Muslim फैमिली की 'घर वापसी' से UP में भूचाल! Haj Yatra के वक्त शहजाद क्यों बना 'शंकर'? रजिया बनी 'सावित्री'
Uttar Pradesh Saharanpur Muslim Family Converts Hinduism Reason: उत्तर प्रदेश के सबसे संवेदनशील जिले सहारनपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां का एक मुस्लिम परिवार 21 अप्रैल 2026 को हरिद्वार के नमामि गंगे घाट (ब्रह्म कुंड) पर हिंदू धर्म में शामिल हो गया। परिवार के मुखिया मोहम्मद शहजाद अब शंकर बन गए, उनकी पत्नी रजिया सावित्री बन गईं। बेटे का नाम रुद्र और बेटियों के नाम रुक्मिणी व दिशा रखे गए।
नमामि गंगे घाट पर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शुद्धिकरण, गंगा स्नान, हवन और जनेऊ संस्कार हुआ। कई संतों की मौजूदगी में परिवार के पांचों सदस्यों ने सनातन धर्म अपनाया। शहजाद (अब शंकर) घाट किनारे अपने गुरु अरुण किशन महाराज के पैर चूमते नजर आए। संतों ने इसे 'घर वापसी' करार दिया, जबकि परिवार ने साफ कहा - 'यह बिना किसी दबाव या प्रलोभन के व्यक्तिगत आस्था का फैसला था।'

यह घटना Haj Yatra के मौसम में हुई है, जब लाखों मुसलमान हज के लिए सऊदी अरब जा रहे हैं। ऐसे में सहारनपुर जैसे जिले से एक पूरा परिवार सनातन में लौटना न सिर्फ व्यक्तिगत, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। अब सवाल ये उठता है कि क्यों बदला धर्म? क्या है पीछे की वजह? और कौन है ये परिवार?
Saharanpur Muslim Family Converted To Hindi Reason: सहारनपुर का मुस्लिम परिवार क्यों बना हिंदू?
मोहम्मद शहजाद सहारनपुर जिले के निवासी हैं। उन्होंने खुद बताया कि बचपन से ही पूजा-पाठ करता था। नमाज नियमित रूप से नहीं पढ़ता था। समय के साथ महसूस हुआ कि यह मेरा सही रास्ता नहीं है। उनके गुरु अरुण किशन महाराज के अनुसार, शहजाद पिछले कई महीनों से सनातन धर्म अपनाने की इच्छा जता रहे थे। जब पत्नी रजिया और तीन बच्चे (एक बेटा, दो बेटियां) पूरी तरह सहमत हुए, तब हरिद्वार का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
परिवार ने जोर देकर कहा कि यह फैसला पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया। शहजाद (शंकर) ने कहा, 'मुझे सनातन में विश्वास था, इसलिए परिवार के साथ यह कदम उठाया।'
Haridwar Ghat Vedic Rituals: हरिद्वार घाट पर वैदिक विधि-विधान की पूरी तस्वीर
- 21 अप्रैल 2026 को नमामि गंगे घाट पर कार्यक्रम हुआ।
- शुद्धिकरण: परिवार के पांचों सदस्यों को गंगा जल से शुद्ध किया गया।
- गंगा स्नान: ब्रह्म कुंड में आस्था की डुबकी लगाई गई।
- हवन और जनेऊ: मंत्रोच्चारण के बीच हवन हुआ, फिर जनेऊ संस्कार पूरा किया गया।
- नामकरण: मोहम्मद शहजाद से शंकर, रजिया बनी सावित्री, बेटे का नाम अब रुद्र, बेटियों की पहचान अब रुक्मिणी और दिशा।
संतों का दावा: 'भारत का हर मुसलमान पहले हिंदू था'
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख संतों ने इसे 'घर वापसी' बताया:
- स्वामी प्रबोधानंद महाराज: 'भारत का हर मुसलमान पहले हिंदू ही था। सभी को घर वापसी करनी चाहिए। हज पर जाने वाले मुसलमानों को वहां हीन दृष्टि से देखा जाता है।'
- स्वामी राम विशाल दास: 'इस्लाम अत्याचार, दुराचार के दम पर फैला। शहजाद को पूर्वजों पर हुए अत्याचार का पता था। यह घर वापसी है, न कि धर्मांतरण।'
संतों ने स्पष्ट किया कि यह किसी दबाव का परिणाम नहीं है। स्वामी प्रबोधानंद ने आह्वान किया, 'हर मुसलमान को मूल धर्म में लौटना चाहिए।'
परिवार के दिल की बात: 'नमाज नहीं पढ़ता था, सनातन की ओर झुकाव बचपन से'
शहजाद (शंकर) ने कहा कि मैं नमाज नहीं पढ़ता था। सनातन की ओर झुकाव बचपन से था।' रजिया (सावित्री) और बच्चे भी पूरी तरह सहमत थे। परिवार ने दावा किया कि यह फैसला बिना किसी बाहरी प्रभाव के लिया गया।
Saharanpur Religious: सहारनपुर धार्मिक संतुलन
- सहारनपुर UP का सबसे संवेदनशील जिला माना जाता है। Census 2011 के अनुसार:
- कुल आबादी: 34.66 लाख
- हिंदू: 56.74% (लगभग 19.66 लाख)
- मुस्लिम: 41.95% ( लगभग 14.54 लाख)
देवबंद यहां का विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक केंद्र है (दारुल उलूम देवबंद, 1866)। 2017 में यहां जातीय-सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। चुनावी राजनीति में ध्रुवीकरण का केंद्र रहता है। ऐसे में एक मुस्लिम परिवार का हिंदू धर्म अपनाना यहां की सांप्रदायिक संतुलन की बहस को नई दिशा देता है।
Haridwar 'Ghar Wapsi': हरिद्वार के घर वापसी का बड़ा केंद्र?
यह पहला मामला नहीं। कुछ दिन पहले बिजनौर से 'एक्स-मुस्लिम पदयात्रा' हरिद्वार पहुंची थी। संत राम विशाल दास ने कहा था कि इस्लाम छोड़ चुके लोगों का डर खत्म करना है। उन्हें सुरक्षा और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।'
हरिद्वार के ब्रह्म कुंड को 'शुद्धि आंदोलन' का केंद्र बनाया जा रहा है। संतों ने बताया कि कई अन्य परिवार संपर्क में हैं। अगला कार्यक्रम जल्द होने की संभावना है। पहले चित्रकूट, मुजफ्फरनगर आदि में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं।
Ghar Wapsi आंदोलन का संदर्भ
'घर वापसी' 2014 के बाद चर्चा में आया। RSS और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन इसे 'मूल धर्म में लौटना' बताते हैं। उनका तर्क है कि कई मुस्लिम परिवार ऐतिहासिक कारणों से धर्म बदल गए थे। आलोचक इसे 'धर्मांतरण'(Religious Conversion) कहते हैं। इस मामले में परिवार और संत दोनों स्वेच्छा पर जोर दे रहे हैं। अभी तक कोई कानूनी विवाद या विरोध की खबर नहीं आई।
क्या कहता है कानून और समाज?
भारत में अनुच्छेद 25 के तहत धर्म स्वतंत्रता है। वयस्क व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदल सकता है। बच्चों के मामले में अभिभावक का फैसला मान्य होता है। यूपी और उत्तराखंड में धर्मांतरण कानून हैं, लेकिन स्वेच्छा वाले मामलों में अलग प्रक्रिया है। सोशल मीडिया पर यह घटना तेजी से वायरल हो रही है। कुछ इसे 'सनातन की जीत' बता रहे हैं, कुछ सवाल उठा रहे हैं। परिवार ने बार-बार कहा कि बिना दबाव का फैसला।
आस्था का व्यक्तिगत फैसला या सामाजिक संदेश?
सहारनपुर का यह परिवार आज सनातन धर्म में शामिल हो गया। हज यात्रा (Haj Yatra) के मौसम में शहजाद-शंकर, रजिया-सावित्री और बच्चों ने गंगा में डुबकी ली, जनेऊ पहना और नया नाम अपनाया। संत इसे 'घर वापसी' कह रहे हैं, परिवार इसे 'आस्था का रास्ता'।
हरिद्वार जैसे पवित्र स्थल पर ऐसे कार्यक्रम बढ़ रहे हैं। सहारनपुर की 40% से ज्यादा मुस्लिम आबादी और संवेदनशील इतिहास को देखते हुए यह घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। क्या यह व्यक्तिगत आस्था है या बड़े आंदोलन की शुरुआत? समय बताएगा। लेकिन एक बात साफ है कि भारत में हर नागरिक को अपनी आस्था चुनने का अधिकार है। परिवार की इस 'घर वापसी' ने सनातन धर्म की बहस को फिर से गर्म कर दिया है।












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