यूपी: शिक्षक को ही नहीं पता कि शिक्षक दिवस मनाया क्यों जाता है, देखें वीडियो
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हापुड़। भारत देश में 5 सितम्बर को डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है और उन्हें याद किया जाता है। डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव तिरुतनी में हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरा स्वामी और माता का नाम सीताम्मा था। चलिए हमें तो इतना पता था लेकिन क्या उन टीचरों को भी इतना पता है, जो स्कूलों में शिक्षक दिवस मनाते है, क्या उनको ये पता है की डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के माता-पिता का क्या नाम है उनका जन्म कब और कहा हुआ और वो कौन से राष्ट्रपति बने थे। इस बात से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली किस स्तर की है। ऐसे मामले ज्यादातर गांवों के प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालयों में ही नजर आते हैं। ये मामला यूपी के हापुड़ जिला का है।

ये शिक्षक कैसे संवारेंगे बच्चों का भविष्य
हम ये मानकर चलते हैं कि शिक्षक ज्ञान का रूप होता है और होना भी चाहिए क्योंकि सैंकड़ों बच्चों की भविष्य एक शिक्षक के हाथ में ही होता है। बच्चे जो भी पढ़ेंगे वही तो सीखेंगे। लेकिन अफसोस सारे शिक्षक ऐसे नहीं होते। ये हम ऐसे नहीं कह रहे हैं बल्कि सबूत के साथ कह रहे हैं। इसके लिए यूपी के हापुड़ में टीचरों का रियलिटी चेक किया गया। जिसमें टीचरों को ये तक नहीं पता कि देश के राष्ट्रपति कौन है, शिक्षा मंत्री कौन है, जिनके जन्मदिवस पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है, उन डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्म कहा हुआ, उनकी माता -पिता का क्या नाम था इतना ही नहीं अपने जिले के जिलाधिकारी तक का नाम बताने में भी ये शिक्षक अटक गए। शिक्षक दिवस पर हुए इस रियलिटी चेक ने हापुड़ में सरकारी टीचरों की पोल ही खोल कर रख दी है।
जो बताया भी वह किताब में देख कर
जब हमारे रिपोर्टर ने अध्यापिका से पूछा की डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म कब और किस वर्ष में हुआ तो कैसे कुछ नहीं बता पाई। और जो थोड़ बहुत बताया भी उसके लिए किताब सामने थी। शिक्षकों के इन जवाबों को सुनकर लगता है कि बच्चों के भविष्य की दुर्दशा के के लिए ये शिक्षक ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि शिक्षक जो सिखाएंगे बच्चे वही तो सीखेंगे।












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