23 मई को विधानसभा सत्र के दौरान लागू होगी ई विधान प्रणाली, जानिए माननीयों को क्या मिलेंगी सहूलियतें
लखनऊ, 11 मई: उत्तर प्रदेश में 23 मई से विधानसभा का सत्र होने जा रहा है। सत्र के शुरू होने से पहले ही इस बार विधानसभा अध्यक्ष ने नया फैसला लिया है। फैसले के मुताबिक इस बार कार्यवाही के दौरान ई विधान प्रणाली लागू की जाएगी जिसका लाभ मंत्रियों और विधायकों को मिलेगा। दरअसल यह फैसला यूपी विधानसभा की कार्यवाही को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए लिया गया है। इसके तहत विधानसभा की कार्यवाही को ई विधान प्रणाली के जरिए YouTube और Facebook जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव दिखाया जाएगा। इसकी जानकारी बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने दी।

23 मई से लागू होगी ई विधान प्रणाली
ई-विधान प्रणाली के लिए धन्यवाद, प्रतिमान बदलाव 23 मई को तब लागू होगा जब यूपी विधानसभा अपना बजट सत्र बुलाएगी। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटने के बाद यह पहला है। 21 मई और 22 मई को विधायकों और यूपी के मंत्रियों को नई व्यवस्था का अहसास होगा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि ई-विधान प्रणाली के आवेदन से लोग विधानसभा में अपने विधायकों के प्रदर्शन का पता लगा सकेंगे। बुधवार को विधानसभा में सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता लाना है।
पहले कार्यकाल में योगी सरकार ने कैबिनेट की बैठक को किया था पेपरलेस
योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान राज्य कैबिनेट की बैठक को पेपरलेस कर दिया था, इसके एक साल से अधिक समय बाद विकास हुआ है। यूपी का बजट भी कुछ दिनों बाद पेपरलेस कर दिया गया। केरल और हिमाचल प्रदेश में ई-विधान प्रणाली पहले ही लागू हो चुकी है। महाना ने कहा कि ई-विधान प्रणाली के लागू होने से राज्य विधानसभा अन्य राज्यों में अपने समकक्ष के साथ जुड़ सकेगी। यह डिजिटल इंडिया के राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) का हिस्सा होगा, जिसे केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा परिकल्पित किया गया है।

टैबलेट से ही लॉगइन कर कार्यवाही में भाग ले सकेंगे माननीय
विधानसभा में हर विधायक की सीट पहले से तय होगी। मंत्री, विधायक अपनी सीट पर लगे टैबलेट से ही लॉग इन कर विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकेंगे। विधानसभा में सीटों की संख्या भी मौजूदा 379 से बढ़ाकर 403 करने का प्रस्ताव है। इस तरह 24 अतिरिक्त सीटें स्थापित करने का प्रस्ताव है। अनिवार्य रूप से उन मंत्रियों के लिए जो अन्यथा विधान परिषद का हिस्सा हैं। सदस्यों के पास उनके डेस्क पर एक टच स्क्रीन डिवाइस भी स्थापित होगा जो उन्हें बिल, बजट, सदस्यों द्वारा उठाए गए प्रश्नों और ट्रेजरी बेंच से प्राप्त उत्तरों सहित विभिन्न दस्तावेजों तक पहुंच की अनुमति देगा।
दो चरणों में प्रभावी होगी ई विधान प्रणाली
विधानसभा सचिवालय भी एक वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग स्टूडियो स्थापित करने की प्रक्रिया में है, जिसके माध्यम से विधायक और अधिकारी अन्य राज्यों में अपने समकक्षों के साथ बातचीत कर सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि ई-विधान प्रणाली को दो चरणों में प्रभावी बनाया जाएगा। चरण 1 में सभी सदस्यों के लिए सभी प्रश्न, नोटिस और रिपोर्ट, बिल प्रबंधन प्रणाली, वेब-कास्टिंग और एक पोर्टल उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल विधायिका पर जोर दिया जाएगा। दूसरा चरण डिजिटल अभिलेखागार, पुस्तकालय स्वचालन और ई-निर्वाचन क्षेत्र पर केंद्रित होगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने मांगा सभी दलों से सहयोग
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने संसदीय व्यवस्था में संवाद और सकारात्मक चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से लोकतंत्र मजबूत होता है। विधान भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सभी दलीय नेताओं ने विधान सभा अध्यक्ष को सदन चलाने में सहयोग देने का आश्वासन दिया। संसदीय कार्य मंत्री ने सभी दलीय नेताओं को आश्वस्त किया कि सरकार पूरी गम्भीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ सदन में प्राप्त मा० सदस्यों के प्रस्तावों को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने, विकास की योजनाओं को नई गति देने और उसे आगे बढ़ाने के लिए तत्परतापूर्वक कार्य करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाही के लिए प्रतिबद्ध है।
ई विधान लागू करने वाला तीसरा प्रदेश
विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि समय की जो मांग है उस परिपेक्ष्य में उत्तर प्रदेश विधान सभा ई-विधान लागू करने वाला देश का तीसरा प्रदेश होगा। सभी सदस्यों को वरिष्ठता के आधार पर सीट आवंटन के आशय से दलीय नेताओं से विचार-विर्मश किया गया। प्रश्नों को सदन में लगाए जा रहे स्क्रीन पर दिखाये जाने के साथ ही प्रश्नों के सापेक्ष अनुपूरक प्रश्नों एवं मा0 सदस्यों को ई-विधान के प्रशिक्षण सहित यूट्यूब सोशल मीडिया एवं सत्र की कार्यवाही के सजीव प्रसारण पर भी चर्चा की गई।












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