BJP के लिए लिटमस टेस्ट साबित होगा पहला चरण, इन 9 चेहरों की प्रतिष्ठा रहेगी दांव पर
लखनऊ, 9 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को होना है। जिसमें योगी सरकार के 9 मंत्रियों की साख दांव पर है। दरअसल, पहले चरण के चुनाव को बीजेपी के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। ऐसे में इन मंत्रियों का प्रदर्शन बीजेपी के लिए बहुत मायने रखता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 अपने चरम पर है। जिसके तहत 7 चरणों में होने वाले चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पहले चरण में पश्चिम यूपी की 58 विधानसभा सीटों पर पहले चरण का मतदान शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा आगरा और अलीगढ़ में मतदान होना है। यहां मुख्य मुकाबला सपा गठबंधन और बीजेपी के बीच में माना जा रहा है, लेकिन इसमें सभी की निगाहें 9 मंत्रियों पर टिकी हैं।

मंत्रियों के प्रदर्शन पर तय होगा बीजेपी का भाग्य
दरअसल, पहले चरण में योगी सरकार (योगी आदित्यनाथ सरकार के 9 मंत्रियों की सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें इन सभी 9 मंत्रियों की साख दांव पर है. इसका एक कारण यह भी है कि ये चेहरे अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। पश्चिम यूपी में बीजेपी की ताकत ये मंत्री ही हैं और इनका प्रदर्शन इस चुनाव में बीजेपी के सफर को आसान बनाने में मददगार साबित हो सकता है। आइए इस रिपोर्ट में समझते हैं कि कौन हैं ये 9 मंत्री और क्या है इनके क्रेडिट के गणित का मतलब जिसकी वजह से बीजेपी को पश्चिम में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

पहले चरण में इन मंत्रियों की साख दांव पर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण में योगी सरकार के 9 मंत्रियों की साख दांव पर लगी है। इसमें मथुरा से विधायक एवं ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, शिकारपुर से विधायक एवं वन-पर्यावरण मंत्री अनिल शर्मा, थाना भवन सीट से विधायक एवं गन्ना मंत्री सुरेश राणा, गाजियाबाद से विधायक एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग,अतरौली से विधायक दिनेश खटीक और खेल एवं युवा मामलों के मंत्री संदीप सिंह, आगरा कैंट के विधायक एवं समाज कल्याण मंत्री जीएस धर्मेश, मुजफ्फरनगर सदर से विधायक एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल, छतर से विधायक एवं डेयरी मंत्री नारायण चौधरी हैं। इन मंत्रियों के प्रभाव की बात करें तो ये सभी 2017 के चुनाव में बीजेपी की जीत के नेता थे। मोदी लहर में इन नेताओं की मदद से 2017 में बीजेपी ने वेस्ट यूपी में 53 सीटें जीती थीं।

पश्चिम यूपी का चुनाव बीजेपी के लिए परीक्षा
दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पश्चिम यूपी बीजेपी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा का केंद्र बन गया है. इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं। दरअसल, पिछले साल तक किसान तीन कृषि कानूनों को लेकर आंदोलित थे। जिसमें पूरे राज्य से सबसे ज्यादा किसान वेस्ट यूपी में थे। इसलिए पश्चिम यूपी में जाट मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में बीजेपी की मुश्किलें इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि रालोद यह चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ रही है।

सपा-आरएडी से पार पाने की चुनौती
दरअसल रालोद लंबे समय से जाटों का प्रतिनिधित्व करती रही है। हालांकि पिछले चुनाव में जाटों का झुकाव बीजेपी की तरफ था, लेकिन इस बार रालोदी की रैली में जाटों की भारी भीड़ नजर आ रही है. ऐसे में वेस्ट यूपी में किसानों और जाटों की संख्या ज्यादा है। पिछले प्रदर्शन को दोहराना बीजेपी के लिए चुनौती जैसा है और योगी सरकार के 9 मंत्रियों की साख दांव पर है। राजनीतिक पंडितों की राय है कि पहले चरण में जिस तरह से योगी सरकार के 9 मंत्रियों को चक्रव्यूह तोड़ने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, अगर वे उसमें सफल हो जाते हैं तो बीजेपी के यूपी चुनाव का सफर आसान हो जाएगा।

पहले चरण में जीत के लिए सबने झोंकी ताकत
पहले चरण के चुनाव के लिए हर वर्ग के मतदाताओं को लुभाने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी पश्चिम यूपी में सपा सरकार के दौरान हुए दंगों, पलायन, गुंडाराज का हवाला देकर वोट मांग रही है। वहीं मंदिर से लेकर मस्जिद तक का जिक्र चुनाव में हो रहा है। कल कड़ी सुरक्षा के बीच पश्चिमी यूपी के दस 11 जिलों में चुनाव हैं। अब देखना यह है कि चुनाव का ऊंट किस तरफ बैठता है। सपा और रालोद के गठबंधन से निपटने के लिए बीजेपी ने कैराना से पलायन के मुद्दे को काफी हवा दी। अब इसका असर कितना पड़ेगा। खासतौर से पश्चिम में बीजेपी से जाट नाराज बताए जा रहे हैं और यह किस हद तक जाएगी यह देखना दिलचस्प होगा।












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