स्वामी प्रसाद मौर्य के बिगड़े बोल, कहा- 'हिंदू नाम का कोई धर्म ही नहीं, यह केवल धोखा है'
Swami Prasad Maurya: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बिगड़े बोल सामने आए हैं। उन्होंने सोमवार को हिंदू धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू नाम का कोई धर्म ही नहीं है। यह एक धोखा है।
उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवाद की जड़े बहुत गहरी है और सारी विषमता का कारण भी ब्राह्मणवाद ही है। हिंदू नाम का कोई धर्म है ही नहीं, हिंदू धर्म केवल धोखा है।

ब्राह्मणवाद की जड़े बहुत गहरी है और सारी विषमता का कारण भी ब्राह्मणवाद ही है। हिंदू नाम का कोई धर्म है ही नहीं, हिंदू धर्म केवल धोखा है। सही मायने में जो ब्राह्मण धर्म है, उसी ब्राह्मण धर्म को हिंदू धर्म कहकर के इस देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को अपने धर्म के मकड़जाल में… pic.twitter.com/351EJeSBlY
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) August 27, 2023
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सही मायने में जो ब्राह्मण धर्म है, उसी ब्राह्मण धर्म को हिंदू धर्म कहकर इस देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को अपने धर्म के मकड़जाल में फंसाने की एक साजिश है। अगर हिंदू धर्म होता तो आदिवासियों का भी सम्मान होता है, दलितों का भी सम्मान होता, पिछड़ों का भी सम्मान होता। लेकिन यह विडंबना है कि हिंदू धर्म केवल धोखा है।
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बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य धार्मिक मामलों पर विवादित बयान देते रहते हैं। इससे पहले वे रामचरित मानस के बाद सुंदरकांड पर विवादित बयान दे चुके हैं। सुंदरकांड को लेकर उन्होंने कहा था कि 97 फीसदी हिंदुओं की भावनाएं इससे आहत होती हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा था कि ढोल, गवार, शुद्र, पशु, नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी। उसी सुंदरकांड का हिस्सा, जिसका सरकार ने पाठ कराने का निर्णय लिया है, यानी सरकार का यह निर्णय महिलाओं व शूद्र समाज को प्रताड़ित व अपमानित करने वाले 3% लोगों का बढ़ावा देने एवं 97% हिंदू समाज के भावनाओं को आहत करने वाला है।
रामचरितमानस पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि संघ प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि जातियां पंडितों ने बनाई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आप पिछड़ी जाति में ही पैदा होने से नीचे होने का दंश झेल चुके हैं। जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव न हो भारतीय संविधान भी कहता है तो क्या अब यह सुनिश्चित करेंगे कि देश की समस्त महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को मानस की आपत्तिजनक टिप्पणी से नित्य प्रति अपमानित न होना पड़े, अस्तु उसे संशोधित या प्रतिबंधित कर इन्हें सम्मान दिलवायेंगे।
नई संसद के उद्घाटन पर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सेंगोल राजदंड की स्थापना पूजन में केवल दक्षिण के कट्टरपंथी ब्राह्मण गुरुओं को बुलाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा सरकार का यदि पंथनिरपेक्ष संप्रभु-राष्ट्र भारत में विश्वास होता तो देश के सभी धर्म गुरुओं यथा- बौद्ध धर्माचार्य (भिक्षुगण), जैन आचार्य (ऋषि), गुरु ग्रंथी साहब, मुस्लिम धर्मगुरु (मौलाना), ईसाई धर्मगुरु (पादरी) आदि सभी को आमंत्रित किया जाना चाहिए था।
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