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लेफ्टिनेंट चरक ने IIT कानपुर में पढ़ाई कर बनाया सोलर रेफ्रिजरेटर, सेना के लिए बहुत काम की चीज

कानपुर। भारतीय सेना के एक अफसर ने आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर ऐसा चलता फिरता रेफ्रिजरेटर तैयार किया है जो सौर उर्जा से चलेगा। इसका इस्तेमाल देश की सीमा पर उन दुर्गम इलाकों में हो सकेगा जहां बिजली न होने से खाने-पीने की वस्तुएं और कोल्ड चेन वाली दवाएं खराब हो जाती हैं।

पोर्टेबल रेफ्रिजरेशन कार्ट

पोर्टेबल रेफ्रिजरेशन कार्ट

आपने अक्सर सड़कों पर खोमचे और ठेलों पर सामान बिकते देखा होगा जिसपर बिक्री के लिये रखी वस्तुएं मौसम की मार के चलते खराब हो जाती हैं। लेकिन आईआईटी, कानपुर की रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग प्रयोगशाला में एक पोर्टेबल रेफ्रिजरेशन कार्ट यानि ठेला तैयार किया गया है जो पूरी तरह से सौर उर्जा से संचालित होगा। इस सोलर रेफ्रिजरेशन को किसी खोमचे पर भी फिट किया जा सकता है। ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में ये ई-कार्ट दवाओं और सब्जियों के लिये जरूरी कोल्ड चेन बनाकर रखने में भी मददगार सबित होगा।

दुर्गम इलाके में सेना को मिलेगी मदद

दुर्गम इलाके में सेना को मिलेगी मदद

दरअसल ये ई-खोमचा लेफ्टिनेन्ट कर्नल अखिल सिंह चरक की कोशिशों का नतीजा है। जम्मू कश्मीर के रहने वाले अखिल सिंह की सैन्य टुकड़ी को दुर्गम इलाके में तैनाती मिली थी। चरक ने पाया कि बिजली न होने से ग्रामीणों को कोल्ड चेन वाली दवाएं लेने दूर जाना पड़ता था और जीवन रक्षक दवाएं समय से न मिलने पर अक्सर लोगों की मौत हो जाती थी। कई कृषि उत्पाद भी बिना कोल्ड चेन जल्दी खराब हो जाते थे। सैनिकों के खान-पान के सामान भी इसी वजह से खराब होना आम बात थी। पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने उन्हें आईआईटी, कानपुर से एमटेक करने भेजा तो उन्होने इस समस्या के समाधान के लिये सौर चलित रेफ्रिजरेटर पर शोध करना शुरू कर दिया। उनकी आठ महीने की मेहनत रंग लायी और ई-कार्ट का पायलट प्रोजेक्ट कामयाब रहा।

मोदी सरकार से मदद की उम्मीद

मोदी सरकार से मदद की उम्मीद

लेफ्टिनेन्ट चरक के साथ सहयोगी रहे आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानकों को उम्मीद है कि ये ई-कार्ट मोदी सरकार की मदद मिलने पर बाजार में जल्दी ही लॉन्च हो सकता है। एक ई-कार्ट की लागत लगभग पचास हजार रूपये होगी। इस मोबाइल सिस्टम का उपयोग भारतीय सेना द्वारा भी किया जा सकता है। इस कार्ट में सोलर पेनल, बैटरी, एक डीसी आपरेटर कंप्रेसर, चार्ज कंट्रोलर तथा एनर्जी मीटर लगे हुए हैं। सोलर पैनल से सूर्य की रोशनी को सीधे रेफ्रिजरेटर में पड़ने से रोका जाता है। पैनलों को इस तरह से लगाया गया है कि अधिकतम सूर्य रोशनी को प्राप्त किया जा सकता है तथा बैटरी का बैकअप 24 घंटे से अधिक है। वर्तमान में 240 लीटर के इस रेफ्रिजरेटर से माइनस 12 डिग्री तापमान प्राप्त किया जा सकता है। डब्लूएचओ के मानकों के मुताबिक कोल्ड चेन वाली दवाओं को माइनस 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना होता है इस तरह ये ई-कार्ट इस मानक को भी पूरा करता है।

अलग-अलग मौसम में किया गया परीक्षण

अलग-अलग मौसम में किया गया परीक्षण

आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मौसम में इसका परीक्षण किया गया है तथा अगले चरण में कुछ वांलियटियर की मदद से पायलट लेवल डाटा प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा और स्ट्रीट वेन्डरों से फीडबैक के आधार पर इस सिस्टम में सुधार किया जाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस ई-कार्ट के बड़े पैमाने पर इससे लाखों की संख्या में रोजगार सृजित होंगें तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्याधिक मददगार साबित होगा।

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