Ramadan 2026: बीवी लगाए मेकअप तो क्या मकरूह हो जाता है रोजा? - 10 सवालों में रोजेदार के हर जवाब
Lucknow Ramadan 2026 Shia-Sunni Helpline: रमजान का पवित्र महीना इबादत, सब्र और शरई मसायल की पाबंदी का समय है। रोजेदारों के मन में अक्सर ऐसे सवाल उठते हैं जिनका सही जवाब जानना ज़रूरी होता है, ताकि रोजा और इबादत पर कोई असर न पड़े। भारत में लखनऊ (Lucknow) की मशहूर शिया हेल्पलाइन (आयतुल्लाह सैयद सादिक हुसैनी शिराजी के कार्यालय से) और सुन्नी हेल्पलाइन (इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया, फरंगी महल) रोजेदारों की शरई मार्गदर्शन के लिए सक्रिय हैं।
यहां 10 आम सवालों के जवाब दिए गए हैं, जो मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी (शिया) और मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली की अध्यक्षता वाले पैनल (सुन्नी) से लिए गए हैं। ये जवाब रमजान 2026 (1447 हिजरी) के लिए प्रासंगिक हैं। 10 सबसे पूछे जाने वाले सवाल और जवाब ...

1. रोजेदार पहले नमाज पढ़े या पहले इफ्तार करे? किसमें ज्यादा सवाब है?
- जवाब (शिया): इमाम मुहम्मद बाकिर (अ.स.) के फरमान के मुताबिक, नमाज को इफ्तार पर तरजीह दें। लेकिन अगर समूह ऐसे हो जो इफ्तार पहले पसंद करता है, तो उनके साथ इफ्तार करें। सुन्नी/शिया दोनों में आम: इफ्तार जल्दी करना सुन्नत है, लेकिन मगरिब नमाज़ के बाद इफ्तार बेहतर।
2. रोजेदार के लिए इफ्तार में सबसे बेहतर क्या है?
- जवाब: रसूल-ए-खुदा (स.अ.व.) खजूर और हल्के गर्म पानी से इफ्तार फरमाते थे। यह सुन्नत है - तुरंत एनर्जी मिलती है और ब्लड शुगर बैलेंस रहता है।
3. औरत अगर मेकअप कराए तो क्रीम की खुशबू से रोज़ा मकरूह हो जाता है?
- जवाब (शिया): नहीं, रोजा मकरूह नहीं होता। खुशबू बाहर से लगाने से रोजा पर असर नहीं पड़ता।
4. खुम्स में माल-ए-इमाम (अ.स.) से बच्चों की किताबें या फीस अदा कर सकते हैं?
- जवाब (शिया): हां, बच्चों की शिक्षा में खुम्स खर्च किया जा सकता है।
5. क्या एक साथ कई लोग मिलकर किसी मरहूम की क़ज़ा नमाज़ और रोज़े अदा कर सकते हैं?
- जवाब (शिया): हां, रख सकते हैं। इसमें तरतीब (क्रम) जरूरी नहीं।
6. रोजे की हालत में बार-बार हिचकी आने से रोज़ा खराब हो जाता है?
- जवाब (सुन्नी): नहीं, इससे रोजे पर कोई असर नहीं होता।
7. नमाज़ पढ़ते वक्त अगर किसी गैर-नमाजी का लुकमा (बता दिया) ले लिया तो क्या हुक्म है?
- जवाब (सुन्नी): ऐसी सूरत में नमाज़ फासिद (टूट) हो जाएगी।
8. किसी ने अमानत के तौर पर रकम रखी है, तो उस पर जकात किसके जिम्मे है?
- जवाब (सुन्नी): अमानत रखने वाले के जिम्मे नहीं, बल्कि जिसकी रकम है उसके जिम्मे है। अगर इख्तियार दे दिया तो आप भी अदा कर सकते हैं।
9. पूरे महीने के रोज़ों का फिद्या एक साथ दिया जा सकता है?
- जवाब (सुन्नी): हां, एक साथ अदा किया जा सकता है।
10. पेशाब के दौरान खून निकलने से रोजा टूट जाता है?
- जवाब (सुन्नी): नहीं, रोजा नहीं टूटता।
शिया/सुन्नी दोनों में आम रूलिंग: अगर खून बीमारी या बिना इरादे के निकल रहा है (जैसे यूरीन में ब्लड), तो रोजा सही रहता है। रोजा तोड़ने वाले अमल इरादतन खाना-पीना, उल्टी आदि हैं - अनइंटेंशनल ब्लीडिंग (नाक से, घाव से या यूरीन में) से रोजा नहीं टूटता, जब तक कमजोरी न हो जाए। अगर बड़ी मात्रा में खून निकलकर कमजोरी हो तो कजा रख सकते हैं, लेकिन रोजा टूटना नहीं माना जाता।
Ramadan 2026 Shia-Sunni Helpline: हेल्पलाइन डिटेल्स (रमजान 2026 के लिए)
- शिया हेल्पलाइन (मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी आदि): सुबह 10-12 बजे - 9415580936, 9839097407। महिलाओं के लिए अलग: 6386897124 (खातून आलेमा)।
- सुन्नी हेल्पलाइन (इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया, फरंगी महल, लखनऊ - मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली): दोपहर 2-4 बजे - 9415023970, 9335929670, 9415102947, 7007705774, 9140427677।
ये हेल्पलाइन देश-विदेश से सवालों का जवाब देती हैं। अगर कोई सवाल हो तो इन नंबरों पर संपर्क करें - रोजा सही तरीके से रखने के लिए मार्गदर्शन बेहद जरूरी है।












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