सीएम योगी के कड़े फैसले के विरोध में बड़े डॉक्टर दे रहे इस्तीफा
योगी सरकार ने सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगा दी है। इसके विरोध में बड़े न्यूरो सर्जन प्रोफेसर एनएन गोपाल ने इस्तीफा दे दिया है।
इलाहाबाद। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के न्यूरो सर्जरी इकाई के प्रभारी प्रो. एनएन गोपाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने योगी सरकार के उस फैसले के विरोध में अपना इस्तीफा दिया जिसके तहत सरकारी डाक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। इस बावत प्रो.एनएन गोपाल पर भी भारी दबाव था कि वह अब अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस बंद करे। लेकिन प्राइवेट प्रैक्टिस में बड़ी संभावना को देखते हुये डॉ गोपाल ने सरकारी पद ही छोड़ दिया। अब वह अपने घर पर निजी तौर पर मरीज देख रहे हैं जहां प्रति मरीज उनकी फीस 200 रूपये है। दिन में सैकड़ों मरीज देख रहे डॉ गोपाल के इस फैसले के बाद मेडिकल कॉलेज के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गयी है क्योंकि जूनियर डॉक्टरों की पढ़ाई से लेकर अस्पताल में मरीजों की सर्जरी सबकुछ ठप हो गई है।

कई और डाक्टर छोड़ सकते हैं नौकरी
प्राइवेट प्रैक्टिस में अकूत धन कमा रहे सरकारी डाक्टरों की एक बड़ी फेहरिस्त इलाहाबाद में है। अगर सरकार ने सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्ती से प्रतिबंध लगा दिया तो आने वाले दिनों में केवल इलाहाबाद से दर्जन भर डाक्टर नौकरी छोड़ देंगे। इसकी वजह साफ है कि सरकारी नौकरी में एक बंधी तनख्वाह है जबकि प्राइवेट प्रैक्टिस में कमाई की कोई लिमिट नहीं है। अगर इस समय की बात करें तो मेडिकल क्षेत्र में इलाहाबाद बहुत तेजी से ग्रोथ कर रहा है और अच्छे डाक्टरों की यहां डिमांड है ।
अब कौन करेगा सर्जरी
इस समय सरकार के समक्ष समस्या यह है कि अब एसआरएन अस्पताल में हेड इंजरी की सर्जरी कौन करेगा। आंकड़ो को देखें तो इलाहाबाद मंडल के सबसे बड़े अस्पताल स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में हेड इंजरी के औसतन प्रतिदिन 20 केस आते हैं। अगर साल भर की बात करें तो यह आंकड़ा 7 हजार के आसपास होता है जिसे डा गोपाल अपनी यूनिट के साथ देखते थे। लेकिन अब उनकी नामौजूदगी में कौन सर्जरी करेगा यह बड़ा सवाल है। क्योकि जो दो चिकित्सक अमित सिंह व .सौरभ दूबे हैं, वह अभी सहायक के तौर पर ही कार्य कर रहे थे।
जूनियर डाक्टरों की पढ़ाई भी ठप
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के न्यूरों सर्जरी इकाई के प्रभारी डॉ एनएन गोपाल प्रोफसर भी थे यानी इलाज के साथ वह जूनियर डाक्टरों को न्यूरो सर्जरी पढ़ाते भी थे। लेकिन उनके इस्तीफे से जूनियर डाक्टरों की पढ़ाई भी ठप हो चुकी है। डॉ गोपाल से इस्तीफा देने का कारण पूछा गया तो उन्होंने इसे निजी कारण बताया। हलांकि यह जगजाहिर हो चुका है कि इनकी प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगाम के बाद वह नाराज चल रहे थे और यह कदम उठाया।
खोलेंगे अस्पताल
प्रो.एनएन गोपाल इलाहाबाद मंडल ही नहीं सूबे के मशहूर न्यूरो सर्जरी के एक्सपर्ट डाक्टरों में गिने जाते थे। हाल- फिलहाल वह सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास में मरीजों को देख रहे हैं। जहां 200 रूपये प्रति मरीज फीस ले रहे हैं। नजदीकी बता रहे हैं कि डा गोपाल इलाहाबाद में ही अस्पताल खोलेंगे। फिलहाल उनकी प्राइवेट प्रैक्टिस जारी रहेगी। जिस पर अब चाहकर भी योगी सरकार नकेल नहीं कस पायेगी।












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