मायावती ने ऐसे ही सपा से हाथ नहीं मिलाया है ,यहां पढ़ें यूपी की 10 सीटों पर राज्यसभा चुनाव का पूरा गुणा-गणित
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इटावा। उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए बसपा ने सपा से हाथ मिला लिया है। हालांकि सपा-बसपा के साथ आने के बाद लोग कई तरह की कयासें लगा रहे हैं लेकिन राजनीति में कुछ भी बेवजह नहीं होता उसके पीछे होती है एक बड़ी और सोची समझी रणनीति। ऐसी ही एक रणनीति सपा-बसपा ने भी अपनाई है जिसके तहत बसपा सपा की मदद से अपना उम्मीदवार राज्यसभा में भेजेने की जुगत में है। मायावती ने कहा कि यह चुनावी समझौता नहीं, बल्कि 'इस हाथ ले, उस हाथ दें' का फॉर्मूला है। जानिए इस बार के राज्यसभा चुनाव का पूरा प्रोसेस...

क्या है राज्यसभा का गणित?
यूपी में विधानसभा की 403 और राज्यसभा के लिए 31 सीटें हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 325, सपा के 47, बसपा 19 और कांग्रेस के 7 सदस्य हैं।
राज्यसभा सदस्य के निर्वाचन का अधिकार विधानसभा सदस्य को होता है। यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं और राज्यसभा के चुनाव 10 सीटों के लिए होना है।
राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला है- (खाली सीटें + एक) कुल योग से विधानसभा की सदस्य संख्या से भाग देना। इसका जो जवाब आए उसमें भी एक जोड़ने पर जो संख्या होती है। उतने ही वोट एक सदस्य को राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए चाहिए। यूपी की सदस्य संख्या 403 है। खाली सीट 10+1= 11। 403/ 11= 36.63। 36.4 +1= 37.63। यूपी राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक सदस्य को औसतन 37 विधायकों का समर्थन चाहिए।
इस आंकड़े की बात करें तो बीजेपी के खाते में 8 जबकि सपा के खाते में एक सीट जा रही है क्योंकि सपा के पास 47 विधायक हैं। सपा की बची 10, बसपा की 19 कांग्रेस की 7 सीटें और 1 रालोद की सीट मिलाकर ही बीएसपी अपना उम्मीदवार राज्यसभा भेज सकती हैं।

विधानसभा में क्या है दलीय स्थिति
-बीजेपी-312
-अपना दल (एस)-9
-सपा-47
-बीएसपी-19
-कांग्रेस-7
-सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी-4
-राष्ट्रीय लोक दल-1
-निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल-1
-निर्दलीय-3
-नोमिनेटेड-1
नोट-बीजेपी+अपना दल (एस)+सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी गठबंधन में हैं। इस तरह बीजेपी गठबंधन की 325 सीटें हैं।

कांग्रेस को भी दिया गठबंधन का ऑफर
मायावती ने कांग्रेस को भी ऑफर दिया कि राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में बसपा के वोट लेने हैं तो बदले में यूपी में मदद करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि "हमारी पार्टी में अभी इतने विधायक नहीं हैं कि हम खुद से चुनकर अपना मेंबर राज्यसभा भेज दें और ना ही समाजवादी पार्टी के पास इतने मेंबर हैं कि वो अपने दो लोगों को राज्यसभा भेज सके। इसलिए हमने तय किया है कि हम उनका एमएलसी बना देंगे और वो अपने वोट हमें ट्रांसफर कर देंगे, ताकि हम राज्यसभा में अपना सदस्य भेज सकें।
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