रामपुर से गायब बेटी की खोज के लिए पीड़िता मां के पैसों पर पुलिसवाले मुंबई में उड़ा रहे मौज

रामपुर। उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर की एक मां अपनी अपह्रत बेटी को वापस पाने के लिए पुलिस से पिछले करीब दो माह से गुहार लगा रही है और पुलिसवाले उसकी गाढ़ी कमाई के रुपयों से मुम्बई में पिछले दस दिन से ऐश काट रहे हैं। मां की फरियाद को जिले में कोई सुनने को तैयार नहीं है। पीड़िता से पुलिसकर्मियों ने एसी टिकट बुक करवाए और अब मुम्बई में रोजाना रहने के तीन हजार रुपये का खर्च करवा रहे हैं। करीब चालीस हजार रुपये खर्च करने के बावजूद न तो आरोपियों को पकड़ा और न ही बेटी को बरामद कर सके हैं। पुलिस को विभाग से जबकि यात्रा भत्ता दिया जाता है।

रामपुर से गायब हुई थी 16 साल की बेटी

रामपुर से गायब हुई थी 16 साल की बेटी

जिला रामपुर की पुलिस मुंबई जाकर वहां से आना नहीं चाहती और मौज कर रही है। पुलिस यह मौज एक पीड़ित मां के रुपयों पर उड़ा रही है। जी हां, यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। जिले के सिविल लाइंस क्षेत्र में पहाड़ी गेट स्थित कांशीराम आवासीय योजना में रहने वाली विधवा मेहरुन्निसा की सोलह वर्षीय बेटी आसमा करीब डेढ़ माह पहले गायब हो गई। मेहरुन्निसा की पीड़ित मां की यदि मानें तो उसकी नाबालिग बेटी को पड़ोस में आने वाले सुलेमान, शाहजेब और फराज जबरदस्ती कार में डालकर फरार हो गये। तब से लेकर आज तक फरियादी मां अपनी बेटी को पाने और आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है।

पुलिसकर्मी मुंबई जाकर कर रहे मौज

पुलिसकर्मी मुंबई जाकर कर रहे मौज

पहले तो आरोपियों को ढूंढने सिविल लाइंस पुलिस जिला उधम सिंह नगर के रूद्रपुर सहित अन्य स्थानों पर गई। पीड़िता की यदि मानें तो शुरू से लेकर अभी तक सारा खर्चा पुलिस उनसे ही करवा रही है। हलांकि मुख्य आरोपी के परिजनों तक पर कोई दबाव नहीं बनाया गया। फिलहाल आरोपियों और बेटी का सुराग मुंबई में मिला तो आरोपियों को बम्बई में जाकर ढूंढने के लिए यहां से एसआई उदयवीर सिंह, पुलिसकर्मी संजीव कुमार और महिला पुलिसकर्मी महिन्द्री करीब दस दिन पहले रवाना हुए। इसके लिए पीड़िता से पुलिस वालों ने एसी क्लास के टिकट कराये। साथ ही पिछले दस दिन से पीड़ित मां के बेटे से मुंबई में लगातार खर्चा कराया जा रहा है।

पीड़ित मां और बेटे से पुलिस ऐंठ रही पैसे

पीड़ित मां और बेटे से पुलिस ऐंठ रही पैसे

पीड़ित मां की यदि मानें तो रिजर्वेशन के लिए पुलिसकर्मियों ने अपने आधार कार्ड व अन्य पहचान पत्र दिये। साथ ही बेटे के साथ उसके ही नाम पर बम्बई के होटल में दो कमरे लेकर रह रहे हैं जिसका रोजाना का कम से कम खर्च तीन हजार रुपये है। पीड़िता के इस तरह की चालीस हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। बीड़ी बनाकर और बेटों द्वारा रुपये देने से निर्धन कॉलोनी में अपना गुजारा करने वाली फरियादी मां द्वारा पुलिस से पूछने पर जवाब मिलता है कि केस आखिर किया ही क्यों था? केस किया है तो खर्च भी उठाओ।

गायब बेटी का पता लगाने की गुहार

गायब बेटी का पता लगाने की गुहार

पुलिसकर्मी बम्बई में घूम-घूमकर मौज उड़ा रहे हैं जिसकी एक सेल्फी पीड़ित के बेटे ने अपनी मां को भेजी है। आपको बता दें कि पुलिस द्वारा दबिश और जांच-पड़ताल के लिए राजस्व से यात्रा भत्ते के रूप में रुपया दिया जाता है लेकिन यहां पुलिस दोनों हाथों में लडडू हैं। बाद में पुलिसकर्मी विभाग से भी यात्रा भत्ते के रूप में मोटा रुपया लेंगे। फरियादी मां रेल टिकट, आधार कार्ड की कॉपी, दिये गये पर्चों, बैंक द्वारा रुपया हस्तांतरण करने और मुंबई में होटल के बिल दिखाते हुए फफक पड़ती है और अपनी बेटी को पाने की गुहार लगाती है लेकिन उसकी कोई सुनने वाला नहीं है।

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