योगी आदित्यनाथ को हराने के लिए बुआ-बबुआ के साथ आया पूर्व पीएम का बेटा
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में सपा और बसपा के बीच डील पक्की होने के बाद राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने भी अखिलेश यादव को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। पार्टी के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने कहा कि उन्होंने विपक्ष की एकता को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया है। रालोद अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने किसानों के साथ वादाखिलाफी की है। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सपा को समर्थन देने की बात कही है।

रालोद का दावा- समर्थन से बुलंद से किसानों की आवाज
यूपी उपचुनाव के संबंध में रालोद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल दुबे का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि यूपी उपचुनाव में अखिलेश यादव को उनकी पार्टी का समर्थन किसान और नौजवान विरोधी ताकतों का सफाया करने का काम करेगा। इससे प्रदेश में किसानों, मजदूरों और कमजोर तबके के लोगों की आवाज बुलंद होगी।

11 मार्च को होना है यूपी में मतदान
इससे पहले रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने मीडिया से बातचीत में ऐलान किया था कि वह यूपी उपचुनाव में बीजेपी को कराने की क्षमता वाले उम्मीदवार का समर्थन करेंगी। इसके बदले में सपा राज्यसभा चुनाव में उनकी मदद करेगी। बसपा उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारती है। यही कारण है कि मायावती ने सपा प्रत्याशी के समर्थन का ऐलान किया है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर 11 मार्च को मतदान होना है और नतीजे 14 मार्च को आएंगे। इसके बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

इस वजह से साथ आए बुआ-बबुआ
गठबंधन के सवाल पर सफाई देते हुए मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सपा और बसपा के बीच अगर गठबंधन होगा तो गुपचुप तरीके से नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि फूलपुर और गोरखपुर में उपचुनाव हो रहे हैं। हमेशा की तरह बसपा ने इन चुनावों में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम वोट डालने नहीं जाएंगे। हम वोट डालने जाएंगे, इसके लिए पार्टी के लोगों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं। मायावती ने आगे बताया कि यूपी में जल्द ही राज्यसभा चुनाव होना है। सपा और बसपा दोनों के पास पर्याप्त नहीं हैं। राज्यसभा चुनाव में सपा अपना वोट बसपा को ट्रांसफर करेगी। उन्होंने बताया कि हमारी पार्टी में अभी इतने विधायक नहीं हैं कि हम अपना सदस्य चुनकर राज्यसभा भेज सकें। ना ही समाजवादी पार्टी के पास इतनी ताकत है कि वह अपने दो लोगों को राज्यसभा भेज सके। इसलिए हमने तय किया है कि हम उनका एमएलसी बना देंगे और वो अपने वोट हमें ट्रांसफर कर देंगे, ताकि हम राज्यसभा में अपना सदस्य चुनकर भेज सकें।












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