अयोध्या-मथुरा-काशी विश्वनाथ मंदिर सीट को लेकर बढ़ी BJP की टेंशन, जानिए इसकी वजहें
लखनऊ, 4 मार्च: उत्तर प्रदेश में चुनाव अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। सातवें और अंतिम चरण का चुनाव सात मार्च को होना है। बीजेपी जहां इस बार सत्ता में वापसी का जोर लगा रही है वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी उसे घेरने में पूरी तरह से जुटा हुआ है। बीजेपी के लिए इस चुनाव में काशी, मथुरा और अयोध्या की सीटें खास हो गई हैं। पिछली बार तीनों सीटें बीजेपी ने आसानी से जीत ली थीं लेकिन इस बार दावा है कि बीजेपी की स्थिति इन तीनों सीटों पर पतली है। इनमें से दो सीटों मथुरा और काशी में योगी के मंत्रियों की किस्मत दांव पर लगी है तो दूसरी ओर अयोध्या में प्रत्याशी को लेकर लोगों की नाराजगी बीजेपी पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। हालांकि ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो दस मार्च को मतगणना के बाद पता चलेगा लेकिन इस खबर ने बीजेपी के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।

अयोध्या में प्रत्याशी की नाराजगी बीजेपी पर भारी
काशी के अलावा अयोध्या सीट को लेकर बीजेपी की मुश्किल बढ़ती दिखायी दे रही है। यहां के बीजेपी के प्रत्याशी के प्रति नाराजगी की वजह से विपक्ष यह दावा कर रहा है कि वह इस सीट को इस बार बीजेपी से छीन लेगा। बीजेपी ने यहां से सीटिंग विधायक वेद प्रकाश गुप्ता को टिकट दिया है। बताया जा रहा है कि इनको लेकर जनता के बीच नाराजगी ज्यादा थी। इनके मुकाबले के लिए सपा ने यहां से ब्राह्मण उम्मीदवार पवन पांडेय को मैदान में उतारा है। कुल मिलाकर इस सीट पर इस बार लड़ाई कांटे की है। अयोध्या में वर्षों से सियासत को करीब से देखते आ रहे वरिष्ठ पत्रकार वीएन दास कहते हैं, मतदाता बहुत जागरूक हो गया है। वह किसी के पक्ष में खुलकर सामने नहीं आ पा रहा है। इसीलिए भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पिछली बार बीजेपी ने यहां से पांचों सीटों पर कब्जा जमाया था लेकिन इस बार दो सीटों पर तगड़ी लड़ाई दिख रही है जो सपा के खाते में जा सकती हैं।

मथुरा की सीट पर है कांटे का मुकाबला
काशी और अयोध्या के बाद तीसरी धार्मिक नगरी मथुरा की करें तो यहां की सीट भी फंसी हुई है। यहां से मंत्री श्रीकांत शर्मा को लेकर स्थानीय लोग काफी नाराज थे। हालांकि ऐन वक्त पर बीजेपी के ही एक बागी उम्मीदवार के खड़े होने से स्थिति कुछ बदली लेकिन यहां कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप माथुर शर्मा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। परिणाम किसी के पाले में जा सकता है। मथुरा के पत्रकार पवन कुमार कहते हैं कि अंतिम समय में बीजेपी के ही एक बागी के मैदान में आने से बीजेपी को थोड़ी राहत मिल गई। इससे वोटों का विखराव हो गया । इसका लाभ बीजेपी को मिल सकता है। हालांकि यह कहना अभी कठिन है कि जीत किसकी होगी।

काशी में क्या टूटेगा 32 सालों का रिकॉर्ड
काशी विश्वनाथ मंदिर है से जुड़ी सीट 32 सालों से भाजपा जीत रही है। इस बार भाजपाई भी कहने की स्थिति में नहीं है कि क्या होगा? दरअसल, 2017 में जीते नीलकंठ तिवारी इस बार भी भाजपा के उम्मीदवार हैं। योगी सरकार में पर्यटन मंत्रालय संभाला। लोगों की सबसे बड़ी नाराजगी इनका पिछले 5 साल क्षेत्र में नहीं दिखना है। दो दिन पहले वीडियो जारी कर इन्होंने माफी मांगी। बोले- व्यस्तता के कारण लोगों से थोड़ी दूरी रही। गलती के लिए माफी मांगता हूं।

खास है शहर दक्षिणी विधानसभा सीट
विश्वनाथ मंदिर वाली इस सीट पर पेशे से अधिवक्ता डॉ. नीलकंठ तिवारी और श्री महामृत्युंजय महादेव मंदिर के महंत कामेश्वर दीक्षित उर्फ किशन दीक्षित आमने सामने हैं। इस सीट की दो खास पहचान हैं। पहली खास बात यह है कि यहां 1989 से लगातार भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। दूसरी विशेष बात यह है कि यहां बीते साल दिसंबर महीने में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण हुआ था। प्रत्याशी तो यहां 11 हैं, लेकिन मुख्य लड़ाई भाजपा और सपा के बीच मानी जा रही है। भाजपाइयों का कहना है कि 4 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब रोड शो करेंगे तो पासा पलट जाएगा। वहीं, सपाइयों का दावा है कि हमारे नेता अखिलेश यादव और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को तय कर दिया है कि जीत हमारे ही प्रत्याशी की होनी है।

सपा ने उतारा महंत परिवार से प्रत्याशी
शहर दक्षिणी विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 3 लाख 23 हजार 470 है। इन मतदाताओं में सबसे ज्यादा संख्या ब्राह्मणों की है। इसके अलावा, मुसलमान, कायस्थ, बंगाली, वैश्य, यादव और खत्री मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं। सपा ने तृणमूल कांग्रेस के समर्थन के साथ ही SBSP सहित अन्य दलों के गठबंधन के बाद शहर दक्षिणी विधानसभा से दारानगर स्थित महामृत्युंजय मंदिर के महंत परिवार के सदस्य किशन दीक्षित को प्रत्याशी बनाया है। दावा है कि ब्राह्मण, यादव, मुस्लिम, बंगाली और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के सहारे उन्हें जीत हासिल होगी।
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