शिवपाल सिंह यादव से मिलने घर पहुंचे ओवैसी, राजभर और आजाद, यूपी चुनाव से पहले तेज हुई सियासी हलचल
लखनऊ, 30 सितंबर: 2022 में उत्तर प्रदेश के अंदर विधानसभा चुनाव होने है, जिसको लेकर सियासी हलचल तेजी से बढ़ने लगी है। वहीं, छोटे-छोटे राजनीतिक दल भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में 29 सितंबर को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर छोटे-छोटे दलों का जमावड़ा लगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सियासी मुद्दों को लेकर इनके बीच करीब घंटे भर चर्चा हुई।
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आपको बता दें कि इससे पहले प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने इटावा में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि हमारी प्राथमिकता समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की है। हमने सपा के साथ गठबंधन के सारे प्रयास कर लिए है अब इंतजार पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के जवाब का है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन के लिए हमारी पार्टी इंतजार कर रही है। अगर सपा की ओर से कोई जवाब नहीं मिला तो हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा से चुनाव लड़ेगी। इस दौरान शिवपाल सिंह यादव ने कहा था कि वो अखिलेश यादव के जवाब का 11 अक्टूबर तक इंतजार करेंगे।
तो वहीं, अब 29 सितंबर की शाम करीब छह बजे शिवपाल सिंह यादव के आवास पर एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद पहुंचे गए। इन के बीच विस चुनाव को लेकर कई घंटे बातचीत हुई है और गठबंधन पर मंथन हुआ। हालांकि, गठबंधन में किसको कितनी सीटें जाएंगी इस पर भी चर्चा हुई। हालांकि अभी तक गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। वहीं, शिवपाल के आवास पर तीन पार्टियों के अध्यक्ष के पहुंचने को सियासी नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।
बीजेपी के चुनावी रथ को रोकने के लिए जुटे सभी दल
विस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के चुनावी रथ को रोकने के लिए सभी दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। तो वहीं, बीजेपी ने अपना दल, निषाद पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा कर दी है। तो गठबंधन को लेकर सपा, कांग्रेस ने भी अन्य छोटे दलों के लिए अपने दरवाजे खोले हैं, जबकि पिछले चुनाव में भाजपा के सहयोगी रहे सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने छोटे दलों को मिलाकर भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाया है। वह अपनी मंशा स्पष्ट कर चुके हैं कि कैसे भी भाजपा को हारना है। उनकी इस मुहिम में ओवैसी कई महीने से हाथ मिलाकर चल रहे हैं।












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