Ram Mandir Scam: क्या भक्तों के पैसे हुए गायब? कांग्रेस की हाईकोर्ट जज से जांच की मांग, BJP-RSS पर क्या कहा?
Ram Mandir Donation Scam: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर BJP-RSS पर सीधा निशाना साधा है। गुरुवार (18 जून) को अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद अजय राय ने पत्रकारों से बातचीत में मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
राय ने कहा, 'यह भगवान राम की जन्मभूमि है। यहां BJP-RSS के लोग भ्रष्टाचार कर रहे हैं। पहले जमीन के घोटाले हुए, अब भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे की चोरी हो रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जन-सहयोग के नाम पर भारी रकम जुटाई गई, लेकिन उसका सही उपयोग नहीं हो रहा है।

अजय राय की प्रमुख मांगें
- चढ़ावा चोरी मामले की जांच हाईकोर्ट के मौजूदा सिटिंग जज की अध्यक्षता में हो।
- SIT एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
- गड़बड़ी में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और सच्चाई जनता के सामने आए।
अजय राय ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है। भक्तों की भावनाओं से जुड़े पैसे में कोई गड़बड़ी अस्वीकार्य है।
विवाद की जड़ क्या?
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले का मामला इस महीने की शुरुआत में तब सुर्खियों में आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये का कोई हिसाब-किताब नहीं है। अखिलेश ने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की थी।
इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से SIT गठन की मांग की। योगी सरकार ने तीन सदस्यीय SIT (लखनऊ कमिश्नर, IG और फाइनेंस विभाग के विशेष सचिव) गठित कर दी। SIT राम मंदिर पहुंचकर ट्रस्ट सदस्यों, कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर रही है।
SIT ने अब तक चढ़ावा गिनती से जुड़े कुछ कर्मचारियों (जिनमें टिन्नू यादव उर्फ रामशंकर समेत 5 लोगों) के नाम सामने निकाले हैं और करीब 2 करोड़ रुपये की रिकवरी भी की है। हालांकि, बड़े स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कांग्रेस का रुख और राजनीतिक मायने समझें...
अजय राय ने इस मामले को केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान जुटाए गए धन और अब रोजाना आने वाले चढ़ावे दोनों में अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि BJP इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है।
राय ने SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता वाली जांच की मांग दोहराई। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े मामले में जांच निष्पक्ष और विश्वसनीय होनी चाहिए, ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे।
ट्रस्ट और सरकार का पक्ष क्या है?
राम मंदिर ट्रस्ट ने सभी आरोपों से इनकार किया है। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय समेत अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि आंतरिक ऑडिट चल रहा था, जिसके आधार पर SIT गठित की गई। ट्रस्ट का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ही स्वतंत्र जांच का रास्ता चुना गया।
नृपेंद्र मिश्रा (राम मंदिर निर्माण समिति चेयरमैन) ने हाल ही में कहा कि निगरानी में कमी रही, लेकिन चंपत राय की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने "बेईमानों को 7 वंश तक श्राप" लगने की बात कही।
2027 चुनाव से पहले सियासी बवाल
यह विवाद उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले BJP के लिए असुविधाजनक साबित हो सकता है। राम मंदिर BJP की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। अगर चढ़ावा घोटाला साबित हुआ तो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस और सपा इस मुद्दे को 'भगवान राम के नाम पर लूट' बताकर विपक्षी एकता और हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अजय राय का अयोध्या दौरा कांग्रेस की सक्रियता का संकेत है, जो पिछले कुछ वर्षों से यूपी में कमजोर रही है।
आगे क्या?
SIT को रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा जल्द पूरी होने वाली है। अगर रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं तो कार्रवाई अनिवार्य होगी। साथ ही, मंदिर प्रशासन में CEO (सीनियर IAS) नियुक्ति और डिजिटल पारदर्शी सिस्टम (CCTV बैकअप, रीयल-टाइम ऑडिट) जैसे सुधारों की चर्चा तेज हो गई है।
राम मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। चढ़ावा उनकी श्रद्धा का प्रतीक है। इस मामले की निष्पक्ष, तेज और पारदर्शी जांच जरूरी है ताकि आस्था पर कोई धब्बा न लगे। अजय राय की मांग चाहे राजनीतिक हो, लेकिन पारदर्शिता की अपेक्षा हर पक्ष की होनी चाहिए। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।













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