Ram Mandir: राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकेंड का मुहूर्त, जो वापस दिलाएंगे 500 साल पुराना गौरव
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर रामलला का मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए तैयार है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान को एक उत्सव के रूप में मनाएगा। इसके लिए अयोध्या में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। नए भवन में रामलला को विरामान करने यानी प्राण प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान का कार्यक्रम एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक रामलला की प्राण प्रतिष्ठा यानी अस्थाई मंदिर से नए भवन में स्थापित करने के लिए महज 84 सेकंड का मुहूर्त शुभ है।
राम नगरी में मुगल आक्रांताओं को बाद काफी कुछ बदल दिया गया था। इसके साथ ही अयोध्या के पौराणिक गौरव को भी ठेस पहुंची। लंबे समय तक संघर्ष के बाद देश की सर्वोच्च अदालत के फैसला आया। जिसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट का गठन हुआ और श्री राम जन्मभूमि पर फिर से राम मंदिर को स्थापित करने के लिए निर्माण कार्य शुरू किया गया। हालांकि इससे पहले भारत समेत दुनिया के कोने- कोने में मौजूद सनातन धर्मियों के मन में राम मंदिर बनते देखना एक स्वप्न सा हो गया था। लेकिन अब वो शुभ घड़ी आई है, जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न किया जाएगा।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने जो मुहूर्त चुना उसे सबसे सटीक माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य ने 12 बजकर 29 मिनट 8 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकंड तक का मुहूर्त दिया है। इस घड़ी में ही रामलला को नए भवन में स्थापित किया जाएगा।
प्राण प्रतिष्ठा के लिए 22 जनवरी की डेट ही क्यों?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कई ज्योतियों से मंथन के बाद 22 जनवरी की तारीख रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए तय की। हालांकि ज्योतियों ने 17 जनवरी से 25 जनवरी के बीच 5 तारीख में से किसी का चयन करने की सलाह दी थी। जबकि काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ में 22 जनवरी तारीख और एक मुहूर्त चुना। इंडिया टुडे ने न्यूज प्लेटफॉर्म आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक ज्योतिशाचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने 22 जनवरी के मुहूर्त का महत्व बताते हुए कहा कि ये कई मायनों में शुभ है। इस दिन 84 सेकेंड का मुहूर्त ऐसा है जो पांचों दोषों से मुक्त है। यानी 22 जनवरी के दिन 12 बजकर 29 मिनट 8 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकंड तक की घड़ी अग्निबाण मृत्युबाण,चोरवाण, नृपवाण और रोगवान से मुक्त है।












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