योजना

गौरतलब है कि इस परिसर में अचानक से टनल क्यों बनाया जा रहा है। दरअसल, परिसर में स्थित रेलवे के गेट संख्या लेबल 5 बी, 6सी बंद होने की वजह से रेलवे के कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल पर पहुंचाने में देरी होती थी। इसको देखते हुए प्रशासन ने रेलवे ट्रेक के नीचे से अंडर ग्राउंड टनल बनाने का फैसला किया और इसका कार्य भी शुरु हो गया है।
बता दें कि अब जल्द ही रेलवे क्रासिंग के नीचे से अंडर पास बन जाने से डीरेका कर्मियों और परिसर स्थित स्कूल के बच्चों को इस परेशानी से मुक्ति मिल जायेगी। आला अधिकारियों ने गेट संख्या लेबल 5बी और 6सी को बंद कर इसी के नजदीक से ही अंडर पास सड़क को बनाने का कार्य प्रारंभ करवाया है। इस क्रम में रेलवे के आला अधिकारियों ने निर्माणस्थल को चिन्हित कर लेआउट बनाने का कार्य भी आरम्भ कर दिया है।
बताया जा रहा है कि उक्त अंडर पास बन जाने से डीरेका कारखाने और प्रशासनिक भवन में कार्यरत रेलकर्मियों को अपने कार्यस्थल पहुंचने में विलंब नही होगा। परिसर में स्थित कई स्कूलों में पढ़ने जाने वाले बच्चे भी समय से स्कूल पहुंच सकेंगे।
प्रशासनिक भवन और पास ही बने रेलवे दोनों क्रासिंग गेट संख्या लेबल 5बी और 6सी पर तैनात कर्मचारी जो कि तीन शिफ्ट में ड्यूटी कर रहे हैं, उनका वहां से कार्य समाप्त हो जाएगा। यदि एक कर्मचारी की 25 हजार सैलरी मानी जाये तो एक गेट पर 75 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से दोनों गेटों पर सालाना 18 लाख रुपये का खर्च इस टनल बनने से बच जाएगा।
इस टनल में साढ़े चार-चार मीटर की दो लेन और 200 मीटर लंबे अंडर पास के निर्माण में कुल लागत 4 करोड़ 54 लाख रुपये आने की संभावना है। इस कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी बलिया की कार्यदायी संस्था को मिली है जो निर्माण हेतु रेलवे से अनुबंध भी कर चुका है। इस संस्था का निर्माण पूरा करने की अवधि मई 2017 तक की दी गयी है।
उक्त अंडर पास के निर्माण में रेलवे ट्रेक के करीब से गुजर रही सीवर लाइन बाधा उत्पन्न कर रही है जिसे लेकर डीरेका प्रशासन और मंडल रेल प्रबंधक की निर्माण शाखा के अधिकारियों के बीच सीवर लाइन के रूट डाइवर्जन को लेकर बातचीत अंतिम दौर में चल रही है। ये भी पढ़ें:जल्द ही रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ले सकेंगे सात फेरे, आ रही है ये योजना












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