विधानसभा का मानसून सत्र सितंबर में बुला सकती है सरकार, विपक्ष क्यों लगा रहा है ये बड़ा आरोप
लखनऊ, 11 अगस्त: उत्तर प्रदेश सरकार सितंबर में राज्य विधानसभा का मानसून सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। योगी सरकार इस सत्र का उपयोग 100 दिन की उपलब्धियों को बताने के लिए कर सकती है। हालांकि इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी निपटाए जाएंगे। दरअसल इसमें यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य सरकार मानसून सत्र के दौरान 2022-23 के लिए अपना पहला अनुपूरक बजट पेश करने पर विचार करेगी या नहीं। हालांकि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

राज्य विधानसभा का बजट सत्र 31 मई को समाप्त हो गया। राज्य सरकार भारत के संविधान द्वारा पिछले सत्र के समापन से छह महीने पूरे होने से पहले अगला सत्र बुलाने के लिए बाध्य है। वित्त और संसदीय मामलों के मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने राज्य विधानमंडल का मानसून सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन हमने अभी तक मानसून सत्र बुलाने की तारीख तय नहीं की है।
100 दिन की उपलब्धि गिनाएगी सरकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन पूरे होने पर उपलब्धियों को सूचीबद्ध करते हुए 4 जुलाई को दावा किया था कि सभी विभागों ने इस अवधि के लिए निर्धारित लक्ष्यों को हासिल कर लिया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के 75 में से लगभग 50 जिले बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं और मानसून सत्र सदस्यों को ऐसे अधिकांश जिलों की स्थितियों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगा।
विपक्ष का आरोप- केवल औपचारिकता पूरी न करे सरकार
दूसरी ओर, विपक्ष चाहता है कि सरकार केवल मानसून सत्र की औपचारिकता पूरी करने के बजाय दोनों सदनों के लिए उचित संख्या में बैठक करे। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ,
''राज्य सरकार को लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए राज्य विधानमंडल का सत्र बुलाना चाहिए। कुछ दिनों के लिए राज्य विधानमंडल का सत्र होने की औपचारिकता पूरी करने के बजाय, राज्य सरकार को नियमों का पालन करना चाहिए कि सदन को कितने दिनों तक सत्र में होना चाहिए।''
विधायकों को मिले जनता की बात रखने का मौका
आमतौर पर मानसून सत्र अगस्त या सितंबर की शुरुआत में बुलाया जाता है। कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि राज्य सरकार को न केवल मानसून सत्र बुलाना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए सदनों की बैठकें भी होनी चाहिए कि विधायक जनता की बात रख सकें।












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