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शिवपाल चल चुके हैं बड़ी चाल: भाजपा में नहीं जाएंगे, जानिए आजम को क्यों दिया ये बड़ा ऑफर

लखनऊ, 23 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) के अध्यक्ष शिवपाल यादव ने अब भतीजे अखिलेश यादव के साथ ही बड़े भाई और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर भी हमले बोलना शुरू कर दिया है। शिवपाल शुक्रवार को सीतापुर जेल गए थे आजम से मिलने के लिए। उन्होंने आजम से मुलाकात के बाद मुलायम और अखिलेश पर आरोप लगाया कि वो नहीं चाहते कि आजम जेल से बाहर आएं। वहीं दूसरी ओर सूत्रों के मुताबिक शिवपाल ने आजम को PSP में शामिल होने का ऑफर दिया है। इससे शिवपाल ने एक साथ कई निशाने साधे हैं। पहला यह कि यदि आजम ने उनका आफर स्वीकार कर लिया तो उनको एक बड़ा मुस्लिम चेहरा मिल जाएगा। दूसरा यह कि यदि आजम अखिलेश का साथ छोड़कर शिवपाल के साथ आते हैं तो अखिलेश का संगठन और कमजोर होगा और उन्हें मुस्लिमों का विश्वास जीतना आसान नहीं होगा।

आज़म को शिवपाल ने दिया PSP में शामिल होने का ऑफर

आज़म को शिवपाल ने दिया PSP में शामिल होने का ऑफर

सूत्रों की माने तो शिवपाल यादव अब पूरी तरह से बगावत के मूड में हैं और वह अपनी बेइज्जती के बाद अब अखिलेश और मुलायम सिंह यादव को कमजोर करने में जुट गए हैं। मुलायम सिंह यादव के प्रति शिवपाल का मोहभंग होना शिवपाल के राजनीतिक करियर का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। शिवपाल हमेशा ही मुलायम का सम्मान करने के लिए जाने जाते रहे हैं और ऐसा कहा जाता है कि मुलायम की सरकार बनवाने में बाहुबलियों का समर्थन लेने के लिए हर समय शिवपाल ने आगे बढ़कर काम किया लेकिन बदले में उन्हें अपमानित करने के सिवाय कुछ नहीं मिला। इसी से खिन्न होकर उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई थी और अब उन्हेांने आजम को पीएसपी में शामिल होने का ऑफर पकड़ाया है।

आजम और शिवपाल के बाद दोनों के बेटे संभालेंगे PSP की कमान

आजम और शिवपाल के बाद दोनों के बेटे संभालेंगे PSP की कमान

सूत्र यह भी बता रहे हैं कि शिवपाल ने आजम से कहा है कि आप पीएसपी में शामिल हो जाइए। मैं बीजेपी में नहीं जाउंगा। हम यूपी में एक बेहतर विकल्प के तौर पर खड़े हो सकते हैं। पीएसपी में आजम के आने से उसे मुस्लिमों का साथ मिल जाएगा और यादवों और ओबीसी में शिवपाल की पहले से ही अच्छी पकड़ है। साथ ही माहौल बनने पर कई बड़े नेता इस कतार में खड़े हो सकते हैं और यूपी में पीएसपी को और मजबूती मिल सकती है। शिवपाल ने आजम को यह भी समझाने की कोशिश की है कि उनके बाद आजम के बेटे अब्दुल्ला आजम और आदित्य यादव पीएसपी की राजनीति को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। इससे बेटों को भी एक विकल्प मिल जाएगा।

शिवपाल ने अब मुलायम पर भी निशाना साधना शुरू कर दिया

शिवपाल ने अब मुलायम पर भी निशाना साधना शुरू कर दिया

दरअसल शिवपाल यादव ने इस बार अंतिम चाल चली है वह जानबूझकर चली है। शिवपाल जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव का विरोध करने का मतलब क्या है। शिवपाल ने यह आरोप लगाया है कि जिस मुलायम सिंह के पीएम मोदी से और बीजेपी से अच्छे रिश्ते हैं वो आजम को जेल से निकलवाने में क्यों नहीं कामयाब हुए। क्यों उन्होंने इसके लिए कभी पहल की। वह चाहते तो आजम बाहर सकते थे। राजनतीक पंडितों की माने तो इस सियासी उठापटक के बीच बीजेपी सरकार आजम को जेल से रिहा करने का दांव भी खेल सकती है। क्योंकि शिवपाल का झुकाव बीजेपी की तरफ है इसलिए आजम की रिहाई बीजेपी की अखिलेश को कमजोर करने की रणनीति में मदद करेगी। आश्चर्य नहीं हो कि आजम खान आने वाले दिनों में जेल से बाहर दिखाई दें।

शिवपाल की पकड़ यादव और ओबीसी वोटर्स में अधिक

शिवपाल की पकड़ यादव और ओबीसी वोटर्स में अधिक

समाजवादी पार्टी को खड़ी करने के लिए यदि किसी ने मुलायम सिंह यादव के बाद सबसे ज़्यादा संघर्ष किया किया तो वह शिवपाल यादव हैं। जब उन्होंने सपा छोड़ी थी तब उनके साथ कई बड़े नेताओं ने सपा का साथ छोड़ दिया था। इसमें अंबिका चौधरी, नारद राय, विजय मिश्रा और शादाब फातिमा जैसे बड़े नेता शामिल थे। चुनाव में शिवपाल अखिलेश के साथ इसी लालच में खड़े हुए थे कि वह अपने और अपने साथियों को टिकट दिलाने में कामयाब हो जाएंगे लेकिन अखिलेश के सामने उनकी नहीं चली। उन्हें केवल एक सीट से ही संतोष करना पड़ा। चूंकि शिवपाल का अनुभव और पकड़ ज्यादा है इसलिए वह आजम के साथ एक बेहतर मोर्चा बनाकर अखिलेशको कमजोर करने का काम कर सकते हैं और यही बीजेपी चाहती भी है।

आज़म की मदद से मुस्लिम को साधने में मिलेगी मदद

आज़म की मदद से मुस्लिम को साधने में मिलेगी मदद

दरअसल शिवपाल यादव को पता है कि सिर्फ अकेले दम पर पार्टी को चलाना आसान नहीं है। ऐसा करके वह देख चुके हैं। उन्होंने पार्टी तो बना ली लेकिन वह एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाए क्योंकि उन्हें अन्य वर्गों में उस तरह का समर्थन नहीं मिला। शिवपाल की कोशिश है कि आजम को अपने साथ रखकर अल्पसंख्यकों को अपने साथ जोड़ा जाए और यदि यूपी की सबसे बड़ी आबादी वाला तबका जो करीब 20 फीसदी वोटर है, अगर वह आजम के नाम पर पीएसपी के साथ खड़ा होता है तो यह अखिलेश के लिए बड़ा नुकसान होगा। दूसरी ओर भाजपा के सूत्रों की माने तो वह भी शिवपाल को पार्टी में शामिल नहीं कराना चाहती है। क्योंकि इसका उसे कुछ फायदा नहीं होगा। हां अगर शिवपाल अकेले मोर्चा खोलते हैं तो जरूर अखिलेश कमजोर होंगे। शिवपाल अपनी इस पार्टी के जरिए आजम के बाद रालोद, भीम आर्मी को भी जोड़ने की कोशिश कर सकते हैं।

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