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नाम बदलने का ट्रेंड योगी सरकार में रहेगा बरकरार ?, फर्रुखाबाद को लेकर क्यों गरमायी सियासत

लखनऊ, 2 अप्रैल : उत्तर प्रदेश के एक और जिले के नाम पर आने वाले दिनों में बहस होने वाली है। फर्रुखाबाद से भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जिले का नाम बदलकर पांचाल नगर करने की मांग की है। इतिहास का जिक्र करते हुए दो बार के सांसद ने कहा कि जिस जमीन पर जिले का निर्माण हुआ है वह पांचाल प्रांत की राजधानी हुआ करती थी और मुगल शासन के दौरान इसका नाम बदल दिया गया था। योगी के पहले कार्यकाल में भी कई जिलों का नाम बदला गया था जिसके बाद जमकर बवाल मचा था।

योगी आदित्यनाथ

प्रयागराज और फैजाबाद का नाम बदल चुकी है योगी सरकार

अपने पहले शासन में, योगी आदित्यनाथ सरकार ने इलाहाबाद जिले का नाम बदलकर प्रयागराज और अयोध्या का नाम फैजाबाद कर दिया था। इसी तरह के हस्तक्षेप की उम्मीद करते हुए, राजपूत ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि जिले के निवासी नाम में संशोधन की मांग कर रहे हैं। फतेहगढ़ के भोलेपुर मोहल्ले के रहने वाले राजीव शाक्य ने इस मामले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिया था कि बदायूं का नाम बदलकर वेदामऊ कर दिया जाएगा। कई दक्षिणपंथी संगठनों ने राज्य सरकार से सुल्तानपुर, मिर्जापुर, अलीगढ़, फिरोजाबाद और मैनपुरी का नाम बदलने की मांग की है। इसके अलावा गाजीपुर और बस्ती जिलों के नाम बदलने का प्रस्ताव भी योगी सरकार के पहले कार्यकाल में आ चुका है।

नाम बदलने की बजाए अर्थव्यवस्था सुधारने पर ध्यान देने की जरूरत

शाक्य ने कहा कि, "जिले का नाम बदलने में बहुत समय लगता है और राजकोष पर बोझ पड़ता है। हालांकि फर्रुखाबाद ठीक नहीं है, लेकिन नाम बदलने से कुछ नहीं बदलेगा। पहले के समय में फर्रुखाबाद एक संपन्न व्यावसायिक शहर हुआ करता था। निर्वाचित प्रतिनिधियों को शहरों और प्रतिष्ठानों के नाम बदलने के बजाय अर्थव्यवस्था में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि मुकेश राजपूत ने सरकार को याद दिलाया कि फर्रुखाबाद तीन नदियों गंगा, रामगंगा और काली के तट पर बसा है। महाभारत का जिक्र करते हुए राजपूत ने कहा कि जिले का एक कस्बा कंपिल द्रौपदी के पिता राजा ध्रुपद की राजधानी हुआ करती थी। द्रौपदी का विवाह उसी भूमि पर हुआ था, राजपूत ने कहा। 13वें तीर्थंकर ब्राह्मण विमल नाथ के जन्मस्थान के रूप में, राजपूत ने जैन धर्म के अनुयायियों के बीच जिले के महत्व पर प्रकाश डाला।

कई जिलों का नाम बदलने को लेकर उठ चुकी है आवाज

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सुल्तानपुर का नाम कुश भवनपुर, अलीगढ़ का नाम हरिगढ़, मैनपुरी का नाम मय नगर, फिरोजाबाद का चंद्रनगर और मिर्जापुर का विंध्य धाम रखा जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा दक्षिणपंथी संगठनों ने आगरा का नाम अग्रवन, मुजफ्फरनगर का नाम लक्ष्मी नगर, उन्नाव जिले के मियागंज का नाम मायागंज करने की मांग की है।

नाम बदलने की राजनीति यूपी से अन्य राज्यों तक फैली

नाम बदलने की यह राजनीति उत्तर प्रदेश से शुरू होकर दूसरे राज्यों तक भी पहुंच चुकी है। कुछ महीने पहले, मध्य प्रदेश के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन कर दिया गया था। इसी तरह अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती करने की मांग की गई है। नाम बदलने की राजनीति भी बीजेपी विरोधी पार्टियों के निशाने पर रही है। लेकिन देखना होगा कि विपक्ष के विरोध और सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया के बाद भी योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में कई जिलों के नाम बदलेगी या नहीं।

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