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Safai Karmchari UP: 2024 में 1 लाख सफाई कर्मचारी देंगे बीजेपी के 'मिशन 80' को झटका?

यूपी सरकार ने एक लाख सफाई कर्मचारियों को तगड़ा झटका दिया है। सरकार ने सफाइकर्मियों की पदोन्नति की मांग को नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है।

Uttar Pradesh Safai Karmchari: देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। एक तरफ बीजेपी यूपी में मिशन 80 को लेकर अपनी तैयारी में जुटी है वहीं दूसरी ओर राज्य के lसफाई कर्मचारी सरकार के नीतियों से नाराज होकर आंदोलन के लिए मजबूर हो रहे हैं। कर्मचारियों की नाराजगी आने वाले समय में बीजेपी के मिशन पर भारी पड़ सकती है। हालांकि मामले की अहम सुनवाई 15 जुलाई को अदालत में होनी है।

इन मुद्दों को लेकर पहले ही बैकफुट पर है सरकार

इससे पहेल शिक्षा मित्रों की मांग, फिर पुरानी पेंशन बहाली को मांग को लेकर सरकार बैकफुट पर आ चुकी है। अब एक लाख सफाई कर्मचारियों का विरोध सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। हालांकि सरकार इसका सर्वमान्य हल तलाशने में जुटी हुई है।

योगी

दरअसल यूपी के पंचायती राज विभाग ने सफाईकर्मियों की पदोन्नति की मांग को अस्वीकर कर दिया है। इससे सफाईकर्मी बेहद नाराज हैं। सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर विभाग ने एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था जिसे शासन स्तर पर खारिज कर दिया गया है। इस प्रस्ताव को खारिज करने के पीछे शासन ने अपनी मजबूरी जाहिर की है।

मायावती के समय में हुई थी सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति

दरअसल, वर्ष 2008 में राजस्व ग्राम स्तर पर चतुर्थ श्रेणी संवर्ग में सफाईकर्मियों की नियुक्ति मायावती के समय में की गई थी। इसके तहत एक लाख से अधिक पद सृजित किए गए थे। उस समय इस भर्ती को लेकर शैक्षिक योग्यता भी तय की गई थी। संगठन की तरफ से पिछले एक दशक से पढ़े लिखे यवाओं के प्रमोशन को लेकर अभियान चला रहा था।

विभाग के प्रस्ताव को शासन ने किया खारिज

पंचायती विभाग के सूत्रों की माने तो कर्मचारियों की इस मांग को लेकर प्रस्ताव विभाग की तरफ से शासन को भेजी गई थी। विभाग की तरफ से यह एक अच्छी पहल थी। लेकिन शासन की ओर से जब तक कोई फैसला आता कुछ सफाईकर्मी अदालत चले गए जिसकी वजह से अधिकारियों में नाराजगी पैदा हो गई क्योंकि वो कोर्ट की अवमानना के दायरे में आ गए।

दबाव की राजनीति से नाराज हुए अफसर

सूत्रों की माने तो सफाई कर्मचारियों की दबाव की राजनीति से अफसर नाराज हो गए और फिर उन्होंने कई नियमों का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया। यह फैसला पंचायती राज विभाग की तरफ से मई में ही ले लिया गया था जो अब सामने आया है।

एक सफाई कर्मचारी नेता ने बताया कि,

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान इन मांगों को लेकर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया गया था। वादे के अनुसार ही चुनाव समाप्त होने के बाद 20 प्रतिशत पदोन्नति को लेकर नया प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। लेकिन अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया है।

हम अदालत में रखेंगे अपना पक्ष

सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष क्रांति सिंह ने कहा कि,

सफाई कर्मचारी यदि साक्षर है तो उसे बीएलओ कैसे बना दिया जाता है। यदि वह साक्षर है चुनाव अधिकारी द्वितीय कैसे बना दिया जाता है। बड़े अधिकारियों के कार्यालयों में कम्पयूटर का काम भी सफाई कर्मचारी करता है। जबकि हाईकोर्ट का आदेश है कि सफाई कर्मचारी संबंद्ध नहीं होगा लेकिन 15 हजार लोग अटैच किए गए हैं। यूपी में करीब 1100 कर्मचारियों की मौत हो गई लेकिन उनके आश्रितों को नौकरी क्यों नहीं दी गई। यह बड़ा सवाल है। अभी कुछ बोलना सही नहीं है। अगली सुनवाई 15 जुलाई को होनी है जहां दोनों पक्ष अपनी बात कहेंगे।

कर्मचारियों की नाराजगी बीजेपी के लिए जोखिम

गौरतलब है कि एक लाख सफाई कर्मचारियों की नाराजगी बीजेपी को लोकसभा चुनाव में भारी पड़ सकती है। कर्मचारी एकजुट हुए तो उनको संभालना बीजेपी और सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है। इससे पहले ही विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षा मित्र अपना मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे जबकि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी बीजेपी को नुकसान पहुंचा चुका है।

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